JNU को नफरत की प्रयोगशाला नहीं बनने देंगे, दोषी छात्रों के खिलाफ हुई एफआईआर, पीएम मोदी, अमित शाह के खिलाफ हुई थी नारेबाजी
JNU कैंपस में विरोध प्रदर्शन के दौरान पीएम मोदी और अमित शाह के खिलाफ नारेबाजी पर प्रशासन सख्त हुआ. FIR दर्ज की गई है. दोषी छात्रों पर निलंबन या निष्कासन हो सकता है. विश्वविद्यालय ने कहा कि नफरत और अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं होगी.

नई दिल्लीः जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) प्रशासन ने कैंपस में हुए एक हालिया विरोध प्रदर्शन को लेकर सख्त रुख अपनाया है. विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि जनवरी 2020 में हुई हिंसा की बरसी पर आयोजित प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ नारेबाजी करने वाले छात्रों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी. प्रशासन के अनुसार, इस मामले में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली गई है और दोषी पाए जाने वाले छात्रों को निलंबन या निष्कासन जैसी कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है.
प्रदर्शन के दौरान लगे आपत्तिजनक नारे
JNU प्रशासन ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जारी अपने बयान में कहा कि सोमवार रात को कैंपस में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कुछ छात्रों द्वारा भड़काऊ और आपत्तिजनक नारे लगाए गए. ये नारे देश के संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्तियों के खिलाफ थे, जिसे विश्वविद्यालय ने गंभीर अनुशासनहीनता माना है. प्रशासन ने कहा कि इस तरह के कृत्य जानबूझकर संवैधानिक संस्थाओं के प्रति अनादर दर्शाते हैं.
FIR दर्ज, जांच शुरू
विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया कि घटना की सूचना संबंधित थाने को दी गई, जिसके बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है. मामले की जांच जारी है और प्रशासन पुलिस के साथ पूरा सहयोग कर रहा है. JNU ने यह भी संकेत दिया है कि जांच पूरी होने के बाद दोषी पाए गए छात्रों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी.
नफरत की प्रयोगशाला नहीं बनेगा JNU
प्रशासन ने दो टूक शब्दों में कहा कि JNU को नफरत फैलाने का अड्डा नहीं बनने दिया जाएगा. विश्वविद्यालय का उद्देश्य शिक्षा, शोध और रचनात्मक संवाद को बढ़ावा देना है, न कि ऐसे मंच उपलब्ध कराना जहां नफरत या विभाजनकारी विचार फैलें. बयान में कहा गया कि अनुशासनहीन गतिविधियों में शामिल छात्रों को तत्काल निलंबित किया जा सकता है, उन्हें विश्वविद्यालय से निकाला भी जा सकता है या स्थायी रूप से निष्कासित किया जा सकता है.
अभिव्यक्ति की आजादी की सीमा
JNU प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एक मौलिक अधिकार है, लेकिन इसकी भी सीमाएं हैं. विश्वविद्यालय ने कहा कि असहमति और आलोचना लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन अपमानजनक भाषा, नफरती भाषण और गैरकानूनी गतिविधियां किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं हैं. ऐसी गतिविधियां न केवल कैंपस के माहौल को खराब करती हैं, बल्कि राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सद्भाव को भी नुकसान पहुंचाती हैं.
असहमति और नफरती भाषण में अंतर
विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार द्वारा जारी बयान में कहा गया कि छात्रों को यह समझना चाहिए कि असहमति व्यक्त करना और नफरत फैलाना दो अलग-अलग बातें हैं. संवैधानिक संस्थाओं और लोकतांत्रिक संवाद के स्थापित मानदंडों का सम्मान करना हर छात्र की जिम्मेदारी है.
थाने को पहले ही दी गई थी सूचना
प्रशासन की ओर से वसंत कुंज (उत्तर) थाने के प्रभारी को पहले ही पत्र लिखकर घटना की जानकारी दी गई थी. पत्र में बताया गया था कि ‘ए नाइट ऑफ रेजिस्टेंस विद गुरिल्ला ढाबा’ नामक कार्यक्रम के दौरान करीब 30 से 35 छात्र मौजूद थे, जिनमें से कुछ ने भड़काऊ नारे लगाए.
2020 की घटना की याद में हुई नारेबाजी
यह कार्यक्रम 5 जनवरी 2020 को JNU कैंपस में हुई हिंसा की याद में आयोजित किया गया था, जब नकाबपोश लोगों ने छात्रों और शिक्षकों पर हमला किया था. मौजूदा विरोध प्रदर्शन, सुप्रीम कोर्ट द्वारा उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार किए जाने के कुछ ही घंटों बाद हुआ, जिससे मामला और अधिक संवेदनशील हो गया.
सख्त संदेश
JNU प्रशासन ने अपने बयान के जरिए यह संदेश साफ कर दिया है कि कैंपस में अनुशासन और कानून का पालन सर्वोपरि है. किसी भी तरह की भड़काऊ राजनीति या गैरकानूनी गतिविधियों के लिए विश्वविद्यालय में कोई जगह नहीं है.


