'15 लाख में बेचा, टॉर्चर कर कैद किया'... 13 साल बाद मां-बेटे का भावुक मिलन, सुनकर रुला देने वाली आपबीती
बिहार के अररिया जिले से एक ऐसी दिल छू लेने वाली और रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी सामने आई है, जो मां के प्यार, संघर्ष और इंसाफ की जीत की मिसाल है. 55 साल की जरीना खातून ने 13 लंबे सालों तक अपने बेटे के लिए हर रात आंसू बहाए.

अररिया: बिहार के अररिया जिले से मानव तस्करी का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है. 55 वर्षीय जरीना खातून 13 साल के लंबे इंतजार और संघर्ष के बाद आखिरकार अपने बेटे से मिल सकीं. यह मुलाकात सिर्फ खुशी की नहीं, बल्कि दर्द, अन्याय और न्याय की लंबी लड़ाई की गवाह बनी.
साल 2012 में मानव तस्करी रैकेट का शिकार हुए जमशेद उर्फ मुन्ना की कहानी इंसानियत पर सवाल खड़े करती है. उस वक्त महज 12 साल का यह बच्चा आज 25 साल का हो चुका है. मां की आंखों में आंसू और बेटे के चेहरे पर बीते वर्षों का दर्द साफ झलकता है.
मदरसे के नाम पर बेटे को ले गए तस्कर
पीड़िता जरीना खातून ने रोते हुए बताया कि मेरे 12 साल के बेटे को गांव के ही कुछ लोग यूपी के भदोही ले गए थे. उन्होंने कहा था कि वो मेरे बेटे का वहां एक मदरसे में दाखिला करवा देंगे. उस समय उनके पति शारीरिक और मानसिक रूप से अस्वस्थ थे और घर की सारी जिम्मेदारी उन्हीं पर थी. इसी मजबूरी का फायदा उठाकर तस्करों ने उनके बेटे को ले लिया.
कब दर्ज कराई FIR?
जरीना खातून ने बताया कि कुछ ही समय में उन्हें समझ आ गया कि उनके साथ धोखा हुआ है. इसके बाद उन्होंने मोहम्मद जावेद, मुर्शीद और दुखखान के खिलाफ मानव तस्करी का आरोप लगाते हुए FIR दर्ज कराई. हालांकि, इसके बाद उनका संघर्ष और कठिन हो गया.
FIR के बाद परिवार को गांव से निकाला गया
आरोप है कि FIR दर्ज कराने के बाद जरीना और उनके परिवार को बौनसी थाना क्षेत्र के गांव केरला से बाहर निकाल दिया गया. उनका घर तोड़ दिया गया, जिससे वे अररिया शहर में सड़क किनारे रहने को मजबूर हो गए. तमाम अत्याचारों के बावजूद उन्होंने इंसाफ की उम्मीद नहीं छोड़ी.
न्यायपालिका पर भरोसा, आरोपी की जमानत खारिज
जरीना ने बताया कि उन्होंने हर हाल में पुलिस और न्यायपालिका पर भरोसा बनाए रखा. मुख्य आरोपी मोहम्मद जावेद को गिरफ्तार किया गया. तीन महीने पहले अररिया की ADJ-IV कोर्ट ने उसकी जमानत याचिका खारिज करते हुए मुन्ना की सुरक्षित बरामदगी सुनिश्चित करने का आदेश दिया.
कितने लाख में बेचा गया बेटा और शोषण
जरीना खातून का आरोप है कि उनके बेटे को करीब 15 लाख रुपये में बेच दिया गया था. मुन्ना को भदोही, अंडमान और म्यांमार ले जाया गया, जहां उसके साथ अमानवीय व्यवहार हुआ. 26 दिसंबर को उसे अररिया रेलवे स्टेशन पर छोड़ दिया गया, लेकिन जब वह गांव पहुंचा तो घर खाली मिला.
कैसे हुई से मां-बेटे की मुलाकात?
इसके बाद स्थानीय पुलिस और बाल कल्याण समिति (CWC) ने सोमवार को मां-बेटे की मुलाकात कराई. 2012 में 12 साल का मुन्ना अब 25 साल का हो चुका है. परिवार को अब उम्मीद है कि वे एक नई जिंदगी की शुरुआत कर पाएंगे.
मुन्ना ने सुनाई कैद और यातनाओं की कहानी
मुन्ना ने बताया कि उसे पहले भदोही, फिर अंडमान और बाद में म्यांमार ले जाया गया. वहां कई लोगों के साथ उससे जबरन दिन-रात काम कराया जाता था. कई बार खाना तक नहीं दिया जाता था. इंजेक्शन लगाए जाते थे और आराम करते पकड़े जाने पर बेरहमी से पिटाई की जाती थी. भागने की कोशिश पर उसे बुरी तरह पीटा गया.
नागालैंड से अररिया तक का खौफनाक सफर
मुन्ना के मुताबिक, बाद में उसे नागालैंड में छोड़ दिया गया. वहां से वह ट्रक और टैंकरों के जरिए सफर करता हुआ आखिरकार अररिया रेलवे स्टेशन पहुंचा. वहां से ऑटो रिक्शा लेकर वह अपने गांव पहुंचा.
मानव तस्करी नेटवर्क पर शिकंजा कसने की तैयारी
अररिया के SDPO सुशील कुमार ने बताया कि पीड़ित युवक को कोर्ट में पेश किया जाएगा और उससे पूछताछ कर मानव तस्करी नेटवर्क की पूरी जानकारी जुटाई जाएगी. मामले में शामिल सभी आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी. यह मामला एक मां के अटूट संघर्ष और न्याय पर भरोसे की जीत की मिसाल बन गया है.


