प्रवेश विवाद के बाद बड़ा फैसला, वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज की MBBS मान्यता रद्द

जम्मू-कश्मीर के रियासी स्थित श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस एक बार फिर सुर्खियों में है. प्रवेश विवाद के बीच अब राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने संस्थान की एमबीबीएस मान्यता वापस ले ली है, जिससे शिक्षा व्यवस्था और राजनीति दोनों पर सवाल खड़े हो गए हैं.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

जम्मू-कश्मीर: जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में स्थित श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस एक बार फिर विवादों में घिर गया है. 46 मुस्लिम छात्रों के प्रवेश को लेकर उठे सियासी और सामाजिक बवाल के कुछ ही हफ्तों बाद अब कॉलेज को बड़ा झटका लगा है. राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए 50 सीटों वाले एमबीबीएस पाठ्यक्रम की अनुमति रद्द कर दी है.

एनएमसी का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब कॉलेज पहले से ही प्रवेश विवाद को लेकर चर्चा में था. आयोग ने साफ कहा है कि संस्थान न्यूनतम शैक्षणिक और बुनियादी मानकों पर खरा नहीं उतर पाया, जिससे मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता था.

NMC ने क्यों वापस ली MBBS की अनुमति?

एनएमसी की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि कॉलेज में

आयोग के अनुसार, पिछले कुछ हफ्तों से इन कमियों को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं. इन्हीं शिकायतों की सत्यता जांचने के लिए अचानक भौतिक निरीक्षण किया गया, जिसमें सभी आरोप सही पाए गए.

एनएमसी ने स्पष्ट शब्दों में कहा,"टीम द्वारा प्रस्तुत मूल्यांकन रिपोर्ट से यह साबित हुआ कि शिकायतें सही और पुष्ट थीं. पाई गई कमियां गंभीर और महत्वपूर्ण प्रकृति की थीं."

छात्रों की MBBS सीट होगी सुरक्षित

हालांकि, आयोग ने छात्रों को राहत देते हुए यह भी साफ किया कि पहले से दाखिला ले चुके छात्रों की MBBS सीट रद्द नहीं की जाएगी.एनएमसी के अनुसार, इन छात्रों को जम्मू-कश्मीर के अन्य मान्यता प्राप्त मेडिकल कॉलेजों में अतिरिक्त सीटों के रूप में समायोजित किया जाएगा, ताकि उनका भविष्य प्रभावित न हो.

आदेश में कहा गया है कि इस प्रक्रिया को लागू करने की जिम्मेदारी केंद्र शासित प्रदेश के स्वास्थ्य और काउंसलिंग अधिकारियों की होगी, जिन्हें इस निर्णय की औपचारिक सूचना दे दी गई है.

46 मुस्लिम छात्रों के प्रवेश से शुरू हुआ था विवाद

कुछ हफ्ते पहले वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज के पहले MBBS बैच में 50 में से 46 छात्रों के मुस्लिम होने को लेकर स्थानीय स्तर पर भारी विरोध देखने को मिला था.
कुछ हिंदू संगठनों और स्थानीय लोगों ने यह कहते हुए प्रदर्शन किया था कि कॉलेज का निर्माण और संचालन श्री माता वैष्णो देवी मंदिर में आने वाले हिंदू श्रद्धालुओं के दान से हुआ है, इसलिए यहां हिंदू छात्रों के लिए आरक्षण होना चाहिए.

इस मुद्दे ने जल्द ही सांप्रदायिक रंग ले लिया और मामला राज्यव्यापी बहस में बदल गया.

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का तीखा बयान

इस विवाद के बीच जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी सख्त प्रतिक्रिया दी थी. उन्होंने छात्रों को अन्य मेडिकल कॉलेजों में समायोजित करने और वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज को बंद करने तक की बात कही थी.

मुख्यमंत्री ने कहा "बच्चों ने अपनी मेहनत से परीक्षा पास की है. किसी ने उन पर एहसान नहीं किया. अगर आप उन्हें यहां नहीं रखना चाहते, तो उन्हें कहीं और समायोजित कर दीजिए."

उन्होंने आगे कहा,"हम नहीं चाहते कि बच्चे ऐसी जगह पढ़ें, जहां इतनी राजनीति हो. हमें ऐसे मेडिकल कॉलेज की जरूरत नहीं है."

आंदोलन और दबाव की राजनीति

पिछले सप्ताह श्री माता वैष्णो देवी संघर्ष समिति ने कॉलेज में केवल हिंदू उम्मीदवारों को प्रवेश देने की मांग को लेकर 'सनातन जागरण यात्रा' और हस्ताक्षर अभियान शुरू किया था.
एनएमसी के निरीक्षण के बाद समिति के संयोजक सुखवीर सिंह मनकोटिया ने कहा कि इस दौरे से लोगों में उम्मीद जगी है.

क्या प्रवेश विवाद बना मान्यता रद्द होने की वजह?

हालांकि एनएमसी ने अपने आदेश में प्रवेश विवाद का सीधा जिक्र नहीं किया है, लेकिन जिस समय कॉलेज पर यह कार्रवाई हुई, उसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. फिलहाल आयोग का कहना है कि फैसला सिर्फ शैक्षणिक मानकों की कमी के आधार पर लिया गया है.

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