‘मां को वृद्धाश्रम में छोड़ो और ऑफिस...’, बीमार मां के लिए छुट्टी मांगी, तो बॉस ने दी ऐसी सलाह सुनकर होश उड़ जाएगा
रेडिट पर एक पोस्ट ने सबका ध्यान खीच रखा है. एक प्राइवेट बैंक में काम करने वाली लड़की ने अपना अनुभव शेयर किया. जो कुछ उसने लिखा, उसे पढ़कर लोगों का खून खौल उठा.

नई दिल्ली: आज के दौर में जब कंपनियां खुद को कर्मचारियों के हितैषी के रूप में पेश करती हैं, तब एक प्राइवेट बैंक से जुड़ा यह मामला इन दावों की सच्चाई सामने ले आता है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट पर वायरल हो रही एक पोस्ट ने भारतीय वर्क कल्चर में बढ़ती असंवेदनशीलता और टॉक्सिक माहौल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
इस पोस्ट ने न सिर्फ इंटरनेट यूजर्स को झकझोर दिया है, बल्कि यह बहस भी छेड़ दी है कि क्या आज के कॉरपोरेट सिस्टम में इंसानियत की कोई जगह बची है? पोस्ट के आखिर में पूछा गया सवाल अगर आप उस महिला की जगह होते, तो क्या करते? हर किसी को सोचने पर मजबूर कर रहा है.

रेडिट पोस्ट से सामने आई कहानी
रेडिट के r/IndianWorkplace हैंडल से शेयर की गई इस कहानी के मुताबिक, एक प्राइवेट बैंक में काम करने वाली महिला कर्मचारी की मां की तबीयत अचानक बिगड़ गई. दवाइयों के रिएक्शन के कारण उनकी हालत गंभीर हो गई थी और उन्हें लगातार देखभाल की जरूरत थी.
ऐसे हालात में महिला कर्मचारी ने अपने बॉस से कुछ दिनों की छुट्टी मांगी, ताकि वह अपनी मां के पास रह सके. लेकिन उसे जो जवाब मिला, वह किसी मानसिक आघात से कम नहीं था.
‘मां को वृद्धाश्रम भेजो और ऑफिस आओ’
आरोप है कि मैनेजर ने सहानुभूति दिखाने के बजाय काम का दबाव बनाना शुरू कर दिया. कथित तौर पर बॉस ने कहा कि अगर मां की हालत ठीक नहीं हो रही है, तो उन्हें किसी शेल्टर होम या वृद्धाश्रम छोड़ दो, और ऑफिस आ जाओ. यह सुनकर महिला कर्मचारी पूरी तरह टूट गई. जिस संस्थान को उसने वर्षों तक ईमानदारी से अपना समय और मेहनत दी थी, उसी ने मुश्किल वक्त में उसे एक इंसान नहीं, बल्कि सिर्फ एक रिसोर्स समझा.
बीमारी बनाम नौकरी और मजबूरन इस्तीफा
मैनेजर के इस रवैये के बाद महिला के सामने सिर्फ दो रास्ते बचे थे या तो वह बीमार मां को बेसहारा छोड़ दे, या फिर अपने करियर को दांव पर लगा दे. महिला ने इंसानियत को चुना. वह ऑफिस जाना बंद कर बैठी और अंततः उसे नौकरी से इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा.
सोशल मीडिया पर फूटा लोगों का गुस्सा
यह पोस्ट सामने आते ही सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गई. यूजर्स इस टॉक्सिक वर्क कल्चर की जमकर आलोचना कर रहे हैं. कई लोगों ने ऐसे मैनेजर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है. नेटिजन्स का कहना है कि जो कंपनी या मैनेजमेंट कर्मचारियों के सबसे कठिन समय में साथ नहीं दे सकती, वहां काम करना आत्मसम्मान से समझौता करने जैसा है.
भारतीय वर्क कल्चर पर उठते सवाल
यह मामला सिर्फ एक महिला कर्मचारी की कहानी नहीं है, बल्कि उस सिस्टम का आईना है, जहां संवेदनशीलता की जगह टारगेट और प्रोडक्टिविटी को तरजीह दी जा रही है. रेडिट पर वायरल यह पोस्ट भारतीय कॉरपोरेट संस्कृति में नैतिकता और मानवीय मूल्यों के खत्म होते जाने की एक कड़वी सच्चाई बयान करती है.


