'दलबदल का सवाल ही नहीं...', 29 पार्षदों के साथ होटल में, शिंदे पर फडणवीस का पलटवार, क्या है असली खेल?
BMC चुनाव में महायुति की धमाकेदार जीत के बाद शिवसेना पार्षदों की बैठक से दलबदल की अफवाहें उड़ने लगीं है. मगर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इन्हें साफ तौर पर नकार दिया. उन्होंने कहा- मुंबई का महापौर महायुति सर्वसम्मति से चुना जाएगा.

महाराष्ट्र: बृहन्मुंबई नगर निगम चुनाव में महायुति की एक बार फिर जीत के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. शिवसेना पार्षदों की 5-स्टार होटल में हुई बैठक के बाद दलबदल की अटकलें लगाई जाने लगीं, जिससे सियासी गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया.
इन अटकलों पर अब महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने खुलकर प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने दलबदल की सभी अफवाहों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि मुंबई में महायुति का महापौर सर्वसम्मति से चुना जाएगा और गठबंधन में किसी तरह की खटास नहीं है.
दलबदल की अफवाहों पर CM फडणवीस की दो टूक
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि दलबदल जैसी किसी भी आशंका का कोई आधार नहीं है. उनका कहना है कि BMC में महायुति पूरी मजबूती के साथ एकजुट है और महापौर का चयन आपसी सहमति से होगा.
शिंदे की होटल बैठक पर क्या बोले मुख्यमंत्री
शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे की ओर से होटल में पार्षदों के साथ की गई बैठक को लेकर पूछे गए सवाल पर CM फडणवीस ने कहा कि जैसे मैं पुणे में नवनिर्वाचित पार्षदों से मुलाकात कर रहा हूं, वैसे ही शिंदे भी नए पार्षदों से मिल रहे हैं. उन्होंने सभी को बैठक के लिए बुलाया होगा. दलबदल का कोई सवाल ही नहीं उठता है.
महापौर पद को लेकर क्यों बढ़ी अटकलें
गौरतलब है कि BMC की 227 सीटों में से महायुति गठबंधन ने 119 सीटों पर जीत हासिल की है. इनमें भाजपा ने 89 सीटें जीती हैं, जबकि शिवसेना को 29 सीटों पर सफलता मिली है. हालांकि, महापौर के चुनाव के लिए भाजपा को शिवसेना के समर्थन की आवश्यकता होगी. इसी वजह से यह कयास लगाए जा रहे हैं कि समर्थन के बदले शिंदे कोई बड़ी राजनीतिक मांग रख सकते हैं.
शिवसेना ने बताई बैठक की असली वजह
मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, शिवसेना के कुछ नेताओं ने दावा किया था कि शिंदे ढाई साल के लिए मेयर पद समेत BMC की कई शक्तिशाली समितियों में हिस्सेदारी की मांग कर सकते हैं. हालांकि, शिवसेना ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है.
पार्टी का कहना है कि यह बैठक किसी राजनीतिक सौदेबाजी के लिए नहीं, बल्कि नवनिर्वाचित पार्षदों के लिए आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला का हिस्सा थी. इसी उद्देश्य से सभी पार्षदों को एक साथ बुलाया गया था.


