दिल्ली के कमरों से नहीं होगा उम्मीदवारों का चयन...असम चुनावों की आहट के बीच कांग्रेस ने अपनी रणनीति में किया बड़ा बदलाव

असम में जल्द ही विधानसभा चुनाव होने वाले है. कांग्रेस महासचिव और सांसद प्रियंका गांधी वर्तमान में अपने दो दिवसीय गुवाहाटी यात्रा पर है. पार्टी ने असम चुनावी रणनीति में एक बड़ा और जमीनी बदलाव करने का फैसला किया है. अब कांग्रेस अपने उम्मीदवारों के चयन के लिए एक नया सिस्टम लागू करेगी, जिससे पार्टी के अंदर पायलट प्रोजेक्ट के रूप में देखा जा रहा है. 

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

नई दिल्ली : असम में विधानसभा चुनावों की आहट के साथ ही कांग्रेस पार्टी ने अपनी पारंपरिक चुनावी रणनीति और कार्यशैली में एक बड़ा और साहसिक बदलाव किया है. कांग्रेस महासचिव और स्क्रीनिंग कमेटी की अध्यक्ष प्रियंका गांधी वाड्रा खुद इस नए मिशन की कमान संभाल रही हैं. वे गुरुवार को गुवाहाटी के दो दिवसीय महत्वपूर्ण दौरे पर पहुंच रही हैं. जहां वे इस नई चयन प्रक्रिया की बारीकियों की विस्तृत समीक्षा करेंगी. इस पायलट प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य केवल चुनाव जीतना नहीं बल्कि जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं का भरोसा जीतना है.

कांग्रेस की पुरानी परंपरा में बदलाव

आपको बता दें कि प्रियंका गांधी ने उम्मीदवारों के चयन के लिए दिल्ली केंद्रित पुरानी व्यवस्था को पूरी तरह पलट दिया है. अब प्रदेश चुनाव समिति के नेताओं को बार-बार राष्ट्रीय राजधानी के चक्कर नहीं लगाने होंगे. स्क्रीनिंग कमेटी के सदस्य खुद जिलों में जाकर प्रत्यक्ष रूप से स्थिति का जायजा ले रहे हैं. प्रियंका का मानना है कि स्थानीय जमीनी हकीकत को समझे बिना सही उम्मीदवार का चयन मुमकिन नहीं है. इस नई प्रणाली से टिकटों के बंटवारे में होने वाली गुटबाजी को समाप्त करने और पारदर्शिता लाने की कोशिश की गई है.

सामाजिक समीकरणों पर विशेष ध्यान

इस नई प्रक्रिया के तहत सामाजिक समीकरणों का विशेष रूप से ध्यान रखा गया है. इमरान मसूद को उन क्षेत्रों की जिम्मेदारी दी गई है जहां अल्पसंख्यक आबादी अधिक है. जैसे डिब्रूगढ़. धेमाजी. तिनसुकिया और उदलगुरी. वहीं आदिवासी नेता सप्तगिरी शंकर उलका माजुली. जोरहाट. गोलाघाट और नगांव जैसे आदिवासी बहुल जिलों में जाकर जनता की नब्ज टटोल रहे हैं. सिरिवेला प्रसाद को शिवसागर. लखीमपुर. सोनितपुर और दरांग जैसे जिलों का प्रभार सौंपा गया है. यह रणनीतिक सोशल इंजीनियरिंग हर समुदाय का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए है.

हितधारकों के साथ सीधा संवाद

कमेटी के सदस्य अपनी यात्रा के दौरान केवल सक्रिय नेताओं तक ही सीमित नहीं हैं. वे निष्ठावान कार्यकर्ताओं. नागरिक समाज के प्रबुद्ध सदस्यों और अनुभवी स्थानीय पत्रकारों के साथ बंद कमरों में लंबी मंत्रणा कर रहे हैं. इन मुलाकातों का मुख्य मकसद संभावित उम्मीदवारों की समाज में वास्तविक छवि और उनकी लोकप्रियता को गहराई से समझना है. इस तरह का माइक्रो-मैनेजमेंट पार्टी के भीतर नई जान फूंक रहा है. स्थानीय कार्यकर्ताओं को अब लग रहा है कि टिकट वितरण जैसे बड़े फैसलों में उनकी राय अब काफी मायने रखेगी.

पिछले चुनावी प्रदर्शन से सबक

वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव परिणामों ने कांग्रेस को अपनी पुरानी रणनीति पर गहराई से विचार करने को मजबूर किया है. पिछली बार पार्टी ने 95 सीटों पर चुनाव लड़ा था. लेकिन उसे केवल 29 सीटों पर ही सफलता मिल सकी थी. इसके विपरीत सत्ताधारी भाजपा ने मात्र 93 सीटों पर लड़कर 60 सीटों पर शानदार जीत दर्ज की थी. इस बार प्रियंका गांधी का दृढ़ संकल्प है कि उम्मीदवारों के चयन में कोई भी मामूली चूक न हो. वे बेहतर चयन के जरिए सत्ता विरोधी लहर का लाभ उठाना चाहती हैं.

भविष्य के लिए नया ब्लूप्रिंट

यदि असम में यह नई चयन योजना पूरी तरह सफल रहती है. तो कांग्रेस इसे आगामी अन्य राज्यों के चुनावों में एक ब्लूप्रिंट के रूप में लागू करेगी. एआईसीसी के नेताओं का कहना है कि इस प्रणाली का उद्देश्य पार्टी के भीतर जवाबदेही और पारदर्शिता लाना है. इमरान मसूद ने स्पष्ट किया कि वे हर जिले का दौरा कर राजनीतिक और गैर-राजनीतिक लोगों से मिल रहे हैं और जल्द ही अपनी विस्तृत रिपोर्ट प्रियंका जी को सौंप देंगे. इस आधुनिक प्रबंधन से कांग्रेस को अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने की उम्मीद है.

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