राहुल गांधी 'मुस्लिम' शब्द से क्यों कतराते हैं? ओवैसी ने कांग्रेस की उड़ाई नींद, पार्टी में मचा बवाल

कई कांग्रेस नेताओं ने राहुल गांधी की रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं. वे कहते हैं कि राहुल जी अपने जोशीले भाषणों में SC, ST और OBC का जिक्र बार-बार करते हैं, मगर मुस्लिम शब्द बोलने से कतरा रहे हैं. क्या ये सोची-समझी चुप्पी है या वोट बैंक की नई चाल? पार्टी में अब बहस छिड़ गई है.

Goldi Rai
Edited By: Goldi Rai

कांग्रेस पार्टी के अंदर मुस्लिम नेताओं की बढ़ती बेचैनी और असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM के उभरते प्रभाव ने पार्टी के उच्च नेतृत्व के सामने गंभीर चुनौतियां खड़ी कर दी हैं. बिहार विधानसभा चुनावों और महाराष्ट्र के हालिया नगर निकाय चुनावों के परिणामों ने दिखाया है कि मुस्लिम मतदाता पारंपरिक रूप से कांग्रेस के साथ जुड़े वोट बैंक में बदलाव आ रहा है. AIMIM की मजबूत उपस्थिति से कांग्रेस के कई मुस्लिम चेहरे अब आलाकमान की रणनीति पर खुलकर सवाल उठा रहे हैं, खासकर अल्पसंख्यक मुद्दों पर पार्टी की मौन नीति को लेकर.

ये चुनावी नतीजे कांग्रेस के लिए चेतावनी की तरह हैं, जहां AIMIM ने मुस्लिम बहुल इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत की है. पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का मानना है कि यदि कांग्रेस ने अल्पसंख्यक समुदाय के मुद्दों पर मुखरता नहीं दिखाई, तो यह वोट बैंक पूरी तरह से AIMIM की झोली में जा सकता है, जिससे पार्टी का सेक्युलर आधार और कमजोर हो जाएगा.

चुनाव परिणामों की सच्चाई

बिहार विधानसभा चुनाव में सीमांचल के मुस्लिम बहुल 24 विधानसभा क्षेत्रों में NDA ने 14 सीटें जीतीं, जबकि महागठबंधन को महज 5 सीटें मिलीं. यहां AIMIM ने अकेले 5 सीटों पर कब्जा जमाकर सबको चौंकाया. इसी तरह महाराष्ट्र के हालिया नगर निगम चुनावों में, खासकर मुंबई में AIMIM ने 8 वार्ड जीते, जबकि कांग्रेस केवल 24 सीटों तक सिमट गई. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हुसैन दलवई ने कहा कि ये 8 सीटें कांग्रेस की हो सकती थीं, अगर पार्टी ने मजबूती दिखाई होती.

पार्टी के भीतर गुस्सा और 'जयचंद' टिप्पणी

मीडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इन मुद्दों पर पार्टी में उठ रही आवाजों पर कांग्रेस के लोकसभा व्हिप माणिक्यम टैगोर ने कड़ी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने ऐसे नेताओं को जयचंद कहा है. पूर्व केंद्रीय मंत्री शकील अहमद ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए उन्हें असुरक्षित और डरा हुआ नेता करार दिया. शकील अहमद ने पिछले साल पार्टी छोड़ दी थी. उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस मुस्लिम नेताओं को अनदेखा कर रही है, क्योंकि उसे लगता है कि मुस्लिम मुद्दों पर बोलने से हिंदू वोटर नाराज हो जाएंगे. पूर्व राज्यसभा सदस्य राशिद अल्वी ने कहा कि गुलाम नबी आजाद और नसीमुद्दीन सिद्दीकी जैसे प्रमुख नेताओं के पार्टी छोड़ने की वजह यही है कि कांग्रेस में मुस्लिम नेतृत्व के लिए जगह लगातार सिकुड़ रही है.

राहुल गांधी की रणनीति पर उठे सवाल

पार्टी सूत्रों और नेताओं के अनुसार, राहुल गांधी की राजनीतिक रणनीति पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. कई नेताओं का कहना है कि राहुल गांधी अपने भाषणों में SC, ST और OBC का जिक्र बार-बार करते हैं, लेकिन 'मुस्लिम' शब्द का इस्तेमाल करने से कतराते हैं. CPI के दीपांकर भट्टाचार्य ने गठबंधन बैठकों में सुझाव दिया था कि कांग्रेस को उमर खालिद और शरजील इमाम जैसे मामलों में जमानत और व्यवहार पर आवाज उठानी चाहिए, लेकिन पार्टी ने चुप्पी साध रखी.

दोहरे मापदंड का आरोप

उत्तर प्रदेश के एक कांग्रेस नेता ने पार्टी पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि अगर नोएडा में कोई हिंदू डूबता है या वाराणसी में मंदिर तोड़े जाते हैं, तो कांग्रेस पूरी ताकत से बोलती है. लेकिन जब मॉब लिंचिंग होती है या निजी संपत्ति पर नमाज पढ़ने के लिए गिरफ्तारियां होती हैं, तो आलाकमान पूरी तरह चुप रहता है.

विरोधी आवाज भी मौजूद

पार्टी के सभी नेता इस आलोचना से एकमत नहीं हैं. महाराष्ट्र के एक मुस्लिम AICC नेता का कहना है कि कांग्रेस को मुस्लिम पार्टी के रूप में ब्रांडेड होने का खतरा नहीं मोल लेना चाहिए, क्योंकि भाजपा इसका चुनावी लाभ उठाती है. पार्टी की संतुलित चुप्पी लंबे समय में मुस्लिम समुदाय के हित में साबित होगी, क्योंकि सिर्फ मुस्लिम वोटों से कोई चुनाव नहीं जीता जा सकता.

वैचारिक संकट का सामना

कांग्रेस फिलहाल एक गहरे वैचारिक संकट से जूझ रही है. एक ओर उसे अपने सेक्युलर आधार को बचाना है, वहीं दूसरी ओर AIMIM उसके पारंपरिक मुस्लिम वोट बैंक में सेंधमार रही है. मुस्लिम नेताओं का साफ संदेश है कि रणनीति में बदलाव न हुआ तो पार्टी इस समुदाय का विश्वास और नेतृत्व दोनों खो सकती है.

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