पंजाब में बाढ़ के कहर के बीच मान सरकार बनी गर्वभती महिलाओं की ढाल, हर मां और बच्चा सुरक्षित

पंजाब दशकों बाद आई भयंकर बाढ़ से जूझ रहा है. सैकड़ों गांव डूबे, हजारों बेघर हैं. मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में AAP सरकार ने तेजी से राहत कार्य शुरू किए. नाभा, पठानकोट, गुरदासपुर, फिरोज़पुर, फाज़िल्का में विशेष राहत और मेडिकल सुविधाएं दीं. गर्भवती महिलाओं, बच्चों और स्वच्छता पर खास ध्यान देकर सरकार ने जनसेवा को प्राथमिकता दी.

Goldi Rai
Edited By: Goldi Rai

Punjab News: पंजाब इस समय दशकों बाद आई भीषण बाढ़ की मार झेल रहा है. सैकड़ों गांव जलमग्न हो चुके हैं हजारों परिवार बेघर हैं और हालात बेहद चुनौतीपूर्ण हैं. ऐसे में मुख्यमंत्री भगवंत मान की अगुवाई में आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ने ना सिर्फ राहत कार्यों को तेजी से अंजाम दिया है बल्कि महिलाओं की बुनियादी जरूरतों और गर्भवती माताओं की विशेष देखभाल कर यह साबित कर दिया कि संकट के समय में जनसेवा ही सबसे बड़ी राजनीति है. नाभा, पठानकोट, गुरदासपुर, फिरोज़पुर, फाजिल्का जैसे बाढ़ प्रभावित जिलों में सरकार ने विशेष राहत योजनाएं और मेडिकल व्यवस्थाएं लागू की हैं. गर्भवती महिलाओं, बच्चों और महिलाओं की व्यक्तिगत स्वच्छता आवश्यकताओं को प्राथमिकता देते हुए, सरकार ने स्वास्थ्य, सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करने के लिए कई मोर्चों पर काम किया है.

बाढ़ के बीच महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा बनी प्राथमिकता

बाढ़ग्रस्त इलाकों में आप पार्टी की महिला और युवा विंग ने जमीनी स्तर पर राहत कार्यों को अंजाम दिया. कार्यकर्ताओं ने गांव-गांव जाकर राशन, ज़रूरी दवाइयां, सैनिटरी पैड और मच्छरदानियां वितरित कीं. फिरोजपुर और फाजिल्का में बनाए गए राहत शिविरों में महिलाओं के लिए अलग व्यवस्था की गई जहां उन्हें सुरक्षित और गरिमामयी वातावरण में रखा गया.

 आशा कार्यकर्ताओं की भूमिका

राज्यभर में तैनात 11,103 से अधिक आशा कार्यकर्ताओं ने इस आपदा में अहम भूमिका निभाई. घर-घर जाकर दवाइयां बांटी गईं, जलजनित और वेक्टर जनित बीमारियों पर जागरूकता फैलाई गई और गर्भवती महिलाओं की ट्रैकिंग तथा देखभाल को प्राथमिकता दी गई. टीकाकरण अभियान भी बिना रुके चलता रहा.

सरकार ने राहत प्रयासों के तहत 458 रैपिड रिस्पांस टीमें, 360 मोबाइल मेडिकल यूनिट, और 424 एम्बुलेंस तैनात कीं. खास बात ये रही कि जिन इलाकों में सड़क संपर्क टूट गया था, वहां बोट एम्बुलेंस के जरिए गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया. गुरदासपुर में आठ गर्भवती महिलाओं को बचाया गया, जिनमें से एक महिला ने बोट पर ही सुरक्षित डिलीवरी की.

स्वास्थ्य विभाग का जमीनी एक्शन

स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित इलाकों में कई विशेष चिकित्सा शिविर लगाए जहां महिलाओं के लिए प्रसव पूर्व जांच, आवश्यक दवाइयां और परामर्श सेवाएं प्रदान की गईं. सिविल सर्जनों के अनुसार, स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह के निर्देश पर सभी गर्भवती महिलाओं की सुरक्षित डिलीवरी सुनिश्चित करने के लिए 24x7 सक्रियता बरती गई है. हमने टेंडी वाला की मंजीत कौर और कालू वाला की मनप्रीत कौर को सफलतापूर्वक बचाकर सिविल अस्पताल पहुंचाया.

 हर घर तक राहत

गुरदासपुर में गंभीर रूप से बीमार मरीजों और गर्भवती महिलाओं को निकालने के लिए विशेष हेलीकॉप्टर सेवा शुरू की गई. राज्य सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि कोई भी रसोईघर बिना भोजन और कोई भी महिला बिना स्वच्छता उत्पादों के नहीं रहेगी.
कोई भी रसोईघर बिना भोजन के नहीं रहेगा, किसी भी महिला को व्यक्तिगत स्वच्छता उत्पादों की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा.

सरकारी और निजी अस्पतालों में सुरक्षित डिलीवरी

सतलुज नदी के पास चिन्हित की गईं 45 गर्भवती महिलाओं में से पिछले सप्ताह चार सफल डिलीवरी करवाई गईं. तीन सरकारी अस्पतालों में और एक निजी पैनल में. 108 एम्बुलेंस सेवा को निशुल्क रखा गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित सहायता पहुंचाई जा सके.

 सेवा, संकल्प और संवेदनशीलता का उदाहरण बनी मान सरकार

आप सरकार की यह पहल एक स्पष्ट संदेश देती है कि आपदा के समय सरकार का असली चेहरा उसकी संवेदनशीलता में नजर आता है. जहां केंद्रित प्रयासों से बाढ़ प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाई जा रही है, वहीं महिलाओं और बच्चों की गरिमा और स्वास्थ्य की रक्षा करके सरकार ने एक आदर्श मानवीय दृष्टिकोण पेश किया है.

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