व्हाइट हाउस में ऐतिहासिक पल, मचाडो ने ट्रंप को दिया नोबेल शांति पुरस्कार

वेनेजुएला की विपक्षी नेता और 2025 की नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मारिया कोरिना मचाडो ने व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात के दौरान अपना नोबेल शांति पुरस्कार उन्हें भेंट कर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नया संदेश दे दिया है.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

नई दिल्ली: वेनेजुएला की विपक्षी नेता और 2025 की नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मारिया कोरिना मचाडो ने गुरुवार को व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की. इस बैठक के दौरान मचाडो ने ट्रंप को अपना नोबेल शांति पुरस्कार का स्वर्ण पदक भेंट कर एक बड़ा राजनीतिक और प्रतीकात्मक संदेश दिया.

व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने इस बात की पुष्टि की है कि वह स्वर्ण पदक फिलहाल राष्ट्रपति ट्रंप के पास ही है. यह मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब वेनेजुएला के राजनीतिक भविष्य और वहां लोकतांत्रिक बदलाव को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज है.

मचाडो को क्यों मिला नोबेल शांति पुरस्कार

मारिया कोरिना मचाडो को 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार वेनेजुएला में लोकतांत्रिक अधिकारों और शांतिपूर्ण सत्ता परिवर्तन को बढ़ावा देने के उनके प्रयासों के लिए दिया गया है. पत्रकारों से बातचीत में मचाडो ने स्पष्ट किया कि उन्होंने बैठक के दौरान यह पदक ट्रंप को सौंप दिया था.

उन्होंने कहा, "मैंने संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति को नोबेल शांति पुरस्कार का पदक प्रदान किया," और इसे "हमारी स्वतंत्रता के प्रति उनकी अद्वितीय प्रतिबद्धता की मान्यता" बताया.

वेनेजुएला संकट के बीच हुई अहम बैठक

यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है, जब अमेरिका के नेतृत्व में इस महीने की शुरुआत में वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी की गिरफ्तारी के बाद देश के राजनीतिक भविष्य को लेकर बहस और तेज हो गई है. इससे पहले ट्रंप मचाडो को पर्याप्त घरेलू समर्थन न होने के कारण देश का नेतृत्व करने के लिए अयोग्य बता चुके थे.

समर्थकों के बीच दिखा उत्साह

अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ एक घंटे से अधिक चली बातचीत के बाद जब मचाडो व्हाइट हाउस से बाहर निकलीं, तो उनके समर्थकों ने उनका जोरदार स्वागत किया. मचाडो ने समर्थकों से कहा, "हम राष्ट्रपति ट्रंप पर भरोसा कर सकते हैं," जिसके बाद समर्थकों ने "धन्यवाद, ट्रंप" के नारे लगाए. इसके बाद मचाडो वाशिंगटन डीसी में अपनी अगली बैठकों के लिए रवाना हो गईं.

नोबेल पुरस्कार पर ट्रंप की नजरें

मचाडो का यह कदम उस समय सामने आया है, जब राष्ट्रपति ट्रंप की नजरें लंबे समय से प्रतिष्ठित नोबेल शांति पुरस्कार पर टिकी हुई हैं. ट्रंप ने इस पुरस्कार के लिए खुलकर प्रचार किया था, लेकिन नोबेल समिति ने अंततः यह सम्मान मचाडो को दिया.

इस फैसले के बाद ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी भी जाहिर की थी.

ट्रंप ने जताया आभार

मचाडो के इस कदम की सराहना करते हुए ट्रंप ने इसे एक "अद्भुत भाव" बताया. उन्होंने ट्रुथ सोशल पर लिखा, "मारिया ने मेरे द्वारा किए गए कार्यों के लिए मुझे अपना नोबेल शांति पुरस्कार प्रदान किया. आपसी सम्मान का यह कितना अद्भुत भाव है. मारिया, आपका धन्यवाद."

नोबेल संस्थान की सफाई

हालांकि, नॉर्वे के नोबेल संस्थान ने तुरंत स्पष्ट कर दिया कि नोबेल शांति पुरस्कार न तो हस्तांतरित किया जा सकता है और न ही साझा. संस्थान के मुताबिक, यह पुरस्कार मचाडो का ही रहेगा.

इस मुद्दे पर जब बुधवार को ट्रंप से पूछा गया कि क्या वह चाहते हैं कि मचाडो उन्हें यह पुरस्कार दे दें, तो उन्होंने रॉयटर्स से कहा, "नहीं, मैंने ऐसा नहीं कहा. नोबेल शांति पुरस्कार उन्हें मिला है."

व्हाइट हाउस का रुख बरकरार

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने मचाडो को वेनेजुएला के कई लोगों की "एक उल्लेखनीय और साहसी आवाज" बताया. हालांकि, उन्होंने यह भी दोहराया कि मचाडो के नेतृत्व की संभावनाओं को लेकर ट्रंप का आकलन अब भी वही है. राष्ट्रपति पहले कह चुके हैं कि वेनेजुएला में संक्रमणकालीन सरकार का नेतृत्व करने के लिए मचाडो को पर्याप्त घरेलू समर्थन प्राप्त नहीं है.

वाशिंगटन में पहली सार्वजनिक उपस्थिति

गौरतलब है कि गुरुवार की यह बैठक मचाडो की वाशिंगटन में पहली सार्वजनिक उपस्थिति थी, जो वेनेजुएला छोड़ने के कई महीनों बाद हुई. उनकी सुरक्षा को खतरे के चलते उन्हें देश छोड़ना पड़ा था. मादुरो समर्थित एक शीर्ष अदालत ने उन्हें 2024 के राष्ट्रपति चुनाव लड़ने से रोक दिया था.

स्वतंत्र पर्यवेक्षकों के अनुसार, विपक्ष समर्थित एडमंडो गोंजालेज उरुतिया ने निर्णायक जीत हासिल की थी, लेकिन मादुरो ने जीत की घोषणा कर सत्ता पर अपना कब्जा बनाए रखा.

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