बीजेपी ने शुरू की बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारी, धर्मेंद्र प्रधान को बनाया प्रभारी...सीआर पाटिल और केशव प्रसाद मौर्या को भी मिली जिम्मेदारी
Bihar Assembly Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान जल्द होने वाला है, जबकि राजनीतिक दलों ने तैयारियां तेज़ कर दी हैं. बीजेपी ने धर्मेंद्र प्रधान को प्रभारी और सीआर पाटिल व केशव प्रसाद मौर्य को सह-प्रभारी नियुक्त किया है. 243 सीटों पर एनडीए बनाम महागठबंधन की सीधी टक्कर होगी. दल जनसभाओं व सोशल मीडिया से प्रचार तेज कर रहे हैं.

Bihar Assembly Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर अभी आधिकारिक तारीखों का ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं. भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने भी चुनावी रणनीति को धार देने के लिए अपने प्रभारी और सह-प्रभारी के नाम तय कर दिए हैं. पार्टी ने केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ नेता धर्मेंद्र प्रधान को चुनाव प्रभारी बनाया है. वहीं सीआर पाटिल और केशव प्रसाद मौर्य को सह-प्रभारी नियुक्त किया गया है. यह नियुक्तियां इस बात का संकेत हैं कि बीजेपी राज्य में चुनावी अभियान को और सशक्त करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है.
चुनाव आयोग जल्द करेगा तारीखों का ऐलान
चुनाव आयोग के सूत्रों के मुताबिक, बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान 6 अक्टूबर के आसपास हो सकता है. बताया जा रहा है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार बिहार का दौरा करेंगे. उनके आने से पहले राज्य में ट्रांसफर-पोस्टिंग की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि चुनावी तैयारियों में किसी तरह की बाधा न आए.
विधानसभा की 243 सीटों पर सियासी जंग
बिहार विधानसभा में कुल 243 सीटें हैं और इस बार का चुनाव मुख्य रूप से एनडीए बनाम महागठबंधन के बीच माना जा रहा है. हर दल जनता से सीधे संपर्क साधने में जुट गया है. वहीं, बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज़ हो चुका है. राजनीतिक पंडितों के अनुसार, इस बार का मुकाबला और भी दिलचस्प रहने वाला है क्योंकि दोनों ही गठबंधन राज्य की सत्ता पर कब्ज़ा जमाने के लिए पूरी ताक़त लगा रहे हैं.
नीतीश कुमार की 2020 की जीत की याद
पिछले विधानसभा चुनाव यानी 2020 में नीतीश कुमार ने एनडीए गठबंधन के साथ मिलकर सत्ता हासिल की थी. उस समय बीजेपी और जेडीयू की साझेदारी ने निर्णायक भूमिका निभाई थी. लेकिन मौजूदा हालात में समीकरण बदल चुके हैं. इंडिया गठबंधन (महागठबंधन) और एनडीए के बीच सीधी टक्कर मानी जा रही है. यही कारण है कि दोनों पक्ष अपने-अपने मतदाताओं को साधने में जुटे हैं.
जनता तक पहुंचने की होड़
हालांकि चुनावी तारीखों का आधिकारिक ऐलान अभी होना बाकी है, लेकिन सभी राजनीतिक दलों ने जनसभाओं, पदयात्राओं और सोशल मीडिया के जरिए प्रचार अभियान शुरू कर दिया है. हर पार्टी जनता को यह विश्वास दिलाने की कोशिश कर रही है कि उनकी नीतियां और वादे राज्य के विकास के लिए बेहतर हैं.
दिलचस्प होगा एनडीए बनाम इंडिया गठबंधन का मुकाबला
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस बार का चुनाव केवल सीटों की जंग नहीं बल्कि गठबंधन की ताक़त और रणनीति की परीक्षा भी होगा. जहां बीजेपी और एनडीए अपने पिछले कामकाज और योजनाओं को जनता के सामने रख रहे हैं, वहीं महागठबंधन केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों को मुद्दा बना रहा है.


