दिल्ली की अदालत ने सोनिया गांधी को भेजा नोटिस, भारत की नागरिक बनने से पहले वोटर लिस्ट में गड़बड़ी का आरोप!
मंगलवार की सुबह दिल्ली की एक सत्र अदालत ने कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी को नोटिस भेजा है. यह नोटिस एक ऐसी याचिका पर जारी हुआ है जिसमें उनपर भारतीय नागरिक बनने से पहले ही मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने का आरोप लगाया गया है.

नई दिल्ली: दिल्ली की एक सत्र अदालत ने मंगलवार (9 दिसंबर) को कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी को नोटिस जारी किया है. यह नोटिस एक ऐसी याचिका पर जारी हुआ है जिसमें उनपर भारतीय नागरिक बनने से पहले ही मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने का आरोप लगाया गया है. आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला.
क्या है पूरा मामला ?
याचिकाकर्ता विकास त्रिपाठी ने दावा किया है कि सोनिया गांधी का नाम 1980 में नई दिल्ली लोकसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में शामिल हो गया था, जबकि उन्होंने भारतीय नागरिकता अप्रैल 1983 में हासिल की थी. उनके अनुसार, 1980 में नाम जुड़ा, 1982 में हटाया गया और 1983 में दोबारा जोड़ा गया. याचिकाकर्ता का कहना है कि नागरिकता मिलने से पहले मतदाता बनने के लिए जरूरी दस्तावेजों में जालसाजी हुई होगी. इसलिए इस मामले में धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े की एफआईआर दर्ज होनी चाहिए.
पहले क्या हुआ था ?
सितंबर 2024 में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट वैभव चौरसिया ने एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी थी. अदालत ने कहा था कि नागरिकता का मामला केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में है. मतदाता सूची में नाम जोड़ने-हटाने का अधिकार सिर्फ चुनाव आयोग को है. इस तरह की जांच संविधान के अनुच्छेद 329 का उल्लंघन करती है.इस फैसले को चुनौती देते हुए विकास त्रिपाठी ने सत्र अदालत में आपराधिक पुनरीक्षण याचिका दाखिल की.
अदालत ने मांगा जवाब
विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने याचिकाकर्ता के वकील पवन नारंग की प्रारंभिक दलीलें सुनीं. अदालत ने इसे गंभीर मानते हुए सोनिया गांधी और दिल्ली पुलिस दोनों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. मामले की अगली सुनवाई 6 जनवरी 2026 को होगी.
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि वे सिर्फ जांच की मांग कर रहे हैं, आरोपपत्र दाखिल करने की नहीं. उनका दावा है कि बिना नागरिकता के मतदाता बनना संभव नहीं, इसलिए दस्तावेजों में कुछ गड़बड़ जरूर हुई होगी. बता दें, यह मामला एक बार फिर पुराने आरोपों को सामने लाया है और आने वाले समय में राजनीतिक चर्चा का विषय बन सकता है.


