'खामेनेई पर हमला हुआ तो जंग तय', अमेरिका को ईरान की कड़ी चेतावनी

ईरान ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई पर हमला पूरे देश के खिलाफ युद्ध माना जाएगा. ट्रंप के बयान, बढ़ते विरोध प्रदर्शन और फांसी के संकेतों से हालात और तनावपूर्ण हो गए हैं.

Shraddha Mishra

तेहरान: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है. वॉशिंगटन के साथ टकराव के बीच ईरान ने साफ चेतावनी दी है कि अगर उसके सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को निशाना बनाया गया, तो इसे सीधे तौर पर युद्ध की कार्रवाई माना जाएगा. ईरानी नेतृत्व का कहना है कि ऐसा कोई भी कदम पूरे देश के खिलाफ युद्ध के समान होगा.

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बयान जारी करते हुए कहा कि ईरान किसी भी "अनुचित हमले" का सख्त और गंभीर जवाब देगा. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सर्वोच्च नेता पर हमला केवल एक व्यक्ति पर नहीं, बल्कि पूरे ईरानी राष्ट्र पर हमला माना जाएगा. उनके इस बयान को अमेरिका की हालिया टिप्पणियों के सीधे जवाब के तौर पर देखा जा रहा है. 

ट्रंप के बयान से बढ़ी तल्खी

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार ईरान को लेकर सख्त रुख अपनाते दिख रहे हैं. उन्होंने हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा था कि ईरान में "नए नेतृत्व" की जरूरत है. ट्रंप ने यह भी चेतावनी दी थी कि अगर प्रदर्शनकारियों की हत्या या फांसी जारी रहती है, तो अमेरिका हस्तक्षेप पर विचार कर सकता है. इसी के बाद दोनों देशों के बीच बयानबाजी और तेज हो गई. 

ईरानी राष्ट्रपति ने देश की खराब आर्थिक स्थिति के लिए अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को जिम्मेदार ठहराया. उनका कहना है कि लंबे समय से लगाए गए प्रतिबंधों और शत्रुतापूर्ण नीतियों की वजह से आम ईरानी नागरिकों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने इसे अमानवीय दबाव करार दिया.

फांसी की सजा फिर शुरू होने के संकेत

ईरान की न्यायपालिका ने हाल ही में संकेत दिए हैं कि अशांति से जुड़े मामलों में फांसी की सजा दी जा सकती है. न्यायपालिका के प्रवक्ता ने कहा कि कुछ गतिविधियों को "मोहारेब" की श्रेणी में रखा गया है, जिसका अर्थ है ईश्वर के खिलाफ युद्ध छेड़ना. ईरानी कानून में ऐसे अपराधों के लिए मृत्युदंड का प्रावधान है.

देशभर में फैले विरोध प्रदर्शन

ईरान में विरोध प्रदर्शन पिछले महीने तेहरान के ग्रैंड बाजार से शुरू हुए थे. शुरुआत में ये प्रदर्शन आर्थिक समस्याओं को लेकर थे, लेकिन धीरे-धीरे इनका रूप राजनीतिक हो गया. जल्द ही ये आंदोलन पूरे देश में फैल गया. इसमें दुकानदारों, छात्रों, महिलाओं और युवाओं समेत हर वर्ग के लोग शामिल हुए. कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों ने खुले तौर पर मौजूदा धार्मिक शासन के खिलाफ नारे लगाए. 

प्रदर्शन तेज होने के बाद सरकार ने इंटरनेट सेवाएं बंद कर दीं और सुरक्षा बलों को सड़कों पर तैनात किया गया. हाल के दिनों में हिंसा की घटनाओं में कमी जरूर आई है, लेकिन मौतों, गिरफ्तारियों और कथित दुर्व्यवहार की खबरें अब भी सामने आ रही हैं. एक रिपोर्ट के अनुसार, अशांति के दौरान अब तक हजारों लोगों की जान जा चुकी है.

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