गोमांस बंद करो या हिंदू होने का प्रमाण दो... शंकराचार्य विवाद और भड़का, योगी को 40 दिन का अल्टीमेटम

प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य के साथ हुई घटना ने राजनीतिक-धार्मिक हलकों में तहलका मचा दिया है. मौनी अमावस्या पर संगम स्नान की मांग को लेकर कई दिनों तक अनशन के बाद वे बिना स्नान किए ही मेला छोड़कर चले गए. अब महाशिवरात्रि से ठीक पहले लखनऊ में धर्म संसद बुलाई जा रही है, जहां देशभर के संत तय करेंगे असली हिंदू कौन है.

Goldi Rai
Edited By: Goldi Rai

प्रयागराज: उत्तर प्रदेश में माघ मेले के दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के साथ हुई घटना ने राजनीतिक और धार्मिक हलकों में तूफान खड़ा कर दिया है. मौनी अमावस्या के दिन संगम स्नान की मांग को लेकर कई दिनों तक अनशन करने के बाद शंकराचार्य बिना स्नान किए ही मेला क्षेत्र छोड़कर चले गए, जिसके बाद यह विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है. काशी पहुंचने पर उन्होंने स्पष्ट संकेत दिए कि यह मुद्दा अब और आगे बढ़ेगा, जिससे संत समाज और सरकार के बीच तनाव गहरा गया है. 

शंकराचार्य ने महाशिवरात्रि से ठीक पहले 10 और 11 मार्च को लखनऊ में धर्म संसद आयोजित करने की घोषणा की है. उनका दावा है कि इस आयोजन में देशभर से संत, महंत और आचार्य शामिल होंगे, जहां यह फैसला लिया जाएगा कि असली हिंदू कौन है, हिंदू हृदय सम्राट की उपाधि किसे मिलनी चाहिए और किसे नकली हिंदू करार दिया जाए. इस बयान से विवाद सुलझने की बजाय और अधिक उग्र होता नजर आ रहा है. 

शंकराचार्य का बयान 

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने मीडिया से कहा कि उन्हें सनातन धर्म से पूरा समर्थन मिल रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि देश के हिंदुओं के साथ बड़ा छल हो रहा है. यह छल खुद को योगी, संत और धर्म का ठेकेदार बताने वाले लोग और उनकी पार्टी कर रही है. शंकराचार्य का कहना है कि अब ऐसे नकली हिंदुओं का पर्दाफाश जरूरी हो गया है. शंकराचार्य ने इस मुद्दे को सीधे सरकार से जोड़ते हुए खुली चुनौती दी है. उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश से दुनियाभर में गोमांस की सप्लाई हो रही है. अगर योगी आदित्यनाथ वास्तव में हिंदू हैं, तो 40 दिनों के भीतर उत्तर प्रदेश से गोमांस का निर्यात पूरी तरह रोककर दिखाएं.इसी अल्टीमेटम के आधार पर 40 दिन बाद लखनऊ में धर्म संसद बुलाई गई है. 

हिंदू होने का प्रमाण मांगने से पर हुआ हंगामा 

अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि इतिहास में पहली बार किसी शंकराचार्य से प्रमाण मांगा गया. मुझसे शंकराचार्य होने का प्रमाण पत्र मांगा गया और मैंने प्रमाण दिया. अब वही मापदंड योगी आदित्यनाथ पर भी लागू होना चाहिए. अगर 40 दिनों में गोभक्ति का प्रमाण नहीं दिया गया तो संत समाज लखनऊ में बैठकर निंदा करेगा. माघ मेला छोड़ने को लेकर शंकराचार्य ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि प्रशासन ने उन्हें लालच दिया कि संगम स्नान करा देंगे और फूल बरसाए जाएंगे. अगले साल चारों शंकराचार्यों के लिए प्रोटोकॉल बनाने का भी प्रस्ताव रखा गया. लेकिन उन्होंने यह कहते हुए इनकार कर दिया कि पहले उन बटुकों और संन्यासियों से माफी मांगी जाए जिन पर लाठी बरसाई गई थी. 

संतों और नेताओं की प्रतिक्रियाएं 

शंकराचार्य के बयान पर संत समाज में मतभेद उभर आए हैं. स्वामी नारायणाचार्य ने उनके बयान पर आपत्ति जताते हुए कहा कि वर्ग विशेष को खुश करने के लिए सनातन पर प्रहार किया जा रहा है. योगी जी से सबूत मांगने वाली बात को अनंत श्याम देवाचार्य ने भी गलत बताया. वहीं योगी सरकार के मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने पलटवार करते हुए कहा कि क्या शंकराचार्य सभी हिंदुओं के ठेकेदार हैं. यह विवाद अब सिर्फ धार्मिक नहीं रह गया, बल्कि पूरी तरह राजनीतिक रूप ले चुका है. एक ओर शंकराचार्य इसे सनातन धर्म की रक्षा की जंग बता रहे हैं, तो दूसरी ओर सरकार और उसके समर्थक इसे अनुचित संघर्ष मान रहे हैं. आगामी दिनों में लखनऊ की धर्म संसद इस मामले को और अधिक तेज बना सकती है.

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