भारत-म्यांमार सीमा के पास सैनिकों पर आतंकी हमला, गोलीबारी में 4 असम राइफल्स के जवान घायल

मणिपुर के तेंगनौपाल जिले में भारत-म्यांमार सीमा के पास असम राइफल्स के पेट्रोल पर आतंकियों ने हमला किया, जिसमें चार जवान घायल हुए. घायल सैनिकों को लेमाखोंग के मिलिट्री अस्पताल में भर्ती कराया गया. सुरक्षा बलों ने इलाके में सर्च ऑपरेशन और अतिरिक्त तैनाती की.

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

नई दिल्ली : मणिपुर के तेंगनौपाल जिले में भारत-म्यांमार सीमा के पास आज सुबह आतंकियों ने असम राइफल्स के पेट्रोल पर फायरिंग की, जिसमें चार जवान घायल हो गए. यह हमला सैबोल गांव के पास सीमा स्तंभ संख्या 87 के निकट हुआ. हमले के तुरंत बाद सुरक्षा बलों ने मौके पर नियंत्रण बनाए रखने के साथ जवाबी कार्रवाई की, जिसमें नागरिकों की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा गया.

घायल सैनिकों को अस्पताल में भर्ती कराया गया

आपको बता दें कि हमले में घायल हुए चार जवानों को तुरंत एयरलिफ्ट कर मणिपुर के लैमाखोंग स्थित मिलिट्री अस्पताल में भर्ती कराया गया. पुलिस और रक्षा सूत्रों ने बताया कि उनकी हालत स्थिर है और उन्हें आवश्यक चिकित्सा सुविधा प्रदान की जा रही है.

सीमा क्षेत्र में बढ़ती आतंकवादी गतिविधि
तेङनौपाल जिले का यह इलाका भारत-म्यांमार सीमा के पास स्थित है और इसे आतंकवादियों की सक्रियता वाला क्षेत्र माना जाता है. इलाके में पहले भी बार-बार उग्रवादी गतिविधियां देखने को मिल चुकी हैं. इस हमले के बाद सुरक्षा बलों ने क्षेत्र में अपनी उपस्थिति बढ़ा दी है. सेना और अर्धसैनिक बलों ने इलाके में व्यापक सर्च ऑपरेशन शुरू किया और अतिरिक्त टुकड़ियां तैनात कर दी गई हैं ताकि हमलावरों का पता लगाया जा सके और नागरिक सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.

कोई संगठन अभी तक हमले की जिम्मेदारी नहीं उठा पाया
अधिकारियों ने यह भी बताया कि इस हमले की जिम्मेदारी किसी भी उग्रवादी या आतंकवादी संगठन ने अभी तक नहीं ली है. सुरक्षा बल पूरे इलाके में सतर्कता बरतते हुए संभावित खतरों को रोकने और किसी भी तरह की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए लगातार कार्रवाई कर रहे हैं.

सुरक्षा बलों की सक्रियता और क्षेत्र नियंत्रण
हमले के बाद सुरक्षा बलों ने इलाके में अपने नियंत्रण को मजबूत किया है. नियमित पेट्रोलिंग, निगरानी और सर्च ऑपरेशन के साथ-साथ अतिरिक्त जवानों को तैनात कर क्षेत्र में स्थायी सुरक्षा उपाय किए जा रहे हैं. अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की सतर्कता से न केवल आतंकवादी गतिविधियों को रोका जा सकता है बल्कि नागरिकों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सकती है.

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