यूपी सरकार ने रोकी 68 हजार से ज्यादा कर्मचारियों की सैलरी, क्यों लिया इतना बड़ा एक्शन?

यूपी सरकार ने नियमों के पालन में लापरवाही बरतने वाले 68,236 कर्मचारियों का जनवरी 2026 का वेतन रोक दिया है. सरकार ने साफ किया है कि यह कदम उन कर्मचारियों के खिलाफ उठाया गया है, जिन्होंने तय समय सीमा के भीतर अपनी चल और अचल संपत्ति का विवरण जमा नहीं किया.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने नियमों के पालन में लापरवाही बरतने वाले राज्य कर्मचारियों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए एक साथ 68,236 कर्मचारियों का जनवरी 2026 का वेतन रोक दिया है. इस फैसले के बाद सरकारी दफ्तरों में हलचल तेज हो गई है और कर्मचारियों के बीच चिंता का माहौल बन गया है. 

संपत्ति का विवरण जमा नहीं कराने पर कार्रवाई

सरकार ने साफ किया है कि यह कदम उन कर्मचारियों के खिलाफ उठाया गया है, जिन्होंने तय समय सीमा के भीतर अपनी चल और अचल संपत्ति का विवरण जमा नहीं किया. प्रदेश में कुल 8,66,261 राज्य कर्मचारी कार्यरत हैं. शासन की ओर से सभी कर्मचारियों को निर्देश दिए गए थे कि वे 31 जनवरी 2026 तक मानव संपदा (मानव संविदा) पोर्टल पर अपनी संपत्ति का पूरा ब्योरा अपलोड करें. यह आदेश पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जारी किया गया था. हालांकि, निर्धारित तिथि बीत जाने के बाद समीक्षा में सामने आया कि 68,236 कर्मचारियों ने अब तक यह जानकारी उपलब्ध नहीं कराई. इसके बाद सरकार ने सख्ती दिखाते हुए उनका वेतन रोकने का फैसला किया.

आंकड़ों पर नजर डालें तो संपत्ति का विवरण न देने वालों में सबसे अधिक संख्या तृतीय श्रेणी कर्मचारियों की है. इस श्रेणी के 34,926 कर्मचारी नियमों का पालन नहीं कर पाए. इसके अलावा 22,624 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भी सूची में शामिल हैं. चौंकाने वाली बात यह है कि यह लापरवाही केवल निचले स्तर तक सीमित नहीं रही. द्वितीय श्रेणी के 724 और प्रथम श्रेणी के 2,628 अधिकारी भी समय पर संपत्ति का विवरण नहीं दे सके. इससे स्पष्ट है कि नियमों की अनदेखी हर स्तर पर देखने को मिली है.

योगी सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी थी कि संपत्ति का विवरण देना अनिवार्य है और इसे महज औपचारिक प्रक्रिया नहीं माना जाएगा. शासन ने न केवल समय सीमा तय की थी, बल्कि यह भी चेतावनी दी थी कि आदेशों की अवहेलना करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी. अब वेतन रोकने की कार्रवाई से सरकार ने यह संदेश दिया है कि प्रशासनिक निर्देशों को हल्के में लेने की कोई जगह नहीं है.

 भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रही है. मुख्यमंत्री कई मौकों पर यह दोहरा चुके हैं कि सरकारी सेवा का अर्थ पारदर्शिता, ईमानदारी और जवाबदेही है. अवैध संपत्ति और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण के लिए संपत्ति विवरण को एक अहम औजार माना जा रहा है.

वेतन रुकने के बाद कर्मचारियों में असमंजस की स्थिति है. कुछ कर्मचारियों का कहना है कि तकनीकी दिक्कतों या प्रक्रिया की पूरी जानकारी न होने के कारण वे समय पर विवरण अपलोड नहीं कर सके. वहीं कई कर्मचारी इसे सरकार की सख्त कार्यप्रणाली का परिणाम बता रहे हैं. फिलहाल विभिन्न विभागों में यही चर्चा है कि जल्द से जल्द संपत्ति का विवरण जमा कराकर वेतन बहाल कराया जाए.

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