राष्ट्रपति बनने के बाद भारत दौरे पर आएंगे डोनाल्ड ट्रंप, चीन जाने का भी है प्लान
Donald Trump India Visit: राष्ट्रपति बनने के बाद डोनाल्ड ट्रंप भारत आना चाहते हैं. साथ ही वह चीन भी जाना चाहते हैं. सूत्रों के अनुसार ट्रंप ने अपने सलाहकारों से इस बारे में चर्चा की है. आइए जानते हैं पूरी बात.

Donald Trump India Visit: अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पदभार संभालने के बाद भारत दौरे की योजना बनाई है. यह जानकारी द वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट में दी गई है. इस यात्रा की संभावनाओं पर चर्चा हाल ही में विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमेरिकी अधिकारियों के बीच हुई. जयशंकर ने वाशिंगटन यात्रा के दौरान इस दौरे के महत्व को रेखांकित किया और ट्रंप के शपथ ग्रहण समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे.
भारत यात्रा की संभावनाएं और तारीखें
आपको बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप की भारत यात्रा इस साल अप्रैल से दिसंबर के बीच होने की संभावना है. इस दौरान अमेरिका और भारत के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण समझौते हो सकते हैं. इसके अलावा, ट्रंप व्हाइट हाउस में बैठक के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मार्च से जून के बीच आमंत्रित कर सकते हैं.
क्वाड शिखर सम्मेलन में ट्रंप की भागीदारी
वहीं आपको बता दें कि भारत इस वर्ष क्वाड शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा, जिसमें डोनाल्ड ट्रंप के शामिल होने की संभावना है. इस सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज और जापानी प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा भी हिस्सा लेंगे. यह सम्मेलन इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने और अमेरिका-भारत के रणनीतिक संबंधों को और गहरा करने का अवसर हो सकता है.
चीन यात्रा की योजना और इसके कारण
भारत दौरे के साथ ही डोनाल्ड ट्रंप चीन की यात्रा करने पर भी विचार कर रहे हैं. इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य अमेरिका और चीन के बीच आर्थिक और राजनीतिक तनाव को कम करना है. हालांकि, चुनाव प्रचार के दौरान ट्रंप ने चीन के प्रति सख्त रुख अपनाया था, लेकिन अब उनका दृष्टिकोण बदलता नजर आ रहा है. एलन मस्क जैसे प्रमुख व्यापारिक सहयोगियों की प्राथमिकताओं को भी इस फैसले का प्रमुख कारण माना जा रहा है.
विदेश नीति और रणनीतिक साझेदारी
इसके अलावा डोनाल्ड ट्रंप की भारत और चीन यात्रा उनकी प्रशासन की विदेश नीति की दिशा को स्पष्ट करती है, जहां एक ओर यह यात्राएं चीन के साथ संबंध सुधारने की पहल कर सकती हैं, वहीं भारत के साथ व्यापार, रक्षा और कूटनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की उम्मीद है.


