दिल्ली में शराब की निजी दुकानों के कर्मचारियों को सता रहा है अनिश्चित भविष्य का डर

दिल्ली में शराब की उन दुकानों में काम करने वालें कार्मचारी इस समय दुविधा का सामना कर रहे है। 1 सितंबर से बंद होने जा रही हैं। एक ओर जहां ये कर्मचारी जीवन यापन करने व परिवार पालने का वैकल्पिक रास्ते

Sagar Dwivedi
Edited By: Sagar Dwivedi

दिल्ली में शराब की उन निजी दुकानों में काम करने वालें कार्मचारी इस समय दुविधा का सामना कर रहे है, 1 सितंबर से बंद होने जा रही हैं। एक ओर जहां ये कर्मचारी जीवन यापन करने व परिवार पालने का वैकल्पिक रास्ते तलाशने में जुटे हैं, तो वहीं दूसरी और उन्हें अपने घर वापस जाने का डर सता रहा है। आपको बता दे कि  दिल्ली सरकार ने पुरानी आबकारी नीति को वापस लेने की घोषणा की है, जिसके चलते ये कर्मचारी अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं। सरकार के निर्णय के तहत 1 सितंबर से शराब की निजी दुकानें बंद हो जाएंगी।

लाजपत नगर में शराब की दुकान पर काम करने वाले सेल्समैन रामदत्त प्रजापति ने कहा कि इस काम से जुड़े लोगों का भाग्य दांव पर लगा है क्योंकि उन्हें इस बात का कोई अंदाजा नहीं है कि नई नीति आने के बाद भी सरकार निजी शराब दुकानों के संचालन की अनुमति देगी या नहीं। प्रजापति ने कहा कि, "मेरे पास उत्पाद बेचने के अलावा कोई अन्य कौशल नहीं है, इसलिए मैं ऐसी ही नौकरी खोजने की कोशिश करूंगा। अगर नौकरी नहीं मिली, तो मुझे फल या सब्जियां बेचनी पड़ सकती हैं, लेकिन मैं घर पर बेकार नहीं बैठ सकता क्योंकि मेरा बच्चे और पत्नी मुझ पर निर्भर हैं, घर की सारी जिम्मेदारी मुझ पर है। अगर मुझे नई नौकरी नहीं मिली तो मुछे अपने गृहनगर लौटना होगा।

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