पाकिस्तान के इन प्रांतों में शुरू हुआ आंदोलन, सड़कों पर उतरे Gen Z...सरकार की उड़ी नींद

पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान में कार्यवाहक मंत्रिमंडल के गठन को लेकर युवाओं और विपक्ष ने विरोध शुरू किया है. राजनीतिक रूप से जुड़े लोगों की नियुक्ति से चुनावी निष्पक्षता पर सवाल उठे हैं, जिससे क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है.

Yaspal Singh
Edited By: Yaspal Singh

नई दिल्लीः पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान (PoGB) में एक बार फिर राजनीतिक माहौल गर्मा गया है. कार्यवाहक सरकार के मंत्रिमंडल के गठन को लेकर युवाओं, विपक्षी दलों और आम नागरिकों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है. आरोप है कि अंतरिम कैबिनेट में ऐसे लोगों को शामिल किया गया है जिनके पहले से राजनीतिक संबंध रहे हैं, जिससे आगामी चुनावों की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.

युवाओं के नेतृत्व में शुरू हुआ विरोध

इस विरोध की अगुवाई जीबी यूथ मूवमेंट कर रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में Gen-Z युवा शामिल हैं. आंदोलन की शुरुआत गिलगित के चिनारबाग इलाके से हुई, जहां धरना देकर कार्यवाहक सरकार के फैसले का विरोध किया गया. देखते ही देखते यह आंदोलन घांचे, नगर और शिगार जैसे अन्य जिलों तक फैल गया. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अंतरिम सरकार का मकसद निष्पक्ष चुनाव कराना होता है, लेकिन मौजूदा कैबिनेट गठन इस उद्देश्य के बिल्कुल विपरीत है.

निष्पक्षता पर उठे गंभीर सवाल

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि कार्यवाहक मंत्रिमंडल में जिन व्यक्तियों को शामिल किया गया है, वे या तो पहले किसी न किसी राजनीतिक दल से जुड़े रहे हैं या पूर्व सरकारों में अहम पदों पर रह चुके हैं. उनका कहना है कि ऐसी नियुक्तियां अंतरिम सरकार की तटस्थता को खत्म करती हैं और चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप का रास्ता खोलती हैं. युवाओं का मानना है कि अगर निष्पक्ष माहौल नहीं होगा तो चुनाव परिणाम भी संदेह के घेरे में आ जाएंगे.

धरना, सड़क जाम और गिरफ्तारियां

विरोध प्रदर्शन धीरे-धीरे धरने में तब्दील हो गया, जिसके चलते चिनारबाग स्थित रिवर रोड को कुछ समय के लिए बंद करना पड़ा. इससे यातायात प्रभावित हुआ और हालात तनावपूर्ण हो गए. प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए जीबी यूथ मूवमेंट के अध्यक्ष अजफर जमशेद समेत आठ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया. इन गिरफ्तारियों के बाद राजनीतिक हलकों में नाराजगी और बढ़ गई.

विपक्षी दलों का समर्थन

गिरफ्तारियों की कई विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने कड़ी निंदा की. पाकिस्तान अधिकृत गिलगित-बाल्टिस्तान विधानसभा के पूर्व सदस्य सुल्तान अली खान ने इसे अलोकतांत्रिक करार दिया. अवामी एक्शन कमेटी घांचे के नेता जाकिर हुसैन काजिम ने कहा कि कार्यवाहक कैबिनेट में घांचे जैसे सीमावर्ती जिले की अनदेखी से स्थानीय लोगों में गहरा असंतोष है. उन्होंने चेतावनी दी कि क्षेत्रीय असंतुलन के दूरगामी और गंभीर परिणाम हो सकते हैं.

प्रतिनिधित्व को लेकर उठी आपत्ति

विपक्षी नेताओं का कहना है कि एक ही जिले से कई लोगों को कैबिनेट में शामिल करना और अन्य जिलों को पूरी तरह नजरअंदाज करना निष्पक्षता के सिद्धांतों का उल्लंघन है. इससे न सिर्फ चुनाव प्रक्रिया पर असर पड़ेगा, बल्कि जनता का लोकतंत्र से विश्वास भी कमजोर होगा.

पूर्व मुख्यमंत्री की चेतावनी

PoGB के पूर्व मुख्यमंत्री और PML-N के अध्यक्ष हाफिज उर रहमान ने भी इस फैसले पर आपत्ति जताई है. उन्होंने कहा कि कार्यवाहक सरकार का गठन सभी जिलों की सहमति और प्रतिनिधित्व के साथ होना चाहिए. साथ ही, राजनीतिक रूप से सक्रिय या संबद्ध व्यक्तियों को अंतरिम कैबिनेट से दूर रखा जाना जरूरी है. उन्होंने चेताया कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर असर पड़ेगा.

आंदोलन और तेज होने के संकेत

जीबी यूथ मूवमेंट ने साफ कर दिया है कि अगर उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो विरोध केवल गिलगित-बाल्टिस्तान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश के अन्य हिस्सों में रह रहे PoGB के युवाओं तक भी फैलेगा. मौजूदा हालात में यह आंदोलन न सिर्फ अंतरिम सरकार के लिए चुनौती बनता जा रहा है, बल्कि पूरे क्षेत्र में राजनीतिक अस्थिरता का संकेत भी दे रहा है.

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