वंदे भारत स्लीपर ट्रेन शुरू होते ही लोगों ने की ऐसी हरकतें, वीडियो देख भड़क उठे रेलवे अधिकारी...कह दी ये बात
देश की पहली स्लीपर वंदे भारत ट्रेन को 17 जनवरी को पीएम मोदी ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था. इस ट्रेन के शुरू होने के कुछ ही घंटों के बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल होने लगा, जिसमें साफ देखा जा सकता है कि ट्रेन के फर्श पर यात्रियों के द्वारा इस्तेमाल कप और रैपर बिखरे पड़े थे. हालांकि, वीडियो वायरल होने पर रेलवे ने इस पर आपत्ती जताते हुए संज्ञान लिया है.

नई दिल्ली : देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 जनवरी को पश्चिम बंगाल के मालदा टाउन रेलवे स्टेशन से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. यह ट्रेन हावड़ा से कामख्या के बीच चलाई गई है और इसे भारतीय रेलवे की आधुनिक और प्रीमियम सेवाओं की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है. लॉन्च के साथ ही इस ट्रेन से यात्रियों को बेहतर सुविधाओं और आरामदायक सफर की उम्मीदें जुड़ गई थीं.
शुरू होते ही वायरल हुआ गंदगी का वीडियो
🚨People litter on vande bharat Sleeper train within hours of its inaugural run.
Just see the civic sense pic.twitter.com/cCcvbJJWoL— Indian Infra Report (@Indianinfoguide) January 18, 2026
प्रीमियम ट्रेन, लेकिन पुरानी आदतें बरकरार
आम ट्रेनों में इस तरह की गंदगी को लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन वंदे भारत स्लीपर जैसी एलीट ट्रेन में भी यही हाल देखना कई लोगों के लिए निराशाजनक रहा. आमतौर पर बर्थ, गलियारे और शौचालयों में गंदगी की शिकायतें सुपरफास्ट और एक्सप्रेस ट्रेनों में मिलती रही हैं. हालांकि इस ट्रेन में डस्टबीन और साफ-सफाई की बेहतर व्यवस्था होने के बावजूद यात्रियों का लापरवाह व्यवहार सामने आया.
सफाई व्यवस्था पर रेलवे का पक्ष
वायरल वीडियो को लेकर भारतीय रेलवे ने भी प्रतिक्रिया दी है. एक वरिष्ठ रेलवे अधिकारी ने बताया कि रेलवे की स्वच्छता केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक की साझा जिम्मेदारी है, क्योंकि यह सार्वजनिक संपत्ति है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वंदे भारत ट्रेनों में किसी भी स्थिति से निपटने के लिए प्रशिक्षित ऑन-बोर्ड हाउसकीपिंग स्टाफ हर समय तैनात रहता है, जो जरूरत पड़ने पर तुरंत सफाई करता है.
सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं
इस वीडियो के सामने आते ही सोशल मीडिया पर यात्रियों के व्यवहार को लेकर नाराजगी देखने को मिली. कई यूजर्स ने कहा कि देश को नुकसान पहुंचाने के लिए बाहरी दुश्मनों की जरूरत नहीं, जब लोग खुद ही अपनी सुविधाओं को खराब कर रहे हैं. कुछ लोगों ने इसे नागरिक अनुशासन की कमी बताया, तो कुछ ने ऐसे मामलों में सख्त जुर्माने की मांग की.
सवाल सिर्फ ट्रेन का नहीं, सोच का भी
वंदे भारत स्लीपर ट्रेन से जुड़ा यह मामला केवल एक वीडियो तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश में सार्वजनिक संपत्ति के प्रति लोगों की सोच को उजागर करता है. आधुनिक सुविधाएं तभी सफल हो सकती हैं, जब उनके साथ जिम्मेदारी और अनुशासन भी चले. वरना नई ट्रेनें भी पुरानी समस्याओं का शिकार होती रहेंगी.


