थाईलैंड-कंबोडिया सीमा पर खूनी संघर्ष, तीसरे दिन भी जारी गोलीबारी, अब तक 32 की मौत
थाईलैंड और कंबोडिया की सीमा पर हालात दिन-ब-दिन और भीषण होते जा रहे हैं. बीते तीन दिनों से जारी गोलीबारी और संघर्ष ने अब तक कम से कम 32 लोगों की जान ले ली है, जबकि 81,000 से ज्यादा लोग अपने घरों को छोड़ने को मजबूर हो चुके हैं. सीमा पर स्कूल, अस्पताल और घरों को भीषण नुकसान पहुंचा है.

थाईलैंड और कंबोडिया के बीच सीमा पर जारी संघर्ष ने अब विकराल रूप ले लिया है. लगातार तीसरे दिन भी दोनों देशों के बीच भारी गोलीबारी जारी है, जिसमें अब तक 32 लोगों की मौत हो चुकी है. इस हिंसा के चलते 81,000 से ज्यादा लोग अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर भागने को मजबूर हुए हैं.
सीमा पर चल रही इस जंग से दोनों ही देशों के स्कूल, अस्पताल और हजारों घरों को नुकसान पहुंचा है. वैश्विक स्तर पर युद्धविराम की अपीलें की जा रही हैं, लेकिन जमीनी हालात फिलहाल किसी भी तरह की राहत की इजाजत नहीं दे रहे.
संघर्ष से दहला सीमावर्ती इलाका
थाईलैंड और कंबोडिया के बीच यह संघर्ष उस वक्त शुरू हुआ जब सीमा के पास स्थित कुछ विवादित क्षेत्रों में फायरिंग की खबरें सामने आईं. दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने हैं और भारी हथियारों से हमला किया जा रहा है. अब तक की हिंसा में कम से कम 32 लोगों की जान जा चुकी है.
81,000 से ज्यादा लोगों ने छोड़े घर
जारी गोलीबारी और हमलों के बीच सीमावर्ती गांवों में दहशत का माहौल है. प्रशासन के मुताबिक 81,000 से अधिक लोग अपने घरों से पलायन कर चुके हैं. राहत शिविरों में भीड़ बढ़ती जा रही है और मूलभूत सुविधाओं का अभाव है.
स्कूल, अस्पताल और घर तबाह
गोलाबारी से सबसे ज्यादा नुकसान आम नागरिकों को हुआ है. अब तक कई स्कूलों, अस्पतालों और रिहायशी इलाकों में तबाही मच चुकी है. रिपोर्ट्स के अनुसार, “शेलिंग के कारण बच्चों की पढ़ाई और मरीजों का इलाज दोनों प्रभावित हो रहे हैं.
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की अपील बेअसर
संयुक्त राष्ट्र और कई वैश्विक शक्तियों ने दोनों देशों से संयम बरतने और संघर्ष विराम की अपील की है. लेकिन जमीनी हालात पूरी तरह उलट हैं. शांति की कोई उम्मीद नज़र नहीं आ रही. एक अधिकारी के अनुसार, “हम हर संभव प्रयास कर रहे हैं लेकिन गोलीबारी थमने का नाम नहीं ले रही.
राजनीतिक अस्थिरता और तनाव की वजह
विशेषज्ञों के अनुसार, यह संघर्ष केवल सीमा विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे राजनीतिक अस्थिरता, क्षेत्रीय प्रभाव की होड़ और सैन्य शक्ति प्रदर्शन जैसे कारण भी हैं. विश्लेषकों का मानना है कि अगर जल्द ही कूटनीतिक हल नहीं निकला, तो यह संघर्ष और ज्यादा भयावह रूप ले सकता है.


