फिच रेटिंग्स का बड़ा दावा, 2026 में एशिया की सबसे तेज अर्थव्यवस्था रहेगा भारत

वैश्विक रेटिंग एजेंसी Fitch Ratings ने अनुमान जताया है कि भारत 2026 में भी एशिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा. 6.4% की संभावित वृद्धि दर के साथ भारत क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाओं से आगे निकल सकता है.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

नई दिल्ली: वैश्विक रेटिंग एजेंसी Fitch Ratings की ताज़ा रिपोर्ट ने भारत की आर्थिक रफ्तार पर बड़ा भरोसा जताया है. एजेंसी के मुताबिक, भारत वर्ष 2026 में भी एशिया की सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा. अनुमान है कि भारतीय अर्थव्यवस्था 6.4 प्रतिशत की दर से विस्तार करेगी, जो क्षेत्र के कई अन्य देशों से आगे होगी.

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की विकास दर फिलीपींस, इंडोनेशिया और मलेशिया जैसे देशों से बेहतर रहने की संभावना है. बदलते वैश्विक व्यापार परिदृश्य के बावजूद भारत की आर्थिक बुनियाद मजबूत बनी हुई है, जिससे उसकी विकास गति कायम रहने की उम्मीद है.

ट्रेड पैटर्न में बदलाव का सीमित असर

फिच के अनुसार, भारत, इंडोनेशिया और फिलीपींस जैसी अर्थव्यवस्थाओं पर वैश्विक व्यापार पैटर्न में बदलाव का असर सीमित रहेगा. इसका कारण यह है कि ये अपेक्षाकृत बंद अर्थव्यवस्थाएं हैं और इनका मैन्युफैक्चरिंग निर्यात कम है.

भारत अमेरिकी टैरिफ के संभावित जोखिम को कम करने के लिए बहुपक्षीय व्यापार समझौतों पर जोर दे रहा है. हाल के महीनों में भारत ने अमेरिका और यूरोपीय संघ के साथ समझौते किए हैं. अमेरिका के साथ यह करार 6 फरवरी को घोषित किया गया था. एजेंसी ने यह भी कहा कि अमेरिकी टैरिफ का वास्तविक प्रभाव अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है.

नीति और वित्तीय सुधार 

नीतिगत स्तर पर फिच का मानना है कि Reserve Bank of India (RBI) फिलहाल ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा. दिसंबर में कटौती के बाद नीतिगत दर 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रह सकती है.

रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने वित्तीय पारदर्शिता में सुधार किया है और बजट में अधिक व्यय मदों को शामिल किया है. तेज आर्थिक वृद्धि और वस्तु एवं सेवा कर (GST) के प्रभाव से राजस्व संग्रह मजबूत हुआ है. इससे मध्यम अवधि में सरकारी कर्ज में हल्की गिरावट की संभावना बढ़ी है, हालांकि जीडीपी के अनुपात में कर्ज अभी भी ऊंचे स्तर पर बना रह सकता है.

7.3 ट्रिलियन डॉलर का लक्ष्य

भारत, जो वर्तमान में दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, 2030 तक 7.3 ट्रिलियन डॉलर की जीडीपी के साथ तीसरे स्थान पर पहुंचने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा है. यह रफ्तार निर्णायक नीतिगत फैसलों, संरचनात्मक सुधारों और वैश्विक एकीकरण को दर्शाती है.

मजबूत घरेलू मांग, नियंत्रित महंगाई और श्रम भागीदारी में वृद्धि ने आर्थिक विस्तार को सहारा दिया है. घरेलू निवेश में तेजी और निवेशकों के बढ़ते विश्वास से अर्थव्यवस्था को स्थिर और व्यापक आधार मिला है.

विकास की रफ्तार का प्रमाण

हाल ही में Press Information Bureau (PIB) पर जारी रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में मुद्रास्फीति-समायोजित वास्तविक जीडीपी 8.2% बढ़ने का अनुमान है, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह 5.6% थी.

चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.8% रही, जो पिछले वर्ष की समान अवधि में 6.5% थी. सकल मूल्य वर्धन (GVA) के आंकड़े बताते हैं कि दूसरी तिमाही में प्राथमिक क्षेत्र में 3.1%, द्वितीयक क्षेत्र में 8.1% और सेवा क्षेत्र में 9.2% की वृद्धि दर्ज की गई.

पहली छमाही में 8% की विकास दर

वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर) में वास्तविक जीडीपी 8% की दर से बढ़ी, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 6.1% थी. इस दौरान प्राथमिक क्षेत्र में 2.9% की वृद्धि हुई, जबकि द्वितीयक क्षेत्र (7.6%) और तृतीयक क्षेत्र (9.3%) ने मजबूत विस्तार दिखाया.

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