Video : राष्ट्रपति मुर्मू ने अभिभाषण में G RAM G का किया जिक्र...BJP ने थपथपाई मेज, लेकिन विपक्ष ने किया हंगामा
बजट सत्र की शुरुआत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण से हुई, जिसमें उन्होंने नए G RAM G कानून का उल्लेख किया. इस कानून पर सत्ता पक्ष ने समर्थन जताया, जबकि विपक्ष ने हंगामा करते हुए इसे वापस लेने की मांग की. G RAM G कानून मनरेगा की जगह लाया गया है और इसमें ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 125 दिन के रोजगार की गारंटी दी गई है. विपक्ष को महात्मा गांधी का नाम हटाने और राज्यों पर बढ़ते बोझ को लेकर आपत्ति है.

नई दिल्ली : संसद का बजट सत्र बुधवार को औपचारिक रूप से शुरू हुआ. साल के पहले सत्र की परंपरा के अनुसार राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित किया. अपने अभिभाषण में उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों, योजनाओं और उपलब्धियों का उल्लेख किया. राष्ट्रपति के संबोधन के दौरान जैसे ही ग्रामीण रोजगार से जुड़े नए G RAM G कानून का जिक्र हुआ, संसद का माहौल अचानक गरमा गया.
सत्ता पक्ष की सराहना, विपक्ष का विरोध
#WATCH | Budget session | President Droupadi Murmu says, "For employment and development in rural areas, Viksit Bharat-G RAM G law has been formed. With this new reform, there will be 125 days of employment guarantees in villages..."
As the NDA-BJP MPs thump their tables in… pic.twitter.com/hFzUYYoept— ANI (@ANI) January 28, 2026
राष्ट्रपति ने क्या कहा G RAM G कानून पर
अपने अभिभाषण में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और समग्र विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विकसित भारत–G RAM G कानून लाया गया है. उन्होंने बताया कि इस नए कानून के तहत गांवों में रहने वाले लोगों को साल में 125 दिनों के रोजगार की गारंटी मिलेगी. राष्ट्रपति के अनुसार, यह सुधार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा और पलायन की समस्या को कम करने में सहायक होगा.
क्या है विकसित भारत–G RAM G कानून
G RAM G कानून का पूरा नाम ‘विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन–ग्रामीण’ है. यह कानून संसद के शीतकालीन सत्र में पारित किया गया था. इस नए कानून ने करीब 20 साल पुराने मनरेगा कानून की जगह ली है. मनरेगा की तरह ही इसका उद्देश्य ग्रामीण इलाकों में रोजगार उपलब्ध कराना है, लेकिन इसमें कुछ अहम बदलाव किए गए हैं. सबसे बड़ा बदलाव रोजगार के दिनों को लेकर है, जहां मनरेगा में 100 दिन के रोजगार की गारंटी थी, वहीं नए कानून में इसे बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है.
विपक्ष की आपत्तियों की वजह
विपक्ष का कहना है कि मनरेगा योजना महात्मा गांधी के नाम पर आधारित थी, जो देश के लिए एक प्रतीकात्मक महत्व रखती थी. नए कानून में महात्मा गांधी का नाम न होने को विपक्ष उनके अपमान के रूप में देख रहा है. इसके अलावा, विपक्ष का आरोप है कि नया कानून राज्य सरकारों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालता है. उनके अनुसार, मनरेगा में पूरी फंडिंग केंद्र सरकार करती थी, जबकि G RAM G कानून में केंद्र के साथ-साथ राज्यों को भी खर्च उठाना होगा.
आगे भी जारी रह सकता है टकराव
G RAM G कानून को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है. बजट सत्र के दौरान इस मुद्दे पर विस्तार से बहस होने की संभावना है, क्योंकि यह कानून सीधे तौर पर ग्रामीण रोजगार, संघीय ढांचे और महात्मा गांधी की विरासत से जुड़ा हुआ माना जा रहा है.


