अंबरनाथ नगरपालिका में तगड़ा खेल! BJP-कांग्रेस की जुगलबंदी से शिंदे गुट हुआ आउट
अंबरनाथ नगर परिषद में बीजेपी और कांग्रेस ने हाथ मिलाकर सत्ता हासिल कर ली है. इस गठबंधन से एकनाथ शिंदे की शिवसेना को बड़ा झटका लगा है और वह सत्ता से बाहर हो गई है.

महाराष्ट्र: महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया मोड़ आया है, जहां ठाणे जिले के अंबरनाथ नगर परिषद में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी-अजीत पवार गुट) के साथ हाथ मिलाकर सत्ता हासिल कर ली है. इस अप्रत्याशित गठबंधन से एकनाथ शिंदे की शिवसेना को बड़ा झटका लगा है और वह सत्ता से बाहर हो गई है.
स्थानीय स्तर पर यह गठबंधन राष्ट्रीय राजनीति के विरोधाभासों को उजागर करता है, जहां बीजेपी और कांग्रेस आमतौर पर एक-दूसरे के खिलाफ खड़ी रहती हैं. इस कदम से राज्य में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है.
अंबरनाथ नगर परिषद चुनाव परिणाम
पिछले महीने दिसंबर 2025 में हुए अंबरनाथ नगर परिषद चुनावों में कुल 59 सीटें थी. एकनाथ शिंदे की शिवसेना सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और उन्हें 23 सीटें मिली. बीजेपी को 16 सीटें, कांग्रेस को 12 सीटें और अजीत पवार की एनसीपी को 4 सीटें हासिल हुई. इसके अलावा, कुछ निर्दलीय पार्षद भी चुने गए.
हालांकि शिवसेना सबसे आगे थी, लेकिन नगर परिषद अध्यक्ष पद के चुनाव में उसकी उम्मीदवार मनीषा वालेकर को बीजेपी की तेजश्री करंजुले पाटिल ने हरा दिया. राज्य स्तर पर बीजेपी और शिवसेना सहयोगी होने के बावजूद स्थानीय चुनावों में दोनों ने अलग-अलग लड़ाई लड़ी थी.
बीजेपी-कांग्रेस गठबंधन की वजह
अध्यक्ष पद जीतने के बाद भी बीजेपी के पास अकेले बहुमत नही था. नगर परिषद के कामकाज के लिए बहुमत जरूरी होता है, जहां अध्यक्ष बैठकों के एजेंडे तय करता है, लेकिन प्रस्ताव पास करने के लिए सदस्यों की सहमति चाहिए. बहुमत जुटाने के लिए बीजेपी ने कांग्रेस और एनसीपी से बातचीत शुरू की. मंगलवार को इस चर्चा का नतीजा निकला और 'अंबरनाथ विकास अघाड़ी' का गठन हुआ.
बीजेपी के पार्षद अभिजीत करंजुले पाटिल को इस गठबंधन का नेता चुना गया. उन्होंने कहा कि शिवसेना के लंबे शासन में भ्रष्टाचार और डर का माहौल था, इसलिए विकास के लिए यह कदम उठाया गया.
बहुमत का गणित
इस गठबंधन में बीजेपी के 16 पार्षद, कांग्रेस के 12, एनसीपी के 4 और एक निर्दलीय शामिल हुए. इससे कुल संख्या 33 हो गई, जो 59 सदस्यीय परिषद में स्पष्ट बहुमत है. कांग्रेस के राज्य नेतृत्व ने कहा कि कोई औपचारिक प्रस्ताव नहीं आया, लेकिन स्थानीय स्तर पर यह फैसला लिया गया. इस तरह बीजेपी ने सत्ता पर कब्जा कर लिया और शिवसेना को बाहर कर दिया.
शिवसेना की तीखी प्रतिक्रिया
शिवसेना ने इस गठबंधन को 'अनैतिक' और 'अवसरवादी' बताया है. अंबरनाथ से शिवसेना विधायक बालाजी किनिकर ने कहा कि बीजेपी राष्ट्रीय स्तर पर 'कांग्रेस मुक्त भारत' का नारा देती है, लेकिन सत्ता के लालच में स्थानीय स्तर पर कांग्रेस से हाथ मिला लिया.


