खामेनेई की मौत के बाद एक्टिव हो गए ईरान के स्लीपर सेल! अमेरिका के हाथ लगा गुप्त संदेश
खामेनेई की हत्या के बाद अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने ईरान से भेजे गए एन्क्रिप्टेड संदेशों को इंटरसेप्ट किया है. आशंका है कि इनका मकसद विदेशों में मौजूद स्लीपर सेल को सक्रिय करना हो सकता है, जिससे वैश्विक सतर्कता बढ़ गई है.

नई दिल्ली: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव और भी बढ़ गया है. हाल ही में अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने ऐसे गुप्त संदेशों को इंटरसेप्ट किया है, जिन्हें ईरान से विदेशों में मौजूद गुप्त एजेंटों या स्लीपर सेल को सक्रिय करने के लिए भेजा गया माना जा रहा है. इन संदेशों के सामने आने के बाद कई देशों की सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गई हैं और संदिग्ध गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है.
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ये संदेश 28 फरवरी को पकड़े गए थे, ठीक उसी समय जब अमेरिका और इजरायल के संयुक्त अभियान में खामेनेई की मौत हुई थी. खुफिया विशेषज्ञों का मानना है कि इन संदेशों का स्रोत संभवतः ईरान हो सकता है. इन संकेतों की खास बात यह है कि ये एन्क्रिप्टेड यानी गुप्त कोड में थे और केवल उन्हीं लोगों द्वारा पढ़े जा सकते हैं जिनके पास डिक्रिप्शन की कुंजी मौजूद है.
इस तरह की प्रणाली का इस्तेमाल इसलिए किया जाता है ताकि इंटरनेट या मोबाइल नेटवर्क का उपयोग किए बिना भी निर्देश सुरक्षित तरीके से भेजे जा सकें. विश्लेषकों ने यह भी पाया कि इन संदेशों को कई देशों में असामान्य तरीके से दोबारा प्रसारित किया गया, जिससे खुफिया एजेंसियों का शक और गहरा हो गया. यही कारण है कि रेडियो फ्रीक्वेंसी से जुड़ी गतिविधियों की निगरानी बढ़ा दी गई है.
स्लीपर सेल को सक्रिय करने की आशंका
खुफिया चेतावनी में कहा गया है कि इन संदेशों का मकसद विदेशों में पहले से मौजूद स्लीपर सेल या गुप्त नेटवर्क को सक्रिय करना हो सकता है. हालांकि इन संदेशों की असली सामग्री अभी तक सामने नहीं आई है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि एक नए अंतरराष्ट्रीय रीब्रॉडकास्ट स्टेशन का अचानक सक्रिय होना भी संदेह पैदा कर रहा है. फिलहाल किसी खास देश या शहर के लिए तत्काल खतरे की पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन कानून प्रवर्तन एजेंसियों को सतर्क रहने और संदिग्ध रेडियो संकेतों पर नजर रखने की सलाह दी गई है.
मध्य पूर्व में बढ़ता संघर्ष
यह खुफिया जानकारी ऐसे समय में सामने आई है जब ईरान और इजरायल के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है. हाल ही में तेहरान में तेल भंडारों पर हुए हमलों के बाद इजरायल ने मध्य ईरान और बेरूत में हिज़्बुल्लाह से जुड़े ठिकानों पर नए हमले किए हैं. इसके जवाब में ईरान ने भी इजरायल और उन देशों को निशाना बनाते हुए मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं, जहां अमेरिकी सैन्य बल तैनात हैं. इस टकराव ने पूरे मध्य पूर्व में अस्थिरता बढ़ा दी है.
सऊदी अरब में मिसाइल गिरने से दो लोगों की मौत
रविवार को सऊदी अरब के एक रिहायशी इलाके में एक मिसाइल गिरने से एक भारतीय नागरिक समेत दो विदेशी नागरिकों की मौत हो गई. संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत ने बताया कि इस संघर्ष में अब तक कम से कम 1,332 नागरिकों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग घायल हुए हैं. उधर, अमेरिका ने भी पुष्टि की है कि संघर्ष से जुड़ी चोटों के कारण एक और अमेरिकी सैनिक की मौत हुई है. इसके साथ ही इस अभियान में मरने वाले अमेरिकी सैनिकों की संख्या सात हो गई है.
ट्रंप बोले- अमेरिका पूरी तरह सतर्क
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उनकी सरकार इस बात पर पूरी नजर रख रही है कि कहीं ईरान विदेशों में स्लीपर सेल को सक्रिय तो नहीं कर रहा. उन्होंने कहा कि ईरान में चल रहा अमेरिकी सैन्य अभियान उम्मीद से ज्यादा आगे बढ़ चुका है और इसे सफल माना जा सकता है, लेकिन कार्रवाई अभी जारी रहेगी.
ट्रंप के मुताबिक अमेरिकी सेना ने ईरान की ड्रोन बनाने वाली क्षमताओं को भी निशाना बनाया है, जिसके चलते ड्रोन हमलों में लगभग 83 प्रतिशत की गिरावट आई है. हाल ही में ईरान के एक गर्ल्स स्कूल पर हुए हमले को लेकर पूछे गए सवाल पर ट्रंप ने कहा कि इस मामले की जांच की जा रही है और जल्द ही पूरी जानकारी सामने आएगी.


