अनुमान नहीं, प्रदूषण के असली कारण खोजने की जरूरत...दिल्ली-NCR में जहरीली हवा पर सुप्रीम कोर्ट की फटकार

सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली-NCR के वायु प्रदूषण संकट पर सुनवाई के दौरान चयनात्मक दोषारोपण पर चिंता जताई. अदालत ने कहा कि प्रदूषण से निपटने की नीतियां अनुमानों के बजाय वैज्ञानिक साक्ष्यों पर आधारित होनी चाहिए.

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

नई दिल्ली : दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण के मामले की सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने इस प्रवृत्ति पर चिंता जताई कि प्रदूषण के लिए अक्सर कुछ गिने-चुने कारणों या वर्गों को ही जिम्मेदार ठहरा दिया जाता है. अदालत ने कहा कि बिना समुचित जांच के इस तरह का दृष्टिकोण समस्या की वास्तविक प्रकृति को समझने में बाधा बनता है. 

वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित नीति की जरूरत

आपको बता दें कि न्यायालय ने स्पष्ट किया कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए बनाई जाने वाली नीतियां केवल अनुमान या सामान्य धारणाओं पर नहीं, बल्कि वैज्ञानिक अध्ययनों और प्रमाणिक आंकड़ों पर आधारित होनी चाहिए. सही कारणों की पहचान किए बिना किसी भी नीति के सफल होने की संभावना कम रहती है.

सार्वजनिक परिवहन पर रोक लगाने से...
अदालत ने बसों और ट्रकों को प्रदूषण का प्रमुख कारण बताने पर सवाल उठाते हुए कहा कि सार्वजनिक परिवहन पर रोक लगाने से आम लोगों की दैनिक आवाजाही गंभीर रूप से प्रभावित होगी. इसलिए समाधान ऐसा होना चाहिए जो पर्यावरण संरक्षण और जनसुविधा के बीच संतुलन बनाए.

किसानों को दोष देने की प्रवृत्ति पर सवाल
पराली जलाने को लेकर किसानों पर पूरा दोष डालने को अदालत ने एकतरफा सोच बताया. न्यायालय के अनुसार, अन्य प्रदूषण स्रोतों का निष्पक्ष मूल्यांकन किए बिना किसी एक वर्ग को जिम्मेदार ठहराना न तो न्यायसंगत है और न ही प्रभावी.

कोविड काल से मिले संकेत
कोविड-19 के समय का उल्लेख करते हुए अदालत ने कहा कि उस दौरान पराली जलाने के बावजूद दिल्ली का आसमान अपेक्षाकृत साफ रहा था. इससे यह संकेत मिलता है कि वायु प्रदूषण के कारण बहुआयामी हैं और उन्हें गहराई से समझने की आवश्यकता है.

निर्माण गतिविधियों और शहरीकरण की भूमिका
भारत के मुख्य न्यायाधीश ने एनसीआर में जारी निर्माण और आवासीय गतिविधियों पर चिंता व्यक्त की. उन्होंने कहा कि इनसे उठने वाली धूल और अव्यवस्थित निर्माण कार्य भी प्रदूषण को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं.

पारदर्शिता और समाधान पर जोर
अदालत ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे प्रदूषण के वास्तविक कारणों की पहचान कर उन्हें सार्वजनिक करें और यह स्पष्ट करें कि इन समस्याओं से निपटने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाएंगे. न्यायालय का मानना है कि समग्र और पारदर्शी दृष्टिकोण ही इस संकट का स्थायी समाधान निकाल सकता है.

ताजा खबरें

ट्रेंडिंग वीडियो

close alt tag