बांग्लादेश में हिंदुओं को निशाना बनाया जाना बेहद चिंता का विषय, विदेश मंत्रालय ने युनूस सरकार को दी सख्त हिदायत

भारत ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर बढ़ती सांप्रदायिक हिंसा पर गहरी चिंता जताई है. भारत ने हमलों को गंभीरता से लेने, दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने और अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है.

Yaspal Singh
Edited By: Yaspal Singh

नई दिल्लीः भारत ने बांग्लादेश में लगातार हो रही सांप्रदायिक हिंसा को लेकर कड़ा रुख अपनाया है. शुक्रवार को विदेश मंत्रालय ने पड़ोसी देश से अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रहे हमलों पर सख्ती से कार्रवाई करने की अपील की. भारत का कहना है कि बांग्लादेश में चरमपंथी तत्वों द्वारा अल्पसंख्यक समुदायों, उनके घरों और व्यवसायों को निशाना बनाए जाने की घटनाएं चिंता का विषय बन चुकी हैं.

भारत की कड़ी प्रतिक्रिया

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि भारत लंबे समय से बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा के बढ़ते मामलों को नोटिस कर रहा है. उन्होंने कहा कि इन घटनाओं का एक चिंताजनक पैटर्न सामने आ रहा है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. जायसवाल के मुताबिक, ऐसी हिंसा को अक्सर व्यक्तिगत दुश्मनी, राजनीतिक विवाद या बाहरी कारणों से जोड़कर टाल दिया जाता है, जो अपराधियों को और प्रोत्साहित करता है.

हिंसा को नजरअंदाज करना बढ़ा रहा डर

भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि जब इन घटनाओं को गंभीरता से नहीं लिया जाता, तो इससे अल्पसंख्यक समुदायों के बीच भय और असुरक्षा की भावना गहराती है. जायसवाल ने कहा कि भारत इस मुद्दे को पहले भी कई बार उठा चुका है और अब हालात और गंभीर हो गए हैं.

आंकड़े जो चिंता बढ़ाते हैं

बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद के आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2025 में ही सांप्रदायिक हिंसा के 51 मामले दर्ज किए गए, जिनमें 10 लोगों की मौत हुई. इससे पहले भारत ने बताया था कि अंतरिम सरकार के कार्यकाल के दौरान अल्पसंख्यकों के खिलाफ 2,900 से ज्यादा घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें हत्याएं, आगजनी और जमीन हड़पने जैसे मामले शामिल हैं.

ढाका में हिंसा 

12 दिसंबर 2025 को ढाका में छात्र आंदोलन से जुड़े प्रमुख नेता उस्मान हादी की हत्या ने हालात और बिगाड़ दिए. नकाबपोश हमलावरों ने उन्हें गोली मार दी, जिसके बाद राजधानी में हिंसक भीड़ सड़कों पर उतर आई. इस दौरान प्रमुख अखबारों और सांस्कृतिक संगठनों के कार्यालयों में आगजनी की गई, जिससे पूरे देश में तनाव फैल गया.

अल्पसंख्यकों पर बर्बर हमले

बांग्लादेश के विभिन्न हिस्सों से सामने आए मामलों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को झकझोर दिया है. झेनाइदाह जिले में एक हिंदू महिला के साथ सामूहिक बलात्कार और अत्याचार का मामला सामने आया. शरियतपुर जिले में खोकन चंद्र दास की भीड़ द्वारा हमला किए जाने के बाद मौत हो गई. इसी तरह, दिसंबर में अमृत मंडल और दीपू चंद्र दास की कथित तौर पर भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या कर दी गई.

भारत की चिंता 

भारत ने साफ कहा है कि वह बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के तहत अल्पसंख्यकों के खिलाफ जारी हिंसा को लेकर बेहद चिंतित है और पड़ोस में हो रहे हर घटनाक्रम पर करीबी नजर रखे हुए है.

बांग्लादेश का जवाब

वहीं, बांग्लादेश सरकार ने दावा किया है कि वह अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है. हालांकि, भारत का मानना है कि केवल बयान नहीं, बल्कि ठोस और प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है, ताकि सांप्रदायिक हिंसा पर वास्तव में लगाम लग सके.

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