इतिहास में पहली बार रुपया 87 प्रति डॉलर के पार, भारत पर दिखा ट्रंप के टैरिफ का असर

Indian currency fall: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति का असर अब भारतीय रुपये पर साफ दिखने लगा है. सोमवार को रुपया पहली बार 87 प्रति डॉलर के पार फिसल गया, जिससे भारतीय मुद्रा ने अब तक की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की. वैश्विक बाजार में डॉलर की मजबूती ने रुपये समेत कई अन्य करेंसी पर दबाव बढ़ा दिया है.

Shivani Mishra
Edited By: Shivani Mishra

Indian currency fall: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति का असर अब भारतीय मुद्रा पर साफ दिखाई देने लगा है. डॉलर की मजबूती के चलते भारतीय रुपया सोमवार को ऐतिहासिक गिरावट के साथ 87 प्रति डॉलर के पार चला गया. अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर इंडेक्स में आई तेजी ने दुनिया की कई करेंसी पर दबाव बढ़ा दिया है, जिसमें भारतीय रुपया भी शामिल है.

सोमवार को बाजार खुलते ही रुपये में भारी गिरावट देखी गई. शुरुआती कारोबार में रुपया 67 पैसे टूटकर 87.29 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया. इससे पहले शुक्रवार को रुपया 86.61 पर बंद हुआ था, लेकिन सोमवार को यह 41 पैसे कमजोर होकर 87.02 पर खुला, जो फरवरी 2023 के बाद की सबसे कमजोर शुरुआत रही.

डॉलर की मजबूती से बढ़ी मुश्किलें

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कनाडा, मैक्सिको और चीन पर नए टैरिफ लगाने के आदेश दिए हैं, जिससे वैश्विक व्यापार युद्ध (Trade War) की आशंका बढ़ गई है. इसी कारण डॉलर इंडेक्स 1.4% उछलकर 109.84 तक पहुंच गया, जिससे रुपये समेत कई अन्य करेंसी कमजोर हो गईं. रुपये की यह गिरावट पिछले 3-4 महीनों से जारी कमजोरी का हिस्सा है और 2024 में अब तक यह 2.78% गिर चुका है.

ट्रंप के टैरिफ का भारत पर असर

ट्रंप प्रशासन के इस फैसले ने भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है. यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या ट्रंप भविष्य में सभी आयातित सामानों पर 10% अतिरिक्त टैक्स लगा सकते हैं? यदि ऐसा हुआ तो भारत के निर्यात पर सीधा असर पड़ेगा, क्योंकि भारत अमेरिका को बड़ी मात्रा में उत्पाद निर्यात करता है.

आर्थिक संतुलन बनाने की कोशिश

भारत के चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर वी अनंत नागेश्वरन का मानना है कि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि अमेरिकी टैरिफ नीति रुपये को कितना प्रभावित करेगी. उन्होंने कहा कि सरकार ने बजट में टैक्स कटौती के उपाय किए हैं ताकि प्राइवेट सेक्टर का निवेश बढ़े और बाजार में स्थिरता आए. हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अमेरिकी टैरिफ का असली प्रभाव वित्तीय बाजार में दिख सकता है.

अन्य करेंसी भी कमजोर

रुपये की तरह ही चीन, मैक्सिको और कनाडा की करेंसी में भी जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, सोमवार को ऑफशोर ट्रेडिंग में चीन की करेंसी युआन रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई, जबकि मैक्सिकन पेसो और कनाडाई डॉलर भी कई वर्षों के मुकाबले सबसे कमजोर स्थिति में आ गए हैं. इससे व्यापार युद्ध की संभावना और गहरा गई है.

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