Gyanvapi Case: ज्ञानवापी में एक फिर होगा ASI सर्वे? हाईकोर्ट ने मस्जिद पक्ष की याचिकाएं की खारिज

Gyanvapi Case: उच्च न्यायालय ने हाल ही में आदेश को चुनौती देने वाली मस्जिद पक्ष की याचिकाओं को खारिज कर दिया था. स्वयंभू ज्योतिर्लिंग भगवान विश्वेश्वर का मामला कोर्ट में विचाराधीन है.

Shabnaz Khanam
Edited By: Shabnaz Khanam

Gyanvapi Case: 1991 के स्वयंभू ज्योतिर्लिंग भगवान विश्वेश्वर मामले में कोर्ट ने सर्वे का आदेश दिया है. साथ ही हाई कोर्ट ने 2018 के आदेश को चुनौती देने वाली मस्जिद पक्ष की याचिकाओं को भी खारिज कर दिया है. ज्ञानवापी परिसर में एक बार फिर एएसआई सर्वे हो सकता है. पहले हुए सर्वे में 50 से ज्यादा मूर्तियां और शिवलिंग मिले थे. स्वयंभू ज्योतिर्लिंग भगवान विश्वेश्वर का मामला कोर्ट में विचाराधीन है. 

विवादित ढांचे के नीचे ज्योतिर्लिंग और उसका अरघा मौजूद है. पं. की मृत्यु के बाद. 7 मार्च 2000 को सोमनाथ व्यास की अदालत ने मामले में उनकी जगह पैरवी करने के लिए 11 अक्टूबर 2018 को पूर्व जिला शासकीय अधिवक्ता (सिविल) विजय शंकर रस्तोगी को वादमित्र नियुक्त किया था. 

एएसआई सर्वेक्षण की मांग 

उन्होंने कोर्ट से अपील की थी कि अयोध्या की तरह ज्ञानवापी परिसर और विवादित स्थल का भौतिक और पुरातात्विक दृष्टिकोण से एएसआई सर्वेक्षण कराया जाए. सिविल जज (सीनियर डिवीजन) फास्ट ट्रैक कोर्ट आशुतोष तिवारी ने आठ अप्रैल 2021 को पुरातात्विक सर्वेक्षण कराने का आदेश दिया था.

इस आदेश के खिलाफ सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड और अंजुमन इंतजामिया मस्जिद की ओर से इलाहाबाद हाई कोर्ट में अपील की गई थी. पूजा स्थल अधिनियम 1991 का हवाला देते हुए मस्जिद पर किसी भी दावे और मामले की स्थिरता पर सवाल उठाए गए थे. 

पिछले साल दिसंबर में हाईकोर्ट ने उनकी अपील खारिज करते हुए श्रृंगार गौरी मामले में दाखिल एएसआई सर्वे रिपोर्ट की कॉपी कोर्ट और केस के वादी रस्तोगी को सौंपने का आदेश दिया था. हाईकोर्ट ने आदेश में कहा था कि सर्वे रिपोर्ट पढ़ने के बाद अगर वादमित्र को लगता है कि ज्ञानवापी में और सर्वे कराया जाना चाहिए तो निचली अदालत इसका आदेश दे सकती है.

ज्ञानवापी की ASI सर्वे रिपोर्ट हुई सार्वजनिक 

ज्ञानवापी की ASI सर्वे रिपोर्ट सार्वजनिक कर दी गई है. ज्ञानवापी परिसर की दीवारों और अवशेषों पर हिंदू धर्म से संबंधित कई शब्द और चित्र यहां अतीत में एक मंदिर के अस्तित्व का प्रमाण देते हैं. संगमरमर और बलुआ पत्थर से बने अनेक शिवलिंग और नंदी इस बात का संकेत देते हैं कि यहां पहले भी विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती रही होगी.  

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