अंतरराष्ट्रीय कानून को पैरों तले कुचला जा रहा...दावोस में डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों पर इशारा करते हुए बोले इमैनुएल मैक्रों, सुनाई खरी खोटी

स्विटजरलैंड के दावोस में चल रहे WEF की बैठक में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने अपने भाषण के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय हलकों में सनसनी मचा दी है. उन्होंने बिना राष्ट्रपति ट्रंप का नाम लिए उनकी नीतियों की ओर इशारा करते हुए कहा कि दुनिया एक नियम-रहित विश्व की ओर बढ़ रही है, जहां अंतरराष्ट्रीय कानून को पैरों तले कुचला जा रहा है और सिर्फ ताकतवर का कानून चल रहा है.

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

नई दिल्ली : स्विट्जरलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के मंच से फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने ऐसा भाषण दिया, जिसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है. वैश्विक व्यवस्था में बढ़ती अस्थिरता पर चिंता जताते हुए मैक्रों ने संकेतों में उन शक्तियों की आलोचना की, जो नियमों और सहयोग की जगह दबाव और ताकत की राजनीति को बढ़ावा दे रही हैं.

अंतरराष्ट्रीय कानूनों की अनदेखी

आपको बता दें कि मैक्रों ने अपने संबोधन में कहा कि दुनिया धीरे-धीरे ऐसे दौर की ओर बढ़ रही है, जहां अंतरराष्ट्रीय कानून और स्थापित नियमों की अनदेखी की जा रही है. उन्होंने बिना किसी देश का नाम लिए यह स्पष्ट किया कि वैश्विक मंच पर अब “ताकतवर की बात” ज्यादा सुनी जा रही है, जबकि नियम और संस्थाएं हाशिए पर जा रही हैं.

लोकतंत्र बनाम तानाशाही का बढ़ता टकराव
फ्रांस के राष्ट्रपति ने मौजूदा वैश्विक हालात को बेहद चिंताजनक बताया. उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों पर दबाव बढ़ रहा है और कई जगह तानाशाही प्रवृत्तियां मजबूत हो रही हैं. उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि 2024 में दुनिया भर में संघर्षों और युद्धों की संख्या अभूतपूर्व स्तर तक पहुंच गई, जिससे यह स्पष्ट होता है कि टकराव अब सामान्य स्थिति बनता जा रहा है.

अंतरराष्ट्रीय कानून को कई बार नजरअंदाज किया जा रहा
मैक्रों ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून को कई बार नजरअंदाज किया जा रहा है और बहुपक्षीय संस्थाओं की भूमिका कमजोर की जा रही है. उनके अनुसार, कुछ बड़ी शक्तियां या तो इन संस्थाओं से दूरी बना रही हैं या उन्हें निष्क्रिय कर रही हैं, जिससे वैश्विक समस्याओं से निपटने की सामूहिक क्षमता प्रभावित हो रही है.

टैरिफ और दबाव की राजनीति पर अप्रत्यक्ष हमला
अमेरिका की व्यापार नीतियों की ओर इशारा करते हुए मैक्रों ने कहा कि टैरिफ का इस्तेमाल अब केवल व्यापार तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसे राजनीतिक और रणनीतिक दबाव बनाने के साधन के रूप में प्रयोग किया जा रहा है. उन्होंने इसे संप्रभुता के खिलाफ बताते हुए अस्वीकार्य करार दिया.

सहयोग और आत्मनिर्भरता को बताया समाधान
इन चुनौतियों का समाधान बताते हुए मैक्रों ने अधिक सहयोग, नए दृष्टिकोण और मजबूत आर्थिक संप्रभुता पर जोर दिया. उन्होंने विशेष रूप से यूरोप के लिए रणनीतिक आत्मनिर्भरता और साझा ताकत विकसित करने की जरूरत बताई, ताकि वैश्विक असंतुलन का सामना किया जा सके.

मैक्रों का सनग्लास लुक बना चर्चा का विषय
इस भाषण के दौरान मैक्रों का आसमानी रंग का सनग्लास भी चर्चा में रहा. आमतौर पर बिना चश्मे के नजर आने वाले राष्ट्रपति का यह अंदाज़ सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. हालांकि बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि यह किसी स्टाइल का हिस्सा नहीं, बल्कि आंखों में स्वास्थ्य समस्या के कारण था.

स्वास्थ्य कारणों से पहना चश्मा
मैक्रों ने खुद बताया कि उनकी आंख में हल्की परेशानी है, इसलिए उन्हें सनग्लास पहनना पड़ा. फ्रांसीसी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आंख की नस फटने के कारण सूजन आ गई थी, जिसके चलते उन्हें यह एहतियात बरतनी पड़ी.

“हम दादागीरी नहीं, सम्मान को चुनते हैं”
अपने भाषण के अंत में मैक्रों ने साफ कहा कि फ्रांस और यूरोप “बुलीज़” की राजनीति के बजाय सम्मान, संवाद और सहयोग में विश्वास करते हैं. उन्होंने 2026 तक वैश्विक संतुलन सुधारने, सुरक्षा और रक्षा में निवेश बढ़ाने तथा अधिक स्थिर और विकासशील दुनिया के लिए काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई.

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