मकर संक्रांति पर प्रयागराज संगम में आस्था की डुबकी, सुबह-सुबह उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

मकर संक्रांति स्नान पर्व पर प्रयागराज संगम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी. अनुकूल मौसम में करीब दो लाख लोगों ने पवित्र डुबकी लगाई. प्रशासन ने कड़ी सुरक्षा के बीच शांतिपूर्ण आयोजन सुनिश्चित किया.

Shraddha Mishra

प्रयागराज: मकर संक्रांति स्नान पर्व को आज मानते हुए प्रयागराज के पवित्र संगम पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा. भोर होते ही संगम और अन्य प्रमुख स्नान घाटों पर देश के कोने-कोने से आए लोग पहुंचने लगे. मौसम पूरी तरह साफ रहा और कोहरे की कोई बाधा नहीं थी, जिससे श्रद्धालुओं को स्नान करने में पूरी सुविधा मिली. अनुकूल मौसम का लाभ उठाते हुए श्रद्धालुओं ने पूरे श्रद्धा भाव से संगम में डुबकी लगाई.

अनुमान के अनुसार सुबह करीब सात बजे तक लगभग दो लाख श्रद्धालु पवित्र स्नान कर चुके थे, हालांकि प्रशासन की ओर से आधिकारिक आंकड़े आना अभी बाकी हैं. घाटों पर लगातार बढ़ती भीड़ को देखते हुए पुलिस और प्रशासन की टीमें पूरी सतर्कता के साथ तैनात रहीं और व्यवस्था को सुचारु बनाए रखा.

सूर्योदय के साथ बढ़ा श्रद्धालुओं का उत्साह

जैसे ही भोर का अंधेरा छटा और सूर्यदेव ने अपनी लालिमा के साथ दर्शन दिए, स्नान कर रहे श्रद्धालुओं का उत्साह और भी बढ़ गया. लोगों ने सूर्य को जल अर्पित किया और “ॐ सूर्याय नमः” का जाप करते हुए पवित्र स्नान किया. इस आध्यात्मिक वातावरण ने पूरे संगम क्षेत्र को भक्तिमय बना दिया.

प्रशासन और पुलिस की कड़ी निगरानी

संगम नोज और आसपास के इलाकों में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी सुबह से ही डटे रहे. भीड़ पर नजर रखने के साथ-साथ समय-समय पर घाट खाली कराने और सुरक्षा बनाए रखने के निर्देश दिए जाते रहे. सुबह उजाला होने तक स्नान पूरी तरह शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न होता रहा.

सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

मेला प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कोई कोताही नहीं बरती है. पूरे मेला क्षेत्र में ड्रोन, सीसीटीवी कैमरे, डॉग स्क्वाड, बम निरोधक दस्ता और जल पुलिस की तैनाती की गई है. श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए हर स्तर पर पुख्ता इंतजाम किए गए हैं.

परंपरा निभाने पहुंचे श्रद्धालु

हालांकि मकर संक्रांति का मुख्य स्नान मुहूर्त 15 जनवरी को है, लेकिन परंपरा के अनुसार बड़ी संख्या में श्रद्धालु 14 जनवरी को भी स्नान के लिए पहुंचे. मंगलवार से ही श्रद्धालुओं का आना शुरू हो गया था, जिसके चलते मेला क्षेत्र के सभी आश्रय स्थल पूरी तरह भर गए हैं. कल्पवास कर रहे संतों और गृहस्थों के शिविरों में भी काफी भीड़ देखी जा रही है.

मकर संक्रांति के बाद 18 जनवरी को मौनी अमावस्या का प्रमुख स्नान पर्व है. दोनों बड़े स्नान पर्वों को देखते हुए प्रशासन ने सभी तैयारियां पहले ही पूरी कर ली हैं.

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