ट्रंप के 10 % टैरिफ के खिलाफ भड़का यूरोपीय संघ, व्यापार समझौते पर अमेरिका से रोकी बातचीत

ग्रीनलैंड को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दबाव और यूरोपीय देशों पर नए टैरिफ लगाने के फैसले से अमेरिका-यूरोप संबंधों में तनाव बढ़ गया है. इसके चलते यूरोपीय संसद ने ऐतिहासिक अमेरिका-ईयू व्यापार समझौते की मंजूरी रोक दी.

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

नई दिल्ली : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा डेनमार्क से ग्रीनलैंड पर नियंत्रण हासिल करने के प्रयास और इसके साथ ही यूरोपीय संघ के देशों पर नए टैरिफ लगाने के फैसले ने ट्रांसअटलांटिक संबंधों में गंभीर तनाव पैदा कर दिया है. इसी पृष्ठभूमि में यूरोपीय संसद ने अमेरिका-यूरोप के बीच प्रस्तावित एक ऐतिहासिक व्यापार समझौते की मंजूरी पर रोक लगा दी है. इस फैसले से पिछले वर्ष दोनों पक्षों के बीच हुए व्यापारिक “युद्धविराम” के भविष्य पर सवाल खड़े हो गए हैं.

जुलाई समझौते पर क्यों लगी ब्रेक

आपको बता दें कि पिछले साल जुलाई में राष्ट्रपति ट्रम्प और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के बीच अमेरिका-ईयू व्यापार समझौता हुआ था. इसका उद्देश्य दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच स्थिरता लाना था. इस समझौते के तहत अमेरिकी बाजार में यूरोपीय संघ के उत्पादों पर टैरिफ को 15 प्रतिशत पर सीमित रखा जाना था, जबकि यूरोपीय संघ ने अमेरिकी निर्यात पर शुल्क में कटौती की थी. हालांकि, ग्रीनलैंड को लेकर वाशिंगटन द्वारा यूरोप पर दबाव बढ़ाए जाने के बाद इस समझौते की रफ्तार धीमी पड़ गई और अब संसद स्तर पर इसे रोक दिया गया है.

8 देशों पर 10 % टैरिफ 
ट्रम्प ने इस सप्ताह उन यूरोपीय देशों पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की, जिन्होंने आर्कटिक क्षेत्र के ग्रीनलैंड द्वीप पर सैनिकों की एक छोटी टुकड़ी तैनात की है. उन्होंने चेतावनी दी कि यह शुल्क 1 जून से बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया जाएगा और यह तब तक लागू रहेगा, जब तक “ग्रीनलैंड की पूर्ण खरीद” को लेकर कोई समझौता नहीं हो जाता. यूरोपीय नेताओं ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा कि यह तैनाती उत्तरी अटलांटिक क्षेत्र में रूस और चीन की बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए की गई थी, न कि अमेरिका को उकसाने के लिए.

यूरोपीय संघ की कड़ी प्रतिक्रिया के संकेत
नए टैरिफ की घोषणा के बाद यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने स्पष्ट किया कि यदि ये उपाय जारी रहते हैं तो यूरोपीय संघ एक “संयुक्त और संगठित प्रतिक्रिया” देगा. उनका संकेत था कि ब्रुसेल्स अब केवल कूटनीतिक विरोध तक सीमित नहीं रहेगा.

यूरोपीय संसद में समर्थन ठप
यूरोपीय संसद के भीतर विभिन्न राजनीतिक समूहों ने तुरंत अमेरिका-ईयू व्यापार समझौते के अनुमोदन की प्रक्रिया को रोक दिया. यूरोपीय पीपुल्स पार्टी (EPP) के नेता मैनफ्रेड वेबर ने कहा कि जब तक राष्ट्रपति ट्रम्प ग्रीनलैंड को लेकर धमकी भरी भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं, तब तक सांसद किसी भी व्यापार समझौते को मंजूरी नहीं दे सकते.

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि उनकी पार्टी सिद्धांत रूप में अमेरिका-ईयू व्यापार समझौते के पक्ष में है, लेकिन मौजूदा हालात में इसे आगे बढ़ाना संभव नहीं है और अमेरिकी उत्पादों के लिए प्रस्तावित शून्य-टैरिफ व्यवस्था को फिलहाल रोकना होगा.

करीबी था मतदान, लेकिन हालात बदल गए
इस प्रक्रिया से जुड़े यूरोपीय संसद सदस्य सिगफ्रीड मुरेन ने कहा कि हालात बिगड़ने से पहले इस समझौते पर मतदान का फैसला बेहद करीबी था. जुलाई में हुए समझौते का एक अहम लक्ष्य अमेरिकी आयात पर यूरोपीय संघ के टैरिफ को शून्य करना था. उन्होंने भी X पर लिखा कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए समझौते की पुष्टि को टालना ही एकमात्र विकल्प बचा है.

जवाबी कार्रवाई की मांग तेज
कुछ सांसदों ने केवल रोक लगाने तक सीमित न रहते हुए यूरोपीय संघ से कड़े जवाब की मांग की है. रिन्यू यूरोप समूह की व्यापार समन्वयक कैरिन कार्ल्सब्रो ने कहा कि संसद इस सप्ताह किसी भी स्थिति में समझौते को हरी झंडी नहीं देगी. उनके अनुसार, यूरोपीय संघ को राष्ट्रपति ट्रम्प के टैरिफ हमलों के खिलाफ टकराव के लिए तैयार रहना चाहिए, जिनमें स्वीडन जैसे देशों को निशाना बनाया गया है.

‘एंटी-कोर्सियन इंस्ट्रूमेंट’ का विकल्प
यूरोपीय संघ के पास औपचारिक रूप से एक शक्तिशाली तंत्र मौजूद है, जिसे एंटी-कोर्सियन इंस्ट्रूमेंट कहा जाता है. इसके तहत यूरोपीय संघ उन देशों के खिलाफ निवेश, सार्वजनिक खरीद में भागीदारी और बौद्धिक संपदा संरक्षण पर प्रतिबंध लगा सकता है, जो व्यापार के जरिए दबाव बनाने की कोशिश करते हैं.

व्यापार शांति की जगह बढ़ता टकराव
अब जबकि टैरिफ को सीधे ट्रम्प के ग्रीनलैंड एजेंडे से जोड़ दिया गया है, यूरोपीय सांसदों का मानना है कि जो समझौता कभी व्यापार युद्ध को शांत करने के लिए तैयार किया गया था, वही अब इस टकराव का एक और शिकार बनता नजर आ रहा है. अमेरिका और यूरोप के बीच बढ़ता यह तनाव आने वाले समय में वैश्विक व्यापार पर भी असर डाल सकता है.

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