77वें गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का भव्य आगमन, पारंपरिक बग्गी से कर्तव्य पथ पहुंचीं
गणतंत्र दिवस 2026 में पहली बार यूरोपीय संघ के दो शीर्ष नेता- यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा. दिल्ली की शानदार परेड में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे. भारत-यूरोप के मजबूत रिश्तों का यह ऐतिहासिक प्रतीक होगा.

नई दिल्ली: 77वें गणतंत्र दिवस समारोह के मौके पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु सोमवार को कर्तव्य पथ पर पारंपरिक घोड़ा-खिंची बग्गी में सवार होकर पहुंचीं. इस ऐतिहासिक अवसर पर उनके साथ मुख्य अतिथि के रूप में यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा भी मौजूद रहे.
राष्ट्रपति की यह पारंपरिक बग्गी यात्रा गणतंत्र दिवस परेड की औपचारिक शुरुआत का प्रतीक बनी. राष्ट्रपति के बॉडी गाड की विशेष टुकड़ी की अगुवाई में यह समारोह भारत की सबसे पुरानी और गौरवशाली सैन्य परंपराओं में से एक को दर्शाता है.
राष्ट्रपति के बॉडी गाड की ऐतिहासिक परंपरा
पारंपरिक बग्गी को राष्ट्रपति के बॉडी गाड रेजिमेंट ने एस्कॉर्ट किया. यह रेजिमेंट भारतीय सेना की सबसे वरिष्ठ इकाई मानी जाती है और यही एकमात्र रेजिमेंट है जिसे दो स्टैंडर्ड धारण करने की अनुमति प्राप्त है. ये दोनों स्टैंडर्ड 16 नवंबर 2023 को राष्ट्रपति द्वारा प्रदान किए गए थे. बे और डार्क बे रंग के घोड़ों पर सवार राष्ट्रपति के अंगरक्षक रेजिमेंट का आदर्श वाक्य और युद्धघोष है ‘BHARAT MATA KI JAI’.
77th #RepublicDay🇮🇳 | President Droupadi Murmu, along with President of the European Council, António Luís Santos da Costa and President of the European Commission, Ursula Von Der Leyen, arrives at the saluting dais at Kartavya Path in Delhi to witness the parade
— ANI (@ANI) January 26, 2026
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बग्गी के साथ सवार वरिष्ठ अधिकारी
राष्ट्रपति की बग्गी के दाहिनी ओर राष्ट्रपति के अंगरक्षक के कमांडेंट कर्नल अमित बेरवाल अपने घोड़े ‘मेघदूत’ पर सवार थे, जबकि बाईं ओर सेकंड-इन-कमांड लेफ्टिनेंट कर्नल अंगद सिंह थिंद ‘सुल्तान’ नामक घोड़े पर नजर आए. बग्गी का नेतृत्व नायब रिसालदार जितेंद्र कर रहे थे, जो ‘लॉन्गस्ट्राइड’ पर सवार थे. राष्ट्रपति के अंगरक्षक एक एयरबोर्न कैवेलरी रेजिमेंट हैं, जिनका लंबा और गौरवशाली सैन्य इतिहास रहा है.
इस वर्ष के मुख्य अतिथि
इस वर्ष गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि यूरोपीय संघ के दो शीर्ष नेता हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा 25 से 27 जनवरी तक भारत के राजकीय दौरे पर हैं.
#WATCH | President Droupadi Murmu and the Chief Guests of #RepublicDay2026, President of the European Council, António Luís Santos da Costa and President of the European Commission, Ursula Von Der Leyen left from Rashtrapati Bhavan, for Kartavya Path.
— ANI (@ANI) January 26, 2026
(Video: DD) pic.twitter.com/V3E9SJSG1t
एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा का राजनीतिक सफर
यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा पुर्तगाल के एक प्रमुख राजनीतिक नेता माने जाते हैं. वह संवाद, राजनीतिक स्थिरता और सतत विकास के समर्थक रहे हैं. दिलचस्प बात यह है कि उनकी पारिवारिक जड़ें पुर्तगाल, भारत और मोजाम्बिक से जुड़ी हुई हैं, जिसने उनके राजनीतिक दृष्टिकोण को बहुसांस्कृतिक और वैश्विक सहयोग आधारित बनाया.
कोस्टा 2015 में पुर्तगाल के प्रधानमंत्री बने थे. इससे पहले वह संसदीय मामलों के मंत्री, न्याय मंत्री, यूरोपीय संसद के उपाध्यक्ष, आंतरिक मामलों के मंत्री और लिस्बन के मेयर जैसे अहम पदों पर रह चुके हैं. नौ वर्षों के कार्यकाल में उनके नेतृत्व में पुर्तगाल ने स्थिर आर्थिक वृद्धि, बेहतर सार्वजनिक वित्त, घटती बेरोजगारी और नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश देखा.
उर्सुला वॉन डेर लेयेन का नेतृत्व
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने वर्ष 2019 में इस पद की जिम्मेदारी संभाली थी और जुलाई 2024 में उन्हें दूसरे कार्यकाल के लिए दोबारा चुना गया. अपने दूसरे कार्यकाल में वह एक अधिक प्रतिस्पर्धी और आत्मनिर्भर यूरोप के निर्माण पर काम कर रही हैं, जो लोकतंत्र की रक्षा करे, अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करे और बदलती वैश्विक परिस्थितियों में रक्षा एवं सुरक्षा की जिम्मेदारी अधिक मजबूती से निभाए.


