वर्ल्ड कप और चैंम्पियंस ट्रॉफी भारत से होंगे शिफ्ट...! इंटरनेशनल क्रिकेट पर दिखने लगा भारत-PAK के राजनीतिक तनाव का असर

पड़ोसी देशों से तनाव के चलते आईसीसी 2029 चैंपियंस ट्रॉफी और 2031 वर्ल्ड कप भारत से बाहर शिफ्ट कर सकती है. ऑस्ट्रेलिया को विकल्प माना जा रहा है जिससे खेल और राजनीति में टकराव बढ़ गया है.

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

नई दिल्ली : अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) भविष्य के बड़े क्रिकेट आयोजनों को लेकर एक बड़ी दुविधा में फंसी नजर आ रही है. भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच बढ़ते राजनयिक तनाव ने अब खेल के मैदानों को भी अपनी चपेट में ले लिया है. मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 2029 की चैंपियंस ट्रॉफी और 2031 के वर्ल्ड कप को भारत से बाहर किसी दूसरे जगह पर शिफ्ट करने की चर्चाएं तेज हैं. खेलों पर राजनीति का यह साया क्रिकेट प्रेमियों के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है.

बिगड़ते रिश्तों ने बढ़ा दी चिंताएं 

आपको बता दें कि भारत और उसके पड़ोसियों के बीच बिगड़ते रिश्तों ने आईसीसी की चिंताएं काफी बढ़ा दी हैं. हाल ही में बांग्लादेश ने भारत में टी20 वर्ल्ड कप मैच खेलने से साफ इनकार कर दिया था, जिसके बाद उसकी जगह स्कॉटलैंड को शामिल किया गया. पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) ने भी बांग्लादेश के समर्थन में भारत के खिलाफ मैचों के बहिष्कार की धमकी दी थी. हालांकि बाद में आईसीसी के आश्वासन के बाद पाकिस्तान ने अपना रुख बदला, लेकिन ये घटनाएं एक बड़े खतरे की ओर इशारा करती हैं.

वैकल्पिक योजना पर काम कर रही ICC

बिगड़ते हालात को देखते हुए आईसीसी अब एक वैकल्पिक योजना पर काम कर रही है. 'द एज' की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत से मेजबानी छीनकर ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों को संभावित आयोजक बनाया जा सकता है. पाकिस्तान पहले से ही अपने मैच भारत में नहीं खेलता है और उनके मुकाबले पड़ोसी देशों में आयोजित किए जाते हैं. बीसीसीआई और पीसीबी के बीच यह समझौता भी हो चुका है कि बड़े टूर्नामेंटों में दोनों देशों के मुकाबले किसी तटस्थ स्थान पर ही खेले जाएंगे.

2029 और 2031 का भविष्य अधर में

भारत को 2029 में चैंपियंस ट्रॉफी की मेजबानी करनी है, लेकिन आईसीसी को डर है कि बांग्लादेश वहां खेलने से मना कर सकता है. इससे भी बड़ी चुनौती 2031 का वर्ल्ड कप है, जिसकी संयुक्त मेजबानी भारत और बांग्लादेश को करनी है. यदि दोनों टीमें एक-दूसरे के देश जाने से इनकार करती हैं, तो टूर्नामेंट का आयोजन एक बड़ी मुसीबत बन जाएगा. 2023 के वनडे वर्ल्ड कप के बाद से ही उपमहाद्वीप में क्रिकेट पर राजनीति का बोलबाला रहा है, जो खेल की भावना को आहत कर रहा है.

कम होता जा रहा बड़े टूर्नामेंटों का रोमांच

मैचों को तटस्थ स्थानों पर आयोजित करना क्रिकेट बोर्डों और ब्रॉडकास्टर्स के लिए किसी सिरदर्द से कम नहीं है. खिलाड़ियों के सफर, ठहरने और लाइव कवरेज के लिए संसाधनों को बार-बार प्रबंधित करना बहुत खर्चीला और थकाने वाला कार्य होता है. साथ ही, समय के अंतर के कारण टीवी दर्शकों की संख्या पर भी नकारात्मक असर पड़ता है. खेल से ज्यादा ध्यान अब सुरक्षा और कूटनीति पर केंद्रित हो गया है, जिससे बड़े टूर्नामेंटों का रोमांच कम होता जा रहा है और एक असहज माहौल बना हुआ है.

BCCI दुनिया का सबसे अमीर बोर्ड है 

इन तमाम चिंताओं के बावजूद, भारतीय प्रशंसकों को वर्ल्ड कप जैसे आयोजनों से दूर रखना लगभग नामुमकिन है. भारत के पास दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट प्रशंसक वर्ग है, जो आईसीसी के राजस्व का मुख्य आधार है. यदि टूर्नामेंट को भारत से बाहर शिफ्ट किया जाता है, तो आईसीसी को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा. बीसीसीआई दुनिया का सबसे अमीर बोर्ड है और वह किसी भी कीमत पर मेजबानी खोने को तैयार नहीं होगा. यह पूरा विवाद क्रिकेट की लोकप्रियता और व्यापार के बीच का संघर्ष बन गया है.

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