तमिलनाडु से उत्तर प्रदेश तक... कर्ज के बोझ तले दबे भारत के ये 10 राज्य
देश में कर्ज के बोझ तले सबसे ज्यादा दबे राज्यों में पश्चिम बंगाल टॉप पर है. राज्य को अपनी कमाई का करीब 42% हिस्सा सिर्फ ब्याज चुकाने में खर्च करना पड़ रहा है. कुछ आंकड़ा वाकई चिंताजनक है और राज्य की वित्तीय सेहत पर बड़ा सवालिया निशान लगा रहा है.

भारतीय अर्थव्यवस्था इन दिनों दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती इकोनॉमी के रूप में अपनी पहचान बना रही है. वर्ल्ड बैंक से लेकर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष तक ने इसकी ताकत को सराहा है, और यह लगातार वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बनी हुई है. लेकिन इस चमक-दमक के पीछे कुछ राज्यों की वित्तीय स्थिति चिंताजनक है, जहां विकास की गति को कर्ज का भारी बोझ प्रभावित कर रहा है.
आरबीआई के वित्त वर्ष 2025 के आंकड़ों से खुलासा हुआ है कि कई प्रमुख राज्यों को अपने टैक्स और नॉन-टैक्स राजस्व का बड़ा हिस्सा कर्ज के ब्याज भुगतान में खर्च करना पड़ रहा है, जो 42 प्रतिशत तक पहुंच गया है. इस वजह से इन राज्यों के पास सड़कें बनाने, स्कूलों और स्वास्थ्य सेवाओं में निवेश करने या नए प्रोजेक्ट्स पर फोकस करने के लिए संसाधन सीमित हो जाते हैं. आइए जानते हैं उन टॉप 10 राज्यों के बारे में जो कर्ज की मार से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं.
सबसे ऊपर कर्ज का बोझ
वित्त वर्ष 2025 में पश्चिम बंगाल पर ब्याज चुकाने का दबाव अन्य राज्यों से कहीं अधिक रहा. राज्य ने टैक्स और नॉन-टैक्स स्रोतों से 1.09 लाख करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त किया, लेकिन इसमें से 45 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा सिर्फ ब्याज भुगतान पर व्यय हो गए. नतीजतन, कुल राजस्व का 42 प्रतिशत हिस्सा इस मद में ही समाहित हो गया.
पंजाब और बिहार
पंजाब इस सूची में दूसरे पायदान पर रहा, जहां अर्जित राजस्व का 34 प्रतिशत हिस्सा ब्याज चुकाने में खर्च हुआ. राज्य का कुल राजस्व संग्रह 70,000 करोड़ रुपये रहा, जबकि कर्ज के ब्याज पर लगभग 24,000 करोड़ रुपये व्यय किए गए. वहीं, तीसरे नंबर पर बिहार आया, जिसने 62,000 करोड़ रुपये के राजस्व में से करीब 21 हजार करोड़ रुपये ब्याज के रूप में दिए, जो कुल का 33 प्रतिशत बनता है.
केरल और तमिलनाडु
केरल ने वित्त वर्ष 2025 में 1.03 लाख करोड़ रुपये का राजस्व एकत्र किया, लेकिन इसका 28 प्रतिशत या लगभग 29,000 करोड़ रुपये ब्याज भुगतान में चला गया. पांचवें स्थान पर तमिलनाडु रहा, जहां कुल संग्रह से 62,000 करोड़ रुपये या 28 प्रतिशत का हिस्सा ब्याज पर खर्च हुआ. हालांकि राज्य का टैक्स राजस्व सबसे ऊंचा रहा, लेकिन कर्ज की समस्या ने इसे भी परेशान रखा.
हरियाणा, राजस्थान और आंध्र प्रदेश
मध्य स्तर का दबावइस सूची में छठे स्थान पर हरियाणा शामिल है, जिसने 94,000 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाया और इसमें से 27 प्रतिशत या करीब 25,000 करोड़ रुपये ब्याज के रूप में चुकाए. सातवें पायदान पर राजस्थान रहा, जहां 1.48 लाख करोड़ रुपये के राजस्व से 38,000 करोड़ रुपये ब्याज भुगतान पर व्यय हुए. इसके अलावा, आंध्र प्रदेश ने 1.2 लाख करोड़ रुपये के राजस्व पर 29 हजार करोड़ रुपये का ब्याज चुकाया.
मध्य प्रदेश और कर्नाटक
नौवें स्थान पर मध्य प्रदेश आया है, जिसका वित्त वर्ष 2025 में टैक्स और नॉन-टैक्स राजस्व 1.23 लाख करोड़ रुपये रहा. इसमें से 27,000 करोड़ रुपये या कुल संग्रह का लगभग 22 प्रतिशत ब्याज भुगतान पर खर्च हुआ. दसवें पायदान पर कर्नाटक रहा, जहां 2.03 लाख करोड़ रुपये के राजस्व से 39,000 करोड़ रुपये या 19 प्रतिशत का हिस्सा ब्याज पर व्यय किया गया.


