ईरान में हिंसक प्रदर्शनों के बीच स्वदेश लौटे भारतीय, दिल्ली पहुंचीं दो वाणिज्यिक उड़ानें
ईरान में खामेनेई शासन के खिलाफ हिंसक प्रदर्शनों के बीच हालात बिगड़ने पर कई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से भारत लौटे. दो नियमित वाणिज्यिक उड़ानें दिल्ली पहुंचीं, जबकि भारत सरकार स्थिति पर कड़ी नजर बनाए हुए है.

नई दिल्ली: ईरान में सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के शासन के खिलाफ शुरू हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद वहां रह रहे भारतीय नागरिकों की चिंता बढ़ गई थी. इसी बीच भारत के लिए राहत की खबर यह रही कि भारतीयों को लेकर पहली दो वाणिज्यिक उड़ानें देर रात दिल्ली पहुंच गईं. ये दोनों उड़ानें नियमित थीं और किसी विशेष निकासी अभियान के तहत संचालित नहीं की गई थीं. हालांकि, हालात को देखते हुए कई भारतीयों ने स्वेच्छा से ईरान छोड़कर भारत लौटने का फैसला किया.
भारत सरकार ने ईरान में बिगड़ते हालात को भांपते हुए पहले ही अपने नागरिकों को गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह जारी कर दी थी. विदेश मंत्रालय लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार है. अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल कोई औपचारिक निकासी अभियान शुरू नहीं किया गया है, लेकिन जरूरत पड़ने पर सभी विकल्प खुले हैं.
हवाई यातायात पर पड़ा था असर
ईरान में बढ़ते तनाव के कारण 15 जनवरी को कुछ समय के लिए वहां का हवाई क्षेत्र बंद कर दिया गया था. इसके चलते भारत और ईरान के बीच आने-जाने वाली कई उड़ानें प्रभावित हुई थीं. बाद में हालात कुछ हद तक सामान्य होने पर हवाई यातायात दोबारा शुरू किया गया. जैसे ही उड़ानें बहाल हुईं, कई भारतीय नागरिकों ने असुरक्षा के माहौल को देखते हुए वापस लौटने का निर्णय लिया.
लौटे भारतीयों ने साझा किए अनुभव
भारत पहुंचने के बाद कई नागरिकों ने संकट के समय मदद के लिए सरकार और भारतीय दूतावास का आभार जताया. तेहरान स्थित भारतीय दूतावास लगातार भारतीय तीर्थयात्रियों, छात्रों, पर्यटकों और व्यापारियों के संपर्क में था और समय-समय पर आवश्यक सलाह जारी कर रहा था.
ईरान से लौटी एक एमबीबीएस छात्रा ने बताया कि उसने विरोध प्रदर्शनों के बारे में जरूर सुना था, लेकिन उसने खुद किसी बड़े आंदोलन को प्रत्यक्ष नहीं देखा. उसने यह भी कहा कि वहां इंटरनेट सेवाएं बंद थीं, जिससे जानकारी मिलना मुश्किल हो गया था.
वहीं एक अन्य भारतीय नागरिक, जो करीब एक महीने से ईरान में रह रहा था, ने बताया कि पिछले कुछ हफ्तों से हालात परेशान करने वाले थे. उसने कहा कि जब वे बाहर निकलते थे तो कई बार प्रदर्शनकारी उनकी गाड़ी के सामने आ जाते थे. इंटरनेट बंद होने की वजह से वह अपने परिवार से संपर्क नहीं कर पा रहा था, जिससे चिंता और बढ़ गई थी.
स्थिति में धीरे-धीरे सुधार
काम के सिलसिले में ईरान गए एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर ने बताया कि उनके अनुभव के दौरान सबसे बड़ी समस्या नेटवर्क से जुड़ी रही. उनके मुताबिक, अब तेहरान में हालात पहले से बेहतर हैं. एक अन्य नागरिक ने बताया कि आगजनी और हिंसक प्रदर्शन जरूर हुए थे, लेकिन प्रदर्शनकारियों की संख्या शासन समर्थकों की तुलना में कम थी.
हालिया तनाव की पृष्ठभूमि
दिसंबर के अंत में ईरान में हालात बेहद गंभीर हो गए थे. खामेनेई शासन के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए, जिनमें पिछले दो हफ्तों के दौरान कथित तौर पर करीब 3,000 लोगों की जान गई. इस दौरान अमेरिका और ईरान के बीच तीखी बयानबाजी भी देखने को मिली, जिससे सैन्य टकराव की आशंका बढ़ गई थी. हालांकि अब हालात में कुछ सुधार नजर आ रहा है, क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने आक्रामक रुख में नरमी दिखाई है.
भारत की कड़ी निगरानी जारी
भारत सरकार ईरान की स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है, क्योंकि वहां अभी भी 9,000 से अधिक भारतीय नागरिक मौजूद हैं. विदेश मंत्रालय और दूतावास स्थिति के अनुसार कदम उठा रहे हैं ताकि जरूरत पड़ने पर भारतीयों की सुरक्षा और सहायता सुनिश्चित की जा सके.


