‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ से बढ़ेगा भारत-यूरोप का व्यापार, जानें सेक्टरवार फायदे

भारत और यूरोपीय संघ 27 जनवरी को मदर ऑफ ऑल डील्स के तहत फ्री ट्रेड एग्रीमेंट साइन करेंगे, जो दोनों देशों के व्यापार और निवेश को बढ़ाएगा. इस डील से भारत के कपड़ा, दवा और केमिकल सेक्टर और यूरोप के वाइन, स्पिरिट्स और लग्जरी कार उद्योग को फायदा मिलेगा.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

भारत और यूरोपीय संघ के बीच लंबे समय से चली आ रही ट्रेड डील की लॉन्च डेट फाइनल हो गई है. दोनों पक्ष इस समझौते पर 27 जनवरी को गणतंत्र दिवस के अगले दिन हस्ताक्षर करने वाले हैं. इसे 'मदर ऑफ ऑल डील्स' कहा जा रहा है. यह समझौता ऐसे समय में हो रहा है जब वैश्विक बाजार अस्थिर हैं और अमेरिकी कदमों के चलते ग्लोबल इकोनॉमी पर दबाव बढ़ा है. 

भारत और यूरोप के बीच यह डील रक्षा, टेक्नोलॉजी और अन्य प्रमुख सेक्टर्स के लिए काफी अहम मानी जा रही है. भारत और यूरोपीय संघ के बीच ट्रेड बातचीत की शुरुआत 2007 में हुई थी. तब इसे ब्रॉड-बेस्ड ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट एग्रीमेंट (BTIA) कहा गया. 2007 से 2013 के बीच कई दौर हुए, लेकिन टैक्स, बाजार पहुंच, श्रम नियम, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी और पर्यावरण मानकों पर सहमति नहीं बन पाई. बातचीत कुछ समय के लिए रुकी रही. बाद में 2022 में नई राजनीतिक इच्छा के साथ एक व्यापक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पूरा करने के लिए बातचीत फिर से शुरू हुई.

हालिया प्रगति

फरवरी 2025 में दोनों पक्षों ने डील पर तेजी से काम करने का फैसला किया. 2024-25 में भारत का EU में निर्यात लगभग 75.85 अरब डॉलर रहा, जबकि आयात 60.68 अरब डॉलर तक पहुंचा. यूरोप अब भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन गया है.

भारत को डील से लाभ

इस FTA से भारत के उच्च रोजगार वाले और मूल्यवान सेक्टर को फायदा होगा. कपड़ा, रेडीमेड गारमेंट्स, चमड़ा और समुद्री उत्पादों पर यूरोप में लगे 2-12% टैक्स कम होने से ये उत्पाद सस्ते और अधिक प्रतिस्पर्धी होंगे. दवाइयां और केमिकल्स जैसे ज्ञान-आधारित सेक्टर को आसान मंजूरी और मानक एकरूपता से लाभ मिलेगा. डील के तहत भारत को यूरोप के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) में छूट मिलने की उम्मीद है. हालांकि इस मुद्दे पर अभी बातचीत जारी है.

यूरोप के लिए लाभ

यूरोप के लिए यह समझौता भारत में बड़े बाजार और निवेश के अवसर खोलेगा. वाइन, स्पिरिट्स और लग्जरी कारों पर टैक्स कम होने से ये उत्पाद भारतीय ग्राहकों के लिए सस्ते होंगे. इंडस्ट्रियल मशीनें, इलेक्ट्रिकल सामान, IT और इंजीनियरिंग सेवाओं में यूरोपीय कंपनियों को भी आसान प्रवेश मिलेगा. साथ ही, एयरक्राफ्ट पार्ट्स, हीरे और ग्रीन एनर्जी सेक्टर में निवेश बढ़ने की संभावना भी है.

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