पायलटों को भी आराम की जरूरत...Indigo संकट पर आया CM ममता बनर्जी का बयान, केंद्र को ठहराया जिम्मेदार
इंडिगो एयरलाइन वर्तमान में गंभीर परिचालन संकट से जूझ रही है, जिससे सोमवार को 500 उड़ानें रद्द हुईं. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि पायलटों को आराम की आवश्यकता है और यह संकट योजना की कमी का नतीजा है.

पश्चिम बंगाल : भारत की प्रमुख एयरलाइन इंडिगो इस समय गंभीर परिचालन संकट का सामना कर रही है. सोमवार को एयरलाइन ने देशभर में 500 उड़ानें रद्द कर दी, जिससे यात्रियों को व्यापक परेशानियों का सामना करना पड़ा. केंद्रीय नागर विमानन मंत्री राममोहन नायडू ने इस मामले में जांच की पुष्टि की और एयरलाइन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी. संकट के सातवें दिन भी विमान सेवाएं प्रभावित रहीं, जिससे यात्रा करने वाले लोग असुविधा और विलंब का शिकार हुए.
ममता बनर्जी का केंद्र सरकार पर आरोप
दो घंटे की फ्लाइट अब 24 से 36 घंटे की ट्रेन यात्रा में बदल गई
ममता बनर्जी ने यात्रियों की कठिनाइयों का उल्लेख करते हुए कहा कि दो घंटे की फ्लाइट अब 24 से 36 घंटे की ट्रेन यात्रा में बदल गई है.यात्रियों को पहले से रिज़र्वेशन करना पड़ता है, जिससे उन्हें अतिरिक्त असुविधा का सामना करना पड़ता है. उन्होंने इस स्थिति को यात्रियों का उत्पीड़न बताते हुए कहा कि केंद्र सरकार केवल चुनावी सोच में लगी है, जबकि राज्य सरकार जनता की भलाई के लिए चिंतित है.
पायलटों के समर्थन में मुख्यमंत्री का बयान
ममता बनर्जी ने इस संकट में पायलटों के कामकाज और कठिनाइयों का भी समर्थन किया. उन्होंने कहा कि कई पायलट ऑपरेशन चलाने के लिए अतिरिक्त समय तक काम कर रहे हैं, लेकिन यह किसी भी समस्या का समाधान नहीं है. पायलटों को आराम की आवश्यकता होती है और इस प्रकार की स्थिति से बचने के लिए वैकल्पिक योजना बनाना आवश्यक था. उनका यह भी मानना है कि केंद्र को पहले से ही यात्रियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करनी चाहिए थीं ताकि किसी भी प्रकार का परिचालन संकट न पैदा हो.
देशभर में विमान सेवाओं पर प्रभाव
इंडिगो संकट के चलते पूरे देश में विमान सेवाओं पर असर पड़ा है. उड़ानों की रद्दीकरण और विलंब ने एयरलाइन यात्रा को असुविधाजनक बना दिया है. यात्रियों ने लंबी कतारों और अप्रत्याशित बदलावों का सामना किया, जिससे यात्रा योजना बिगड़ गई. यह संकट एयरलाइन परिचालन की चुनौतियों और केंद्र सरकार की तैयारी की कमी दोनों को उजागर करता है, जिससे यात्रियों और पायलटों दोनों पर दबाव बढ़ गया है.


