एक-दो नहीं, 2026 में 19 युद्धपोत शामिल करेगी भारतीय नौसेना; चीन की बढ़ती ताकत को बड़ा जवाब
2026 में भारतीय नौसेना अपने इतिहास की सबसे बड़ी वार्षिक वृद्धि के लिए तैयार है. इस साल नौसेना 19 नए युद्धपोतों को बेड़े में शामिल करेगी, जो पिछले वर्षों की तुलना में अभूतपूर्व विस्तार है. यह कदम चीन की बढ़ती नौसैनिक ताकत के जवाब और भारत की समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है.

नई दिल्ली: भारतीय नौसेना वर्ष 2026 में अपने इतिहास की सबसे बड़ी वार्षिक विस्तार योजना को साकार करने जा रही है. इस साल नौसेना कुल 19 युद्धपोतों को कमीशन करेगी, जो अब तक एक ही वर्ष में शामिल किए गए युद्धपोतों की सबसे बड़ी संख्या होगी. यह उपलब्धि न केवल सैन्य शक्ति में इजाफे का संकेत है, बल्कि भारत के स्वदेशी रक्षा उत्पादन की मजबूती को भी दर्शाती है.
इससे पहले वर्ष 2025 में भारतीय नौसेना ने 14 जहाजों को बेड़े में शामिल किया था, जिनमें एक पनडुब्बी भी शामिल थी. रक्षा सूत्रों के मुताबिक, मौजूदा उत्पादन गति अभूतपूर्व है और यह दिखाती है कि भारत का स्वदेशी जहाज निर्माण पारिस्थितिकी तंत्र अब परिपक्वता के उस स्तर पर पहुंच चुका है, जहां बड़े पैमाने पर युद्धपोतों का निर्माण संभव हो सका है.
2026 बनेगा नौसेना विस्तार का शिखर वर्ष
सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि 2026 भारतीय नौसेना के विस्तार का चरम वर्ष साबित होगा. इस दौरान नीलगिरी श्रेणी के मल्टी-रोल स्टेल्थ फ्रिगेट्स की संख्या में भी अहम बढ़ोतरी देखने को मिलेगी.
इस श्रेणी का पहला पोत जनवरी 2025 में सेवा में शामिल हुआ था. इसके बाद अगस्त 2025 में आईएनएस हिमगिरि और आईएनएस उदयगिरि को कमीशन किया गया. चालू वर्ष में इस श्रेणी के कम से कम दो और युद्धपोत नौसेना के बेड़े में शामिल होने की संभावना है.
इन खास पोतों की भी होगी एंट्री
2026 में जिन जहाजों को कमीशन किया जाएगा, उनमें
- इक्षाक श्रेणी का सर्वे पोत,
- निस्तार श्रेणी का डाइविंग सपोर्ट पोत भी शामिल हैं.
इतनी बड़ी संख्या में युद्धपोतों को समय पर तैयार कर पाना आधुनिक निर्माण तकनीकों की वजह से संभव हो सका है.
इंटीग्रेटेड कंस्ट्रक्शन से बदली तस्वीर
रक्षा मंत्रालय द्वारा लगभग 10–12 वर्ष पहले अपनाई गई ‘इंटीग्रेटेड कंस्ट्रक्शन’ पद्धति के अब ठोस परिणाम सामने आ रहे हैं. इस तकनीक के तहत जहाज के ढांचे, सुपर-स्ट्रक्चर और आंतरिक प्रणालियों को 250 टन के बड़े ब्लॉक्स में तैयार किया जाता है, जिन्हें बाद में जोड़ दिया जाता है.
इन ब्लॉक्स को इतनी सटीकता से डिजाइन किया जाता है कि वेल्डिंग के बाद केबल और पाइपिंग बिना किसी अतिरिक्त बदलाव के फिट हो सके. इससे निर्माण की गति और गुणवत्ता दोनों में सुधार हुआ है.
AI और आधुनिक सॉफ्टवेयर ने घटाया निर्माण समय
जहाज निर्माण में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की भी अहम भूमिका है. AI की मदद से
- सामग्री की सोर्सिंग,
- निर्माण का क्रम (सीक्वेंस),
- और उत्पादन की समय-सीमा पहले से तय की जाती है.
नए डिजाइन सॉफ्टवेयर मशीनरी लेआउट, उपकरणों और फ्लुइड डायनेमिक्स तक का पूर्वानुमान लगा लेते हैं. इसका नतीजा यह हुआ है कि जहां पहले एक युद्धपोत बनाने में 8–9 साल लगते थे, वहीं अब भारतीय शिपयार्ड्स करीब 6 साल में जहाज तैयार कर रहे हैं.
रणनीतिक लक्ष्य: चीन की चुनौती का जवाब
रणनीतिक स्तर पर भारत का यह नौसैनिक विस्तार कई अहम उद्देश्यों से जुड़ा है. इनमें
- चीनी नौसैनिक विस्तार का मुकाबला करना,
- महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर नैविगेशन की स्वतंत्रता बनाए रखना,
- क्वॉड और ASEAN साझेदारों को समर्थन देना,
- और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शक्ति-प्रक्षेपण को मजबूत करना शामिल है.
चीन से अभी भी कम, लेकिन फोकस गुणवत्ता पर
हालांकि, संख्या के लिहाज से भारतीय नौसेना अभी भी चीन से पीछे है. चीन अपने नए युद्धपोतों के आंकड़े सार्वजनिक नहीं करता, लेकिन अमेरिका के पूर्व आकलन के अनुसार, 2025 के अंत तक चीन के पास 395 युद्धपोत और पनडुब्बियां हो सकती हैं, जो पहले के अनुमान से लगभग 25 अधिक हैं.
मई 2025 की अमेरिकी रिपोर्ट "China Naval Modernization: Implications for US Navy Capabilities" में कहा गया है कि
- 2025 तक चीन की नौसैनिक ताकत 395 जहाजों,
- और 2030 तक 435 जहाजों तक पहुंच सकती है.
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि रिकॉर्ड कमीशनिंग और अत्याधुनिक तकनीक के साथ भारतीय नौसेना संख्या से ज्यादा गुणवत्ता और क्षमता पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन में भारत की भूमिका और मजबूत होगी.


