यासीन मलिक ने ही वायुसेना के जवानों पर चलाई थी गोली, कोर्ट में 2 चश्मदीदों ने गवाही
1990 के एयर फोर्स अधिकारियों की हत्या मामले में यासीन मलिक के खिलाफ बड़ा मोड़ आया है. टाडा अदालत में दो चश्मदीदों ने मलिक को मुख्य हमलावर के रूप में पहचाना. गवाहों ने अन्य तीन आरोपियों की भी पहचान की और हमले की भयावह स्थिति बताई.

नई दिल्ली : 1990 में हुए उस सनसनीखेज हमले के मामले में, जिसमें भारतीय वायुसेना के चार अधिकारियों की हत्या कर दी गई थी, जम्मू में चल रही टाडा अदालत की सुनवाई में एक बड़ा मोड़ आया है. जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) के पूर्व आतंकी और अलगाववादी नेता यासीन मलिक के खिलाफ दो महत्वपूर्ण चश्मदीद गवाहों ने अदालत में बयान दर्ज कराए. इन गवाहों ने साफ-साफ कहा कि हमले के दौरान मुख्य हमलावर के रूप में उन्होंने मलिक को खुद अपनी आंखों से देखा था.
दाढ़ी की शैली बदली है, लेकिन चेहरा नहीं
तीन अन्य आरोपियों की भी पहचान
मुख्य गवाह ने सिर्फ मलिक ही नहीं, बल्कि घटना में शामिल अन्य तीन आरोपियों शौकत बख्शी, नन्ना जी, और जावेद अहमद की भी अदालत में पहचान की. गवाह के अनुसार, ये सभी उस समय सनट नगर स्थित हमले की जगह पर मौजूद थे और हमले में सक्रिय रूप से शामिल थे.
मौत के साये से बच निकलने की दास्तान
गवाह ने अदालत को बताया कि हमले के वक्त हालात कितने भयानक थे. उसने बताया कि नन्ना जी ने उसके ऊपर AK राइफल तान दी थी और जैसे ही वह गोली चलाने वाला था, उसने अपनी स्थिति बदलकर किसी तरह खुद को बचा लिया. गवाह के अनुसार, हवा में गोलियों की आवाज गूंज रही थी और सभी तरफ अफरा-तफरी फैल गई थी. गोली लगने के बाद एक घायल अधिकारी को वे लोग किसी तरह अस्पताल ले जाने में कामयाब हुए.
“चार अधिकारी अब नहीं रहे”
गवाह ने भावुक होकर बताया कि अस्पताल पहुँचाने के बाद भी उन्हें यह नहीं पता चला कि कौन बचा है और कौन नहीं. अगले दिन खबर मिली कि चार घायल अधिकारी दम तोड़ चुके हैं. इस जानकारी ने पूरे कैंप और स्थानीय लोगों को गहरे सदमे में डाल दिया.
जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए मलिक
यासीन मलिक, जो इस समय दिल्ली की तिहाड़ जेल में आतंकी फंडिंग मामले में उम्रकैद की सज़ा काट रहा है, अदालत में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मौजूद रहा. अदालत ने इस मामले के सभी प्रमुख गवाहों की जिरह की अनुमति दे दी है. सीबीआई की ओर से विशेष लोक अभियोजक एस.के. भट्ट भी सुनवाई के दौरान मौजूद थे.
परिवारों को न्याय की ओर कदम
यह मामला 35 वर्षों से चला आ रहा है और अब जब अदालत में नए सिरे से गवाह सामने आ रहे हैं, तो प्रभावित परिवारों को पहली बार न्याय की उम्मीद महसूस हो रही है. अभियोजन पक्ष, जिसकी अगुवाई एस.के. भट्ट कर रहे हैं, ने अदालत के सामने ठोस साक्ष्य और गवाही पेश की है, जिससे मामले में नई गति आई है. अगली सुनवाई 29 नवंबर को तय की गई है और मामले को फास्ट-ट्रैक आधार पर आगे बढ़ाया जा रहा है.


