अमेरिकी कोर्ट ने ट्रंप को हरी झंडी देकर भारतीयों को दिया झटका, H-1B वीजा की 88 लाख की फीस को बताया सही!
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एच-1बी वीजा पर 100,000 डॉलर का शुल्क लगाने की नीति को अमेरिकी संघीय अदालत ने वैध बताया हैं. न्यायाधीश ने कहा कि ट्रंप को शुल्क लगाने का पूरा अधिकार है.

अमेरिकी संघीय अदालत ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एच-1बी वीजा पर 100,000 डॉलर का शुल्क लगाने की नीति को वैध बताया है. यह फैसला दिसंबर 2025 में आया, जिसके कारण तकनीकी कंपनियों और विदेशी कुशल कर्मचारियों को बड़ा झटका लगा है.
अदालत का फैसला
वाशिंगटन डीसी की जिला न्यायाधीश बेरिल हॉवेल ने कहा कि ट्रंप के पास आव्रजन कानून के तहत यह शुल्क लगाने का पूरा अधिकार है. कांग्रेस ने राष्ट्रपति को आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर व्यापक शक्तियां दी हैं.
यह शुल्क सितंबर 2025 में घोषित किया गया था और नए एच-1बी आवेदनों पर लागू होता है. पहले शुल्क सिर्फ 2,000 से 5,000 डॉलर के आसपास था. न्यायाधीश ने यूएस चैंबर ऑफ कॉमर्स की याचिका खारिज कर दी.
कंपनियों और व्यवसायों पर असर
तकनीकी दिग्गज जैसे अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट, गूगल और मेटा इस कार्यक्रम पर बहुत निर्भर हैं. अमेजन को पिछले साल सबसे ज्यादा वीजा मिले थे. चैंबर ऑफ कॉमर्स ने चेतावनी दी कि इतना महंगा शुल्क छोटी कंपनियों, अस्पतालों और विश्वविद्यालयों के लिए मुश्किल खड़ी करेगा.
इससे नौकरियां कम हो सकती हैं और सेवाएं प्रभावित होंगी. उनका कहना है कि यह कार्यक्रम अमेरिकी कंपनियों को वैश्विक प्रतिभा देने के लिए बना था. भारत से सबसे ज्यादा (लगभग 71%) लाभार्थी आते हैं.
एच-1बी कार्यक्रम की जानकारी
यह वीजा अमेरिकी कंपनियों को तकनीक, इंजीनियरिंग, स्वास्थ्य और अन्य विशेष क्षेत्रों में विदेशी कुशल कर्मचारी रखने की इजाजत देता है. हर साल 65,000 सामान्य और 20,000 उच्च डिग्री वालों के लिए वीजा दिए जाते हैं.
ट्रंप प्रशासन का मानना है कि यह शुल्क दुरुपयोग रोकेगा और अमेरिकी कर्मचारियों की जगह विदेशी न लें. इससे कंपनियां सिर्फ जरूरी और उच्च कुशल लोगों को ही हायर करेंगी.
लॉटरी सिस्टम में बदलाव
ट्रंप प्रशासन ने एच-1बी की पुरानी रैंडम लॉटरी प्रणाली खत्म कर दी है. अब नया नियम फरवरी 2026 से लागू होगा, जिसमें उच्च वेतन और ज्यादा कुशल उम्मीदवारों को ज्यादा वेटेज मिलेगा. कम वेतन वाले आवेदनों की संभावना कम हो जाएगी.इससे शीर्ष प्रतिभा को आकर्षित करने का दावा किया गया है.
आगे की कानूनी लड़ाई
यह फैसला सिर्फ एक मुकदमे का है. अन्य केस जैसे 20 डेमोक्रेट राज्यों और नर्सिंग एजेंसियों के चल रहे हैं. अपील हो सकती है और मामला सुप्रीम कोर्ट तक जा सकता है. कंपनियां वैश्विक टैलेंट खोने से चिंतित हैं, जबकि प्रशासन अमेरिकी नौकरियों को प्राथमिकता दे रहा है. यह नीति आव्रजन सुधार का हिस्सा है.


