अमरावती राजधानी को कानूनी दर्जा मिलेगा? CM चंद्रबाबू नायडू ने अमित शाह से की विधेयक लाने की अपील

मुख्यमंत्री ने नीतिगत निश्चितता की अहमियत पर जोर देते हुए कहा कि अगर अमरावती को विधानसभा में औपचारिक रूप से मान्यता मिल जाए, तो इसका विकास रफ्तार पकड़ेगा और तेजी से आगे बढ़ेगा.

Goldi Rai
Edited By: Goldi Rai

अमरावती: आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की और केंद्र से अनुरोध किया कि संसद में विधेयक पेश कर अमरावती को आंध्र प्रदेश की आधिकारिक राजधानी का दर्जा दिया जाए. उन्होंने इसे राज्य के दीर्घकालिक विकास और स्थिरता के लिए अहम बताया. मुख्यमंत्री ने कहा कि अमरावती को विधायी मान्यता मिलने से राज्य में विकास की गति तेज होगी, लोगों की आकांक्षाएं पूरी होंगी और निवेशकों का भरोसा भी मजबूत होगा. मीटिंग में दोनों नेताओं ने आंध्र प्रदेश से जुड़े प्रमुख विकास और कल्याण संबंधी पहलों की समीक्षा भी की.

 क्यों चाहिए औपचारिक मान्यता?

चंद्रबाबू नायडू ने नीति स्थिरता पर जोर देते हुए कहा कि अमरावती को औपचारिक विधायी मान्यता मिलने से विकास की गति तेज होगी और आंध्र प्रदेश के लोगों की आकांक्षाओं को पूरा किया जा सकेगा. यह निवेशकों का भरोसा भी बढ़ाएगा. उन्होंने राज्य में हाल ही में शुरू की गई VB-G-RAM-G योजना के वित्तीय प्रावधानों पर भी चर्चा की. मुख्यमंत्री ने बताया कि केंद्र-राज्य वित्तीय हिस्सेदारी के 60:40 अनुपात ने आंध्र प्रदेश पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव डाला है और योजना के कार्यान्वयन को प्रभावित कर सकता है.

वित्तीय सहयोग और लचीलापन की मांग

मुख्यमंत्री ने वर्तमान वित्तीय स्थिति को ध्यान में रखते हुए वैकल्पिक वित्तीय समर्थन और लचीलेपन की मांग की. उन्होंने कहा कि केंद्र का सहयोग आंध्र प्रदेश को वित्तीय संकट से उबारने में महत्वपूर्ण रहा है और उन्होंने सहयोग जारी रखने की अपील की. बैठक में राज्य में चल रहे विकास परियोजनाओं, कल्याण योजनाओं और हाल की घटनाओं पर भी विचार-विमर्श किया गया.

अमित शाह करेंगे NIDMS का उद्घाटन

इसी सप्ताह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह राष्ट्रीय IED डेटा प्रबंधन प्रणाली का उद्घाटन करेंगे. यह कदम भारत की आंतरिक सुरक्षा और काउंटर-IED संरचना को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है. एनएसजी द्वारा विकसित NIDMS एक सुरक्षित, राष्ट्रीय स्तर का डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जो आविष्कृत विस्फोटक उपकरणों से जुड़ा डेटा एकत्र, संकलित और साझा करने में सक्षम बनाएगा.

जांच और समन्वय में मददगार

अधिकारियों के मुताबिक, यह प्लेटफॉर्म पोस्ट-ब्लास्ट जांचों का समर्थन करने और विभिन्न सुरक्षा और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगा.

अधिकारियों ने कहा कि इस प्रणाली को IED-संबंधित जानकारी का साझा भंडार बनाने के लिए डिजाइन किया गया है, जिससे राज्य पुलिस, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल और अन्य केंद्रीय एजेंसियां वास्तविक समय में डेटा तक पहुंच, विश्लेषण और साझा कर सकें. इस एकीकृत, डेटा-आधारित दृष्टिकोण से जांचकर्ताओं को पैटर्न पहचानने, रुझान ट्रैक करने और पिछले घटनाक्रम से कार्यवाही योग्य निष्कर्ष निकालने में मदद मिलेगी, जिससे IED खतरों का सामना करने की तैयारी और प्रतिक्रिया क्षमता बेहतर होगी.

ताजा खबरें

ट्रेंडिंग वीडियो

close alt tag