Views से नहीं मिलते पैसे, फिर Instagram से कैसे हो रही है लाखों की कमाई?
इंस्टाग्राम पर लाखों व्यूज आने के बावजूद जब क्रिएटर्स को एक रुपये की भी डायरेक्ट कमाई नहीं होती, तो सवाल उठता है कि आखिर इस प्लेटफॉर्म से हर महीने लाखों रुपये कैसे कमाए जा रहे हैं. हकीकत यह है कि यहां कमाई का खेल व्यूज से नहीं, बल्कि ब्रांड वैल्यू, ऑडियंस ट्रस्ट और स्मार्ट मोनेटाइजेशन से चलता है.

नई दिल्ली: इंस्टाग्राम रील्स पर लाखों व्यूज़ आने के बावजूद प्लेटफॉर्म क्रिएटर्स को सीधे एक रुपया भी नहीं देता. ऐसे में यह सवाल अक्सर उठता है कि फिर हजारों कंटेंट क्रिएटर्स हर महीने इसी प्लेटफॉर्म से मोटी कमाई कैसे कर रहे हैं. देखने में यह विरोधाभास लगता है, लेकिन असल सच्चाई इससे कहीं अलग है.
हकीकत यह है कि इंस्टाग्राम पर कमाई का खेल व्यूज़ का नहीं, बल्कि इंफ्लुएंस, ऑडियंस के भरोसे और ब्रांड वैल्यू का है. रील्स सिर्फ आपकी पहुंच बढ़ाती हैं, जबकि कमाई के रास्ते उससे आगे खुलते हैं. आइए आसान शब्दों में समझते हैं कि बिना पर-व्यू (per-view) पेमेंट के भी इंस्टाग्राम कैसे बन चुका है कमाई का बड़ा जरिया.
व्यूज़ नहीं, ब्रांड डील्स से आती है असली कमाई
इंस्टाग्राम पर सबसे बड़ी कमाई ब्रांड डील्स और स्पॉन्सरशिप से होती है. कंपनियां उन क्रिएटर्स को चुनती हैं, जिनकी ऑडियंस एक्टिव और भरोसेमंद होती है. यहां केवल व्यूज़ मायने नहीं रखते, बल्कि एंगेजमेंट रेट और कंटेंट की निच (Niche) ज्यादा अहम होती है.
अगर किसी क्रिएटर की ऑडियंस किसी प्रोडक्ट कैटेगरी से मेल खाती है, तो ब्रांड अपने प्रोडक्ट को प्रमोट कराने के लिए भुगतान करता है. छोटे क्रिएटर्स भी एक स्पॉन्सर्ड पोस्ट के लिए हजारों रुपये चार्ज करते हैं, जबकि बड़े क्रिएटर्स की एक डील की कीमत लाखों तक पहुंच जाती है.
एफिलिएट मार्केटिंग से हर बिक्री पर कमाई
एफिलिएट मार्केटिंग इंस्टाग्राम से कमाई का तेजी से बढ़ता तरीका बन चुका है. इसमें क्रिएटर किसी प्रोडक्ट का लिंक या कोड शेयर करता है. जब कोई फॉलोअर उस लिंक के जरिए खरीदारी करता है, तो क्रिएटर को कमीशन मिलता है.
यह तरीका खासकर टेक, फैशन, ब्यूटी और फिटनेस कैटेगरी में ज्यादा लोकप्रिय है. यहां व्यूज़ से ज्यादा जरूरी कन्वर्जन होता है. कम फॉलोअर्स होने के बावजूद, अगर ऑडियंस टारगेटेड हो तो अच्छी कमाई संभव है.
पेड प्रमोशन और पर्सनल ब्रांडिंग का फायदा
कई छोटे बिजनेस और लोकल ब्रांड्स अपने प्रोडक्ट या सर्विस के प्रचार के लिए इंस्टाग्राम क्रिएटर्स से पेड प्रमोशन करवाते हैं. इसके बदले क्रिएटर्स तय रकम चार्ज करते हैं.
इसके साथ ही पर्सनल ब्रांडिंग भी एक बड़ा फैक्टर है. इंस्टाग्राम प्रोफाइल एक डिजिटल पोर्टफोलियो की तरह काम करती है, जिसके जरिए वर्कशॉप, कंसल्टिंग, फ्रीलांस प्रोजेक्ट्स और कोलैबोरेशन के मौके मिलते हैं. यानी इंस्टाग्राम सीधे नहीं, लेकिन इनडायरेक्ट इनकम के कई दरवाजे खोलता है.
बोनस, सब्सक्रिप्शन और क्रिएटर टूल्स से अतिरिक्त कमाई
इंस्टाग्राम ने क्रिएटर्स के लिए कई मोनेटाइजेशन टूल्स भी लॉन्च किए हैं, जिनमें सब्सक्रिप्शन, बैजेस और गिफ्ट्स शामिल हैं. लाइव सेशन के दौरान फॉलोअर्स सपोर्ट अमाउंट भेज सकते हैं.
कुछ क्षेत्रों में रील्स बोनस जैसे प्रोग्राम भी समय-समय पर उपलब्ध कराए जाते हैं. वहीं सब्सक्रिप्शन फीचर के जरिए क्रिएटर्स एक्सक्लूसिव कंटेंट देकर मंथली इनकम बना सकते हैं. साफ है कि इंस्टाग्राम भले ही व्यूज़ का सीधा पैसा न दे, लेकिन कमाई के कई मजबूत रास्ते जरूर देता है.


