UGC को कहां से मिलती है पावर? जिसके हाथों में है करोड़ों छात्रों का भविष्य और हायर एजुकेशन सिस्टम का कंट्रोल

नए नियमों को लेकर बहस तेज़ हो गई है. SC भी अब इस मामले में शामिल हो गया है, इन नियमों पर अस्थायी रोक लगा दी है ऐसे में सवाल यह उठता है कि UGC को वे शक्तियां कहां से मिलती हैं जो उसे हायर एजुकेशन संस्थानों के लिए नियम और कानून बनाने में सक्षम बनाती हैं?

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

नई दिल्ली: देशभर में इन दिनों यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नए इक्विटी रेगुलेशन को लेकर सियासी और कानूनी बहस तेज़ हो गई है. इस विवाद में अब सुप्रीम कोर्ट की एंट्री भी हो चुकी है, जिसने फिलहाल इन नियमों पर रोक लगा दी है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर यूजीसी को ऐसे नियम और रेगुलेशन बनाने की शक्ति कहां से मिलती है.

जब किसी संस्था के फैसले पूरे उच्च शिक्षा तंत्र को प्रभावित करते हों, तो उसकी संवैधानिक और कानूनी ताकत को समझना बेहद जरूरी हो जाता है. मौजूदा विवाद ने एक बार फिर यूजीसी के अधिकारों, उसके गठन और उसके कानूनी आधार को चर्चा के केंद्र में ला दिया है.

विवादों में क्यों आया यूजीसी का नया इक्विटी रूल

यूजीसी द्वारा लाए गए नए इक्विटी रेगुलेशन को यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में समानता का माहौल बनाने के उद्देश्य से लागू किया गया था. यह नियम 13 जनवरी से प्रभावी हुआ, लेकिन लागू होते ही इसका विरोध शुरू हो गया. कई पक्षों ने इसके कुछ प्रावधानों को असंवैधानिक बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी.

मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इस नए रेगुलेशन पर स्टे लगा दिया है. इसी के बाद यह सवाल ज़ोर पकड़ने लगा कि आखिर यूजीसी को ऐसे व्यापक और प्रभावशाली नियम बनाने का अधिकार किस कानून के तहत मिला है.

किस कानून के तहत बना यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन

यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन का गठन यूजीसी एक्ट 1956 के तहत किया गया था. यह अधिनियम संसद द्वारा भारतीय गणराज्य के सातवें वर्ष यानी 1956 में पारित किया गया. इस कानून का उद्देश्य देशभर के विश्वविद्यालयों के शैक्षणिक मानकों को तय करना और उनके बीच समन्वय स्थापित करना है.

यूजीसी एक्ट 1956 की धारा 3 के तहत आयोग की स्थापना का प्रावधान किया गया, ताकि उच्च शिक्षा संस्थानों की गुणवत्ता और मानकों को एक समान रखा जा सके.

यूजीसी के चेयरमैन और सदस्यों की नियुक्ति कैसे होती है

यूजीसी एक्ट 1956 की धारा 25 के तहत केंद्र सरकार को नियम बनाने की शक्ति दी गई है. इसी धारा के सब-सेक्शन (2) के क्लॉज (a), (b) और (c) के अनुसार आयोग के चेयरमैन और अन्य सदस्यों की नियुक्ति, उनकी सेवा शर्तें और रिटायरमेंट से जुड़े प्रावधान तय किए जाते हैं.

इन नियमों के जरिए यूजीसी के ढांचे को निर्धारित किया जाता है, लेकिन असली सवाल यहीं से आगे शुरू होता है—कि आखिर रेगुलेशन और अधिनियम बनाने की शक्ति यूजीसी को कैसे मिली.

यहां से मिलती है UGC को नियम बनाने की असली शक्ति

यूजीसी एक्ट 1956 के तीन प्रमुख सेक्शन यूजीसी को व्यापक अधिकार प्रदान करते हैं.

  • सेक्शन 12 में आयोग की शक्तियों और कार्यों का उल्लेख है.
  • सेक्शन 25 के तहत नियम बनाने की शक्ति दी गई है.
  • सेक्शन 26 के तहत अधिनियम और रेगुलेशन बनाने का अधिकार प्रदान किया गया है.

इन तीनों धाराओं के तहत ही यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था को नियंत्रित करने वाले नियम और रेगुलेशन तैयार करता है.

किस आधार पर बनाया गया नया इक्विटी रेगुलेशन

यूजीसी का नया इक्विटी रूल भी यूजीसी एक्ट 1956 के सेक्शन 12 और सेक्शन 26 में दी गई शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए बनाया गया है. इसी कानूनी आधार पर आयोग ने यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में समानता से जुड़े नए प्रावधान लागू किए.

हालांकि, इन नियमों को लेकर उठे संवैधानिक सवालों के चलते मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और अदालत ने फिलहाल इस पर रोक लगा दी है. आगे की सुनवाई के बाद ही यह तय होगा कि ये नियम लागू रहेंगे या नहीं.

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