ईरानी सरकार ने की तीन दिनों के राष्ट्रीय शोक की घोषणा, 500 के पार पहुंची मृतकों की संख्या

ईरान में दो हफ्तों से जारी विरोध प्रदर्शनों में अब तक 538 लोगों की मौत और 10,000 से अधिक की गिरफ्तारी का दावा किया गया है. हालात गंभीर होने पर सरकार ने तीन दिनों का राष्ट्रीय शोक घोषित किया है.

Shraddha Mishra

ईरान: ईरान में बीते दो हफ्तों से जारी राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शनों लगातार और अब गंभीर होता जा रहा है. मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के अनुसार, इन प्रदर्शनों को दबाने के लिए की गई कार्रवाई में अब तक कम से कम 538 लोगों की मौत हो चुकी है. इसके साथ ही हजारों लोगों को गिरफ्तार किए जाने की खबर है. हालात को देखते हुए ईरानी सरकार ने तीन दिनों के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है.

अमेरिका स्थित मानवाधिकार कार्यकर्ता समाचार एजेंसी के मुताबिक, दो सप्ताह से चल रहे विरोध प्रदर्शनों के दौरान 10,600 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया है. एजेंसी का कहना है कि यह जानकारी ईरान के भीतर मौजूद उनके संपर्कों द्वारा सत्यापित की गई है. रिपोर्ट में बताया गया है कि मृतकों में 490 आम प्रदर्शनकारी और 48 सुरक्षा बलों के सदस्य शामिल हैं. 

कई शहरों में फिर जुटे प्रदर्शनकारी

रविवार को तेहरान, मशहद, करमान और अन्य प्रमुख शहरों में एक बार फिर प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे. हालांकि, भारी सुरक्षा व्यवस्था के चलते ये प्रदर्शन सीमित समय के लिए और छोटे समूहों में हुए. वीडियो फुटेज में देखा गया कि सुरक्षाबलों ने ड्रोन, बैरिकेड्स और कड़ी निगरानी के जरिए भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश की.

सरकार का सख्त रुख और राष्ट्रीय शोक

ईरानी सरकार ने इन घटनाओं को गंभीर बताते हुए कहा है कि हिंसा में मारे गए लोगों को वह “शहीद” मानती है. इसी के तहत तीन दिनों का राष्ट्रीय शोक घोषित किया गया है. सरकारी मीडिया के अनुसार, यह शोक “संयुक्त राज्य अमेरिका और जायोनी शासन के खिलाफ प्रतिरोध में मारे गए लोगों” के सम्मान में रखा गया है.

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने कहा कि लोगों की शिकायतों को सुना जाना चाहिए, लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि “दंगाइयों” के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी. उन्होंने नागरिकों से सोमवार को देशभर में आयोजित “राष्ट्रीय प्रतिरोध मार्च” में शामिल होने की अपील भी की है.

अमेरिका और इजराइल को चेतावनी

ईरान ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने प्रदर्शनकारियों की रक्षा के नाम पर बल प्रयोग किया, तो अमेरिकी सेना और इजराइल को “वैध लक्ष्य” माना जाएगा. ईरानी नेतृत्व का कहना है कि यदि उसे किसी भी तरह का खतरा महसूस हुआ तो वह पहले कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा. युद्ध से जुड़े किसी भी फैसले का अंतिम अधिकार सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के पास होगा.

विरोध की शुरुआत और उसका विस्तार

इन प्रदर्शनों की शुरुआत 28 दिसंबर को ईरान की गिरती मुद्रा और खराब आर्थिक हालात के खिलाफ हुई थी. धीरे-धीरे यह आंदोलन सरकार और मौजूदा व्यवस्था के खिलाफ खुली चुनौती में बदल गया. सरकार का आरोप है कि कुछ प्रदर्शनकारी हिंसा फैला रहे हैं और उनका व्यवहार आतंकवादी संगठनों जैसा है.

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