रोबो डॉग से ड्रोन सॉकर तक हंगामा, एआई समिट में दावे, वीडियो और माफी ने मचाया भूचाल

दिल्ली की एआई इम्पैक्ट समिट में एक निजी यूनिवर्सिटी ने रोबो डॉग और ड्रोन को लेकर बड़े दावे किए, सोशल मीडिया ने जांच की, सवाल उठे, सफाई आई और आखिरकार स्टॉल खाली करना पड़ा, अब बहस तकनीक से ज्यादा भरोसे पर है।

Lalit Sharma
Edited By: Lalit Sharma

नई दिल्ली के भारत मंडपम में एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान गलगोटिया यूनिवर्सिटी के स्टॉल पर एक रोबो डॉग प्रदर्शित किया गया। कैमरे पहुंचे और प्रतिनिधि ने दावा किया कि इसे यूनिवर्सिटी के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में विकसित किया गया है। यही बयान पूरे विवाद की शुरुआत बना। तकनीकी प्रदर्शनी अचानक बहस का मुद्दा बन गई। सवाल उठने लगे कि क्या यह दावा पूरी तरह सही है।

क्या सोशल मीडिया ने कुछ ही घंटों में तस्वीर बदल दी?

रोबो डॉग का वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर तुलना शुरू हो गई। यूजर्स ने चीन निर्मित एक मॉडल से इसकी बनावट और डिजाइन की समानता दिखाई। लिंक साझा किए गए और कहा गया कि यह प्रोडक्ट पहले से बाजार में मौजूद है। आरोप लगे कि विदेशी मॉडल को अपना बताकर पेश किया गया। कुछ ही घंटों में स्टॉल चर्चा का केंद्र बन गया।

क्या ‘डिवेलप’ और ‘बिल्ड’ का फर्क समझाने में चूक हुई?

मीडिया से बातचीत में प्रोफेसर ने कहा कि रोबोट को बिल्ड नहीं बल्कि डिवेलप किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि किसी प्लेटफॉर्म पर रिसर्च करना और पूरी तरह खुद बनाना अलग बातें हैं। लेकिन कैमरे पर जो संदेश गया, वह स्पष्ट नहीं था। लोगों को लगा कि यूनिवर्सिटी ने इसे पूरी तरह खुद बनाया है। शब्दों की यही अस्पष्टता विवाद को गहरा करती गई।

क्या यूनिवर्सिटी को आखिरकार माफी मांगनी पड़ी?

बढ़ते विवाद के बाद गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने एक्स पर बयान जारी कर माफी मांगी। कहा गया कि स्टॉल पर मौजूद प्रतिनिधि को तकनीकी जानकारी ठीक से नहीं मिली थी। उन्हें मीडिया से बात करने की अनुमति भी नहीं थी। यूनिवर्सिटी ने साफ किया कि उसका मकसद गलत प्रस्तुति देना नहीं था। साथ ही यह भी बताया कि उसने समिट से अपना स्टॉल खाली कर दिया है।

क्या रोबो डॉग के बाद ड्रोन सॉकर ने नया मोर्चा खोल दिया?

रोबो डॉग का मामला ठंडा भी नहीं पड़ा था कि ड्रोन सॉकर का वीडियो वायरल हो गया। वीडियो में प्रोफेसर दावा करती दिखीं कि ड्रोन की एंड टू एंड इंजीनियरिंग यूनिवर्सिटी में हुई है। उन्होंने कैंपस में भारत का पहला ड्रोन सॉकर एरीना होने की बात कही। यह दावा भी सोशल मीडिया की जांच के घेरे में आ गया।

क्या कोरियाई मॉडल से तुलना ने विवाद और बढ़ाया?

कुछ यूजर्स ने दक्षिण कोरिया की कंपनी हेलसेल के मॉडल से इस ड्रोन की तुलना की। कहा गया कि वीडियो में दिखाया गया ड्रोन उसी स्ट्राइकर वी 3 एआरएफ जैसा है। कीमत और फीचर तक गिनाए गए। इंडिया यूथ कांग्रेस ने भी इस पर टिप्पणी की। आरोप लगा कि विदेशी तकनीक को भारतीय इनोवेशन बताकर पेश किया गया।

क्या इस पूरे मामले ने भरोसे पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया?

यह विवाद सिर्फ एक रोबोट या ड्रोन का नहीं रहा। यह शैक्षणिक ईमानदारी और पारदर्शिता का सवाल बन गया। तकनीक के दौर में हर दावा तुरंत परखा जाता है। अगर शब्दों में सावधानी न हो तो संस्थान की साख दांव पर लग सकती है। एआई समिट का मकसद तकनीकी क्षमता दिखाना था, लेकिन इस घटना ने भरोसे की अहमियत को सामने ला दिया।

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