सुखना झील को और कितना सुखाओगे...बिल्डर माफिया और नौकरशाहों को सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार
सुप्रीम कोर्ट ने चंडीगढ़ की प्रतिष्ठित सुखना झील के सूख जाने पर चिंता जताते हए बिल्डर माफिया और नौकरशाहों की कड़ी आलोचना की है. CJI सूर्यकांत ने इस झील के सूखने पर गहरी चिंता जताते हुए पूछा कि सुखना झील को और कितना सुखाओगे ?

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने चंडीगढ़ की ऐतिहासिक सुखना झील की लगातार बिगड़ती हालत पर गंभीर चिंता व्यक्त की है. अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि झील का सूखना केवल प्राकृतिक कारणों का परिणाम नहीं है, बल्कि इसके पीछे मानवीय हस्तक्षेप और अवैध गतिविधियों की बड़ी भूमिका है.
बिल्डर माफिया और नौकरशाही पर भड़के CJI
पुराने जनहित मामले की सुनवाई के दौरान उठी चिंता
यह टिप्पणी 1995 से लंबित जनहित याचिका ‘इन रे: टी.एन. गोदावर्मन थिरुमुलपाद’ से जुड़े अंतरिम आवेदनों की सुनवाई के दौरान की गई. इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ कर रही थी.
हाई कोर्ट की अनदेखी पर कोर्ट का सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि जंगलों और झीलों से जुड़े मामलों को सीधे उच्चतम न्यायालय में क्यों लाया जा रहा है, जबकि इनसे जुड़े कई विषयों पर उच्च न्यायालय प्रभावी रूप से सुनवाई कर सकता है. बेंच ने इसे न्यायिक प्रक्रिया के संतुलन के लिहाज से चिंताजनक बताया.
‘दोस्ताना मुकदमे’ की आशंका
अदालत ने संकेत दिया कि कुछ मामलों में निजी डेवलपर्स और अन्य हितधारकों के इशारे पर तथाकथित “दोस्ताना मुकदमे” दायर किए जा रहे हैं, ताकि कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग किया जा सके. कोर्ट ने केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी और वन मामलों में न्यायमित्र वरिष्ठ अधिवक्ता परमेश्वर से ऐसे स्थानीय मुद्दों की पहचान करने को कहा, जिन्हें उच्च न्यायालयों में सुलझाया जा सकता है.
सुखना झील के जलग्रहण क्षेत्र पर विवाद
चंडीगढ़ स्थित सुखना झील का मामला मुख्य रूप से इसके जलग्रहण क्षेत्र को अतिक्रमण से बचाने से जुड़ा है. इस संदर्भ में उच्च न्यायालय ने पहले ही सख्त रुख अपनाते हुए वर्ष 2020 में संरक्षित क्षेत्र में बनी अवैध संरचनाओं को गिराने के आदेश दिए थे. सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि पर्यावरण संरक्षण से जुड़े ऐसे मामलों में किसी भी तरह की ढिलाई स्वीकार्य नहीं होगी.


