'राहुल गांधी देश की सुरक्षा के लिए खतरनाक', किरेन रिजिजू के बयान से मचा सियासी बवाल
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में राहुल गांधी पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें देश की सुरक्षा के लिए खतरनाक बताया. उन्होंने संसद में हुए हंगामे और प्रधानमंत्री पर दिए गए बयानों को लेकर भी कड़ी आपत्ति जताई.

नई दिल्ली: संसद की कार्यवाही के बीच सियासत एक बार फिर गरमा गई है. केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें देश की सुरक्षा के लिए 'खतरनाक' बताया. उनके इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और भी तल्ख हो गया है. रिजिजू के आरोपों ने संसद से लेकर सोशल मीडिया तक नई बहस छेड़ दी है. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि राहुल गांधी ऐसे लोगों से संपर्क रखते हैं जो देश के हितों के खिलाफ काम करते हैं.
रिजिजू का दावा है कि राहुल गांधी देश और विदेश में उन समूहों और व्यक्तियों से मिलते रहे हैं जिनकी विचारधारा भारत के खिलाफ मानी जाती है. उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने पहले कभी ऐसा विपक्ष का नेता नहीं देखा, जो इस तरह के विवादों में घिरा हो. रिजिजू के अनुसार, राहुल गांधी का यह रवैया देश की सुरक्षा और लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है. उन्होंने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि विपक्ष के नेता का व्यवहार जिम्मेदार नहीं है और इससे गलत संदेश जाता है.
संसद में हंगामे पर नाराजगी
किरन रिजिजू ने हाल के संसदीय सत्र में हुए हंगामे का जिक्र करते हुए कहा कि लोकतंत्र में विरोध और बहस स्वाभाविक है, लेकिन मर्यादा का पालन भी जरूरी है. उन्होंने कहा कि जब उनकी पार्टी विपक्ष में थी, तब उन्होंने सदन की गरिमा बनाए रखी. उनके मुताबिक, स्पीकर की ओर कागज फेंकना या बैनर लेकर हंगामा करना संसदीय परंपराओं के खिलाफ है. उन्होंने राहुल गांधी के व्यवहार को गैर-जिम्मेदाराना बताया और कहा कि विपक्ष के नेता को पूरे विपक्ष का प्रतिनिधित्व करना होता है. ऐसे में सदन के बाहर जाकर कठोर शब्दों का इस्तेमाल करना या नाटकीय विरोध करना उचित नहीं है.
प्रधानमंत्री पर दिए गए बयानों पर प्रतिक्रिया
रिजिजू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर राहुल गांधी के बयानों पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि अगर किसी के पास कोई ठोस सबूत है तो उसे सामने रखना चाहिए. बिना प्रमाण के आरोप लगाने से देश में भ्रम और निराशा फैलती है. मंत्री का कहना है कि प्रधानमंत्री का नाम बिना आधार के विवादों में घसीटना ठीक नहीं है.
उन्होंने कहा कि इस तरह की राजनीति से देश को फायदा नहीं होता, बल्कि लोकतांत्रिक संवाद कमजोर होता है. रिजिजू के बयान के बाद राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है. जहां सत्तापक्ष इसे गंभीर मुद्दा बता रहा है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक हमला मान रहा है. आने वाले दिनों में यह विवाद और गहराने की संभावना है.


