8 साल में 17 सांप्रदायिक झड़पें: हिंदू-मुस्लिम तनाव की आग में बार-बार क्यों झुलस रहा नेपाल?

नेपाल के सीमावर्ती इलाकों में एक बार फिर सांप्रदायिक तनाव भड़क उठा है. बीते आठ सालों में हिंदू-मुस्लिम झड़पों की 17 घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिसने देश की सामाजिक शांति और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

नई दिल्ली: नेपाल के भारत से सटे सीमावर्ती इलाकों में एक बार फिर सांप्रदायिक तनाव ने हिंसक रूप ले लिया है. वीरगंज और धनुषा समेत कई संवेदनशील शहरों में हालात बिगड़ने के बाद प्रशासन को कर्फ्यू लगाने का फैसला करना पड़ा. शुरुआती तौर पर मामूली विवाद के रूप में शुरू हुई घटना देखते-ही-देखते हिंदू-मुस्लिम टकराव में तब्दील हो गई.

आंकड़े बताते हैं कि यह कोई पहली घटना नहीं है. बीते आठ वर्षों में नेपाल में सांप्रदायिक हिंसा की कम से कम 17 बड़ी घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिनमें से अधिकांश भारत-नेपाल सीमा से सटे इलाकों में हुई हैं. बार-बार भड़कती इस आग ने नेपाल की सामाजिक शांति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

नेपाल में अभी क्यों भड़की हिंसा?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वीरगंज के कमला इलाके में कथित तौर पर दो मुस्लिम युवकों ने टिकटॉक पर एक हिंदू-विरोधी पोस्ट साझा की. स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया और जब पुलिस की ओर से तत्काल कार्रवाई नहीं हुई, तो गुस्साई भीड़ ने एक मस्जिद में तोड़फोड़ कर दी. इसके बाद पूरे इलाके में तनाव तेजी से फैल गया.

मस्जिद में तोड़फोड़ के विरोध में मुस्लिम समुदाय सड़कों पर उतर आया और टायर जलाकर प्रदर्शन किया. जवाब में हिंदू समुदाय के लोग भी विरोध में आ गए. हालात बिगड़ते देख प्रशासन को आनन-फानन में कर्फ्यू लागू करना पड़ा.

पुलिस कार्रवाई और जांच

धनुषा जिला पुलिस बल के प्रवक्ता गणेश बाम के अनुसार, टिकटॉक वीडियो पोस्ट करने और मस्जिद में तोड़फोड़ की घटना से जुड़े आरोपों में तीन लोगों को हिरासत में लिया गया है. पुलिस का कहना है कि मामले की गहन जांच जारी है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी.

8 साल में 17 बार सांप्रदायिक हिंसा

नेपाल में हिंदू-मुस्लिम तनाव की घटनाएं लगातार दोहराई गई हैं:

  • 2017: कपिलवस्तु के बसबरिया में दुर्गा विसर्जन के दौरान पत्थरबाजी, 100 से ज्यादा मुस्लिम परिवार विस्थापित.
  • 2019 (सितंबर-नवंबर): रोतहट और कपिलवस्तु में त्योहारों के जुलूसों को लेकर हिंसा, कर्फ्यू लागू.
  • 2020: सरलाही के मलंगवा में विश्वकर्मा प्रतिमा विसर्जन पर विवाद.
  • 2021: कलैया और देवपुरा रूपेठा में त्योहारों के दौरान झड़पें.
  • 2022: महोतरी के भंगाहा नगरपालिका में जुलूस के दौरान टकराव.
  • 2023: सरलाही के गोदैता और बांके के नेपालगंज में धार्मिक जुलूसों पर तनाव.
  • 2024: रौतहट और बीरगंज में सरस्वती पूजा के दौरान हिंसा.
  • 2025: बीरगंज, जनकपुरधाम और नेपालगंज में हनुमान जयंती, गणेश विसर्जन और दुर्गा पूजा के दौरान झड़पें, कई लोग घायल और मौत की खबरें.

 

नेपाल में बार-बार क्यों भड़क रहा है हिंदू-मुस्लिम तनाव?

यूएन मानवाधिकार परिषद (UNHRC) द्वारा तैयार रिपोर्ट में कहा गया है कि नेपाल में मुस्लिम-विरोधी हिंसा की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है. रिपोर्ट के अनुसार, इसकी एक बड़ी वजह हिंदू समुदाय के बीच बढ़ता जनजागरण बताया गया है. नेपाल की आबादी में करीब 82% हिंदू हैं, जबकि मुसलमान लगभग 9% हैं.

लेवरेट का कहना है कि नेपाल के मीडिया, सामाजिक, राजनीतिक और न्यायिक तंत्र में मुसलमानों की भागीदारी बेहद सीमित है. इससे असंतुलन की स्थिति बनती है और तनाव बढ़ता है.

धर्मनिरपेक्षता के बाद बदले हालात

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2008 से पहले नेपाल एक हिंदू राष्ट्र था. संविधान लागू होने के बाद इसे धर्मनिरपेक्ष देश घोषित किया गया. इसके बाद मुसलमानों ने खुलकर धार्मिक स्वतंत्रता की मांग शुरू की. इस बदलाव का असर आसपास के हिंदू समुदायों पर पड़ा, जिसके चलते कई इलाकों में बार-बार सांप्रदायिक टकराव देखने को मिला.

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