पाकिस्तान ने ऑपरेशन सिंदूर पर चीन के मध्यस्थता दावे का किया समर्थन, भारत ने किया खंडन
मई 2025 में हुए भारत–पाकिस्तान सैन्य तनाव को लेकर एक बार फिर कूटनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई है. पाकिस्तान ने अब चीन के उस दावे का समर्थन किया है, जिसमें बीजिंग ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की भूमिका निभाने की बात कही थी, जबकि भारत ने इस दावे को साफ़ तौर पर खारिज कर दिया है.

नई दिल्ली:मई 2025 में हुए भारत–पाकिस्तान सैन्य तनाव को लेकर एक बार फिर कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है. पाकिस्तान ने अब खुले तौर पर चीन के उस दावे का समर्थन किया है, जिसमें बीजिंग ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की भूमिका निभाने की बात कही थी.
इस्लामाबाद के इस बयान को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि अब तक पाकिस्तान संघर्ष विराम का श्रेय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को देता रहा है. वहीं भारत पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि संघर्ष विराम किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता से नहीं, बल्कि सैन्य स्तर पर सीधे संवाद के बाद हुआ था.
पाक विदेश कार्यालय का बयान
गुरुवार को एक प्रेस ब्रीफिंग में पाकिस्तानी विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने कहा कि चीनी नेता पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व के साथ "लगातार संपर्क में" थे. उन्होंने यह भी दावा किया कि चीन ने भारत के नेतृत्व से भी संपर्क साधा था.
अंद्राबी के अनुसार, चीनी नेतृत्व ने "मई के उन तीन-चार दिनों (6 से 10 तारीख) के दौरान और शायद उससे पहले और बाद में भी भारतीय नेतृत्व के साथ कुछ संपर्क किए थे."
'सकारात्मक कूटनीतिक आदान-प्रदान' का दावा
पाकिस्तानी प्रवक्ता ने कहा, "इसलिए, मेरा मानना है कि वे संपर्क, जिनमें सकारात्मक राजनयिक आदान-प्रदान हुए, क्षेत्र में तनाव कम करने और शांति एवं सुरक्षा लाने में सहायक रहे. अतः, मुझे पूरा विश्वास है कि मध्यस्थता के संबंध में चीन का दृष्टिकोण सही है."
उनका यह बयान सीधे तौर पर चीन के उस रुख का समर्थन करता है, जिसमें बीजिंग ने संकट के दौरान सक्रिय कूटनीतिक भूमिका निभाने का दावा किया था.
देरी से आए बयान पर उठे सवाल
इस्लामाबाद का यह बयान कई सवाल भी खड़े करता है. भारत के साथ चार दिवसीय संघर्ष के बाद विराम को लेकर चीन की भूमिका पर यह पाकिस्तान का पहला आधिकारिक बयान है, जो काफी देर से सामने आया है.
अब तक पाकिस्तान शत्रुता के निलंबन का श्रेय पूरी तरह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को देता रहा था. ऐसे में अब चीन के दावे का समर्थन करना संदेह को और गहरा करता है.
भारत ने तीसरे पक्ष की भूमिका से किया इनकार
भारत का रुख इस मुद्दे पर पहले से ही स्पष्ट है. नई दिल्ली के अनुसार, सैन्य विराम पाकिस्तान के डीजीएमओ द्वारा भारतीय समकक्ष से किए गए अनुरोध के बाद हुआ था, न कि किसी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप के कारण.
भारत ने चीनी विदेश मंत्री वांग यी के उस बयान को भी सिरे से खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने संकट के दौरान चीन की मध्यस्थता का दावा किया था.
पाकिस्तान का चीन के रुख को 'ढ़ समर्थन'
ताहिर अंद्राबी ने कहा कि पाकिस्तान चीन के आकलन से सहमत है और इन प्रयासों को “शांति, समृद्धि और सुरक्षा के लिए कूटनीति” करार दिया. उन्होंने कहा कि "यह उन तीन-चार दुर्भाग्यपूर्ण दिनों में उस संघर्ष को सुलझाने के लिए किए गए कई अंतरराष्ट्रीय प्रयासों की पहचान रही है."
उन्होंने यह भी जोड़ा कि पाकिस्तान अपने विदेश मंत्री द्वारा व्यक्त किए गए चीन के रुख का “दृढ़तापूर्वक” समर्थन करता है.
अमेरिका के दावे से भी मेल खाता है चीन का बयान
गौरतलब है कि चीन का यह दावा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के उन बार-बार दिए गए बयानों से भी मेल खाता है, जिनमें उन्होंने कहा था कि वाशिंगटन ने दोनों परमाणु-सशस्त्र पड़ोसी देशों के बीच टकराव को समाप्त करने में निर्णायक भूमिका निभाई थी.


