USA और इजरायल जल्द ही ईरान के खिलाफ शुरू कर सकते हैं बड़ा सैन्य अभियान : सूत्र

संयुक्त राज्य अमेरिका और इजरायल बहुत जल्द ईरान के खिलाफ एक बड़े सैन्य अभियान शुरू कर सकते हैं. एक्सियोस की एक रिपोर्ट के अनुसार यह कार्रवाई पिछले साल हुए 12 दिनों के युद्धों की तुलना में कहीं अधिक व्यापक होग और इसे कई हफ्तों तक आगे बढ़ाया जा सकता है.

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

नई दिल्ली : पश्चिम एशिया में युद्ध के बादल एक बार फिर गहराने लगे हैं. अमेरिका और इजरायल ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को रोकने के लिए एक व्यापक सैन्य हमले की तैयारी कर रहे हैं. एक्सियोस की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन केवल छोटे हमलों तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि एक पूर्ण सैन्य अभियान की योजना बना रहा है. कूटनीतिक कोशिशों के बावजूद दोनों देशों की सेनाओं ने क्षेत्र में अपनी ताकत बढ़ा दी है, जिससे किसी भी वक्त जंग शुरू होने की आशंका जताई जा रही है.

बड़े युद्ध की तैयारी में अमेरका-इजरायल 

आपको बता दें कि एक्सियोस की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि यह संभावित सैन्य अभियान पिछले साल के 12 दिनों के संघर्ष की तुलना में बहुत बड़े दायरे में होगा. यदि यह योजना आगे बढ़ती है, तो यह युद्ध हफ्तों तक चल सकता है. ट्रंप प्रशासन एक ऐसी रणनीति तैयार कर रहा है जो छोटे स्तर की कार्रवाइयों से कहीं आगे निकलकर एक पूर्ण सैन्य युद्ध जैसी नजर आएगी. यह इजरायल और अमेरिका की संयुक्त शक्ति का एक बड़ा और आक्रामक प्रदर्शन होने वाला है.

बातचीत में सफलता की संभावना पर गहरा संदेह

जिनेवा में वर्तमान में ईरान के साथ परमाणु बातचीत और कूटनीतिक प्रयास जारी हैं. हालांकि, एक्सियोस की रिपोर्ट में शामिल अधिकारियों ने किसी बड़ी सफलता की संभावना पर गहरा संदेह व्यक्त किया है. वार्ता की मेज पर बातचीत भले ही चल रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है. क्षेत्र में अमेरिकी सेनाओं की लगातार बढ़ती तैनाती इस बात का स्पष्ट संकेत है कि वाशिंगटन अब कूटनीति की सफलता के बजाय सीधे सैन्य विकल्प को प्राथमिकता दे रहा है.

सैन्य विकल्प ही अंतिम रास्ता 

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बार-बार ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं का मुकाबला करने के महत्व पर जोर दिया है. हाल के दिनों में सहयोगियों और सलाहकारों के साथ हुई गहन चर्चाओं में उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि यदि तेहरान सार्थक रियायतें देने में विफल रहता है, तो सैन्य विकल्प ही उनके पास अंतिम रास्ता होगा. ट्रंप प्रशासन अब तेहरान से कोई समझौता करने के बजाय उसे सीधे चुनौती देने की तैयारी में है, ताकि क्षेत्र में परमाणु खतरों को हमेशा के लिए मिटाया जा सके.

हथियारों और विमानों की भारी तैनाती

मध्य पूर्व में अमेरिकी नौसेना और वायु सेना की भारी वृद्धि ने विश्लेषकों के बीच हलचल मचा दी है. ओपन फ्लाइट-ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में युद्धक उपकरण और आधुनिक विमान लेकर 150 से अधिक अमेरिकी सैन्य कार्गो विमान इस क्षेत्र में पहुंचे हैं. यह इतनी बड़ी सैन्य तैनाती है जो आमतौर पर केवल किसी बड़े युद्ध की पूर्व संध्या पर देखी जाती है. भारी हथियारों और सैन्य संसाधनों का यह जमावड़ा सीधे तौर पर ईरान को घेरने के लिए किया गया है.

आर्थिक अस्थिरता का बढ़ेगा खतरा 

इतने बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान शुरू करने का फैसला पूरे मध्य पूर्व की सुरक्षा और भविष्य को नया आकार दे सकता है. एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, इस युद्ध का पूरे क्षेत्र पर नाटकीय प्रभाव पड़ेगा और यह राष्ट्रपति ट्रंप के शेष तीन वर्षों के कार्यकाल के लिए भी दूरगामी परिणाम लेकर आएगा. इस टकराव से न केवल वैश्विक सुरक्षा समीकरण पूरी तरह बदल जाएंगे, बल्कि इससे दुनिया भर में कूटनीतिक और आर्थिक अस्थिरता बढ़ने का खतरा भी पैदा हो गया है.

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